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प्रशासन ने मानी छह मांग तो धरने से उठ गए सफाई कर्मचारी, सोमवार को माफी मांगेगा मनोनीत पार्षद

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बहादुरगढ़। मनोनीत पार्षद और कर्मचारियों के बीच हुए विवाद को सुलझाने में एडी-चोटी का जोर लगाने वाले शासन-प्रशासन को आखिरकार शनिवार को सफलता मिल ही गई। प्रशासन द्वारा छह मांगें माने जाने पर नगर परिषद के सफाई कर्मियों ने धरना वापस ले लिया। सोमवार को कर्मचारी काम पर लौटेंगे, साथ ही मनोनीत पार्षद भी इसी दिन दरी पर आकर कर्मचारियों से माफी मांगेगा। कर्मचारियों का कहना है कि यदि मनोनीत पार्षद ने उनके बीच आकर माफी नहीं मांगी तो उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

ये है मामला
प्रशासनिक अधिकारियों के आदेश पर गत 27 सितंबर को नगर परिषद की टीम सिटी पार्क मेट्रो स्टेशन के नजदीक अतिक्रमण हटाने गई थी। इस दौरान कर्मचारियों का रेहड़ी वालों से विवाद हो गया था। उस दौरान रेहड़ी वालों का पक्ष ले रहे मनोनीत पार्षद राजपाल शर्मा भी सफाई कर्मियों से उलझ गए। कर्मचारियों ने मनोनीत पार्षद पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने व मारपीट के आरोप लगाए। उसी रात नप के ईओ की शिकायत पर सिटी थाने में मनोनीत पार्षद के खिलाफ एससी एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज हो गया था।
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16 दिन रहे धरने पर
गिरफ्तारी नहीं हुई तो 28 को कर्मचारी धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों ने लगातार 16 दिन धरना दिया। इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों व कर्मचारी संगठनों ने उनको समर्थन दिया। बीच बीच में प्रशासनिक अधिकारियों ने भी कर्मचारियों को समझौते के लिए मनाया, दबाव भी बनाया गया लेकिन बात नहीं बनी।

विधायक ने भी की अपील
शनिवार को विधायक नरेश कौशिक कर्मचारियों के बीच धरने पर पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि अभी राजपाल यहां नहीं है। उसकी तरफ से वो माफी मांगते हैं। हड़ताल खोल कर काम पर लौट जाओ। एक-दो दिन में पाले भी माफी मांग लेगा।

मीटिंग में हुआ समझौते पर मंथन
शनिवार दोपहर एक तरफ जहां गेट पर कर्मचारी धरने पर बैठे थे, वहीं दूसरी तरफ नगर परिषद कार्यालय में प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रतिनिधि मंडल की एक मीटिंग हुई। इस मीटिंग में एडीसी सुशील सारवान, एसडीएम जगनिवास, नप ईओ अपूर्व चौधरी, विधायक नरेश कौशिक, वाल्मीकि समाज के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष व रिटायर्ड अधिकारी एमएल सारवान और कर्मचारियों की तरफ से नगर पालिका कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान नरेश शास्त्री, राज्य सचिव सुनील, जिला प्रधान राजेंद्र, जिला सचिव अमित, बहादुरगढ़ इकाई प्रधान जयभगवान, सर्व कर्मचारी संघ हरियणा के जिला वरिष्ठ उपप्रधान बंसीलाल व ब्लॉक प्रधान बिजेंद्र सैनी आदि मौजूद थे। करीब दो घंटे तक चली इस मीटिंग में दोनों पक्षों के बीच मंथन हुआ और अंतत: सहमति हो गई। कर्मचारी संघ के प्रधान नरेश शास्त्री ने धरना स्थल पर आकर कर्मचारियों को मीटिंग में मांगें माने जाने की बात बताई तो कर्मचारियों ने धरना खोल दिया। कर्मचारियों ने ये भी कहा कि अगर सोमवार को पाले माफी नहीं मांगता है तो उनकी लड़ाई कानूनी तौर पर जारी रहेगी।

प्रशासन ने मानी ये छह मांग
कर्मचारियों ने विधायक एवं अधिकारियों के समक्ष मनोनीत पार्षद को दरी पर आकर माफी मांगने, 16 दिन तक हड़ताल पर रहे कर्मचरियों को उनका वेतन देने, यूनियन कार्यालय खोला जाने, समान काम समान वेतन दिया जाने, पार्ट-1 के कर्मचारियों को 13500 वेतन दिया जाने की मांग रखी। इसके अलावा यह भी कहा गया कि बिना ड्यूटी मजिस्ट्रेट व पुलिस के कर्मचारी अतिक्रमण हटाने नहीं जाएंगे। इन छहों मांगों को प्रशासन ने मान लिया है। प्रशासन की ओर से इस संबंध में कर्मचारियों को सहमति पत्र दिया गया है। जिस पर अतिरिक्ति उपायुक्त सुशील सारवान, विधायक नरेश कौशिक, उपमंडल अधिकारी जगनिवास, ईओ अपूर्व चौधरी व नप सचिव मुकेश के हस्ताक्षर हैं। उधर, एसडीएम जगनिवास ने भी मांगें माने जाने की पुष्टि की है।
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जनता को हुई परेशानी
27 सितंबर को यह विवाद शुरू हुआ, तब से कर्मचारियों ने काम छोड़ दिया। इस कारण शहर की तमाम कॉलोनियों में सफाई व्यवस्था चरमरा गई। मनोनीत पार्षद और कर्मचारियों के इस विवाद को सुलझने में 16 दिन लग गए, इससे इलाके में स्वच्छता मुहिम को भी पलीता लगा है। यदि पहले प्रयास किया जाता तो शहर की जनता को परेशानी न झेलनी पड़ती।
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