नशे की जद में नीमली गांव, पंचायत ने पुलिस पर लगाए समय पर न पहुंचने के आरोप
चरखी दादरी।
जिले की सीमा का आखिरी गांव नीमली पिछले करीब एक दशक से नशे की जद में है। तस्करी के लिए माफिया नकली शराब आसपास के क्षेत्र में ही तैयार करते हैं जबकि चरस की तस्करी सीधा नेपाल से होती है। पंचायत सदस्यों ने भी कबूल किया कि गांव में खुले तौर पर नशे की तस्करी होती है और सीधा थाने में मुखबरी देने पर भी पुलिस समय पर नहीं पहुंचती। इससे खेप और आरोपी दोनों मौके से निकल लेते हैं। नीमली गांव के सरपंच त्रिलोक सिंह पुलिस विभाग में एएसआई के पद से सेवानिवृत्त है। उन्होंने नशाखोरी के खेल में पुलिस की मिलीभगत को सबसे अहम बताया। पुलिस सूत्रों की ही मानें तो नकली शराब या मादक पदार्थों की तस्करी के जो मामले सामने आते हैं उनमें से 80 प्रतिशत के तार नीमली गांव से जुड़े होते हैं। कुछ सालों में पकड़ी गई करीब एक दर्जन शराब की फैक्ट्रियों में भी नीमली गांव के शराब माफिया का हाथ होने की बात भी पुलिस जांच के दौरान सामने आई। तीन दिन पूर्व गांव भागवी में पकड़ी गई नकली शराब बनाने की फैक्ट्री के तार भी जांच में नीमली निवासी बिल्लू से जुड़े मिले हैं। ग्राम पंचायत का कहना है कि वो प्रशासन का हर सहयोग करने को तैयार हैं बशर्ते प्रशासन गांव से नशाखोरी बिल्कुल खत्म कर दें।
जानकारी के अनुसार नीमली गांव की आबादी करीब सात हजार है और गांव में करीब 2500 वोट हैं। बीते कुछ सालों से गांव का नाम नशाखोरी में चरखी दादरी ही नहीं आस-पास के जिलों में भी खराब हुआ है। इस गांव में कई नकली शराब बनाने की फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं। करीब तीन साल पहले भिवानी पुलिस टीमों ने गांव में आकर शराब की 15 घरों से करीब 15 हजार पेटियां बरामद की थी। इस दौरान करीब 15 से 20 लोगों को भी एकसाथ गिरफ्तार किया गया था। इसक कुछ समय तक तो गांव नशाखोरी रूकी रही लेकिन अब फिर से गांव में नशे का खुला खेल चल रहा है। ग्राम पंचायत ने नशाखोरी को बढ़ावा मिलने का ठीकरा पुलिस विभाग पर फोड़ा है। पुलिस विभाग से रिटायर्ड सरपंच त्रिलोक सिंह का कहना है कि मुखबिर अगर सीधे 100 नंबर पर दी जाएं तो एक घंटे के अंदर पुलिस मौके पर पहुंचे जाती है और अगर सीधा थाने में दें तो पुलिस टाल मटोल कर घंटों बाद पहुंचने का तर्क देती है। तब तक नशे की खेप और आरोपी दोनों निकल चुके होते हैं।
सरपंच त्रिलोक सिंह की की मानें तो गांव में एक पूर्व सरपंच के कार्यकाल में नशे का कारोबार शुरू हुआ था और यह अब तक जड़ें जमाए हुए है। उन्होंने बताया कि गांव से आसपास ही नहीं बल्कि जिले के बहुत बड़े भाग में नशे की खेप पहुंचती है। सरपंच का कहना है कि मुखबिरी के 90 प्रतिशत मामलों में पुलिस मौके पर समय पर नहीं पहुंचती।
बाक्स: शराब माफिया युवाओं को पैसों का लालच देकर बना रहा अपराधी
नकली शराब की बीते तीन सालों में जो तीन बड़ी फैक्ट्रियां पकड़ी गई हैं, उनमें नीमली गांव के युवा ही काम करते पुलिस ने पकड़े। पुलिस पूछताछ के दौरान इन युवाओं ने बताया कि सस्ती से महंगी शराब की 100 पेटियां तैयार करने पर ग्रुप के पांच सदस्यों को तीन हजार रुपये दिए जाते थे। वहीं, भागवी गांव में शराब फैक्ट्री का भंड़ाफोड़ के दौरान पकड़े गए नीमली निवासी आरोपी अनुज ने पुलिस को बताया था कि उसे प्रतिदिन 500 रुपये दिए जाते थे।
चरस का गांव में एक बड़ा सप्लायर भी
नकली शराब तैयार करने के साथ-साथ नीमली गांव में चरस का कारोबार भी बीते कुछ सालों में फला-फूला है। पंचायत सदस्यों की मानें तो गांव में चरस का एक ही बड़ा सप्लायर है और वह आगे छाटे सप्लायरों को चरस सप्लाई करता है। एक पंचायत सदस्य ने बताया कि काफी तादाद में उसके पास चरस हर समय रहती है लेकिन पुलिस इसके बावजूद उसे काबू नहीं करती।
पुलिस पकड़े तस्करों को, पंचायत करेगी हरसंभव मदद: सरपंच
सरपंच त्रिलोकचंद ने बताया कि एक बार गांव में फिर से व्यापक स्तर पर अभियान चलाने की जरूरत है। इसके लिए पुलिस विभाग को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि पंचायत गांव से नशा खत्म करने के लिए प्रशासन का हर सहयोग करने को तैयार है। नशाखोरी में नाम सामने आने से गांव की छवि भी धूमिल हो रही है।
वर्जन::
पूरे जिले में नशा तस्करी रोकने के लिए पुलिस अधीक्षक के निर्देशों पर अभियान चलाया गया है। नीमली गांव का नाम नकली शराब या चरस के मामलों में कई बार सामने आ चुका है। पुलिस ने अपना खुफिया नेटवर्क मजबूत कर दिया है। पंचायत अगर सहयोग को तैयार है तो पुलिस गांव में लगातार दबिश देकर नशाखोरी को बढ़ावा देने वालों को काबू करेगी। इसके लिए अलावा पुलिस गांव के युवाओं को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाएगी।
सुरेंद्र दांगी, पुलिस प्रवक्ता