बजट: किसान खुश, व्यापारी हताश, कर्मचारी वर्ग निराश
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
केंद्रीय वित्तमंत्री के बजट पर जिलेवासियों की मिलीजुली प्रतिक्रिया है। ज्यादातर वर्ग इस बजट से नाखुश नजर आ रहे हैं। कर्मचारी वर्ग ने इनकम टैक्स की सीमा ढाई से बढ़ाकर पांच लाख करने की उम्मीदें पूरी नहीं होने पर बजट को निराशाजनक बताया है। किसानों ने खरीफ फसलों की खरीद पर लागत का डेढ़ गुना मुनाफा देने की घोषणा पर खुशी जताई है लेकिन किसान संगठनों ने इसे महंगाई बढ़ाने वाला बजट बताया है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों को घटाने के लिए कोई ठोस प्रावधान बजट में शामिल नहीं होने से किसान वर्ग और व्यापारी वर्ग हताश है। किसान संगठनों ने 2022 तक किसानों की आय बढ़ाकर दोगुनी करने की घोषणा को महज दिखावा बताया है। वित्तमंत्री के बजट में जिले की रेल सुविधाओं के विस्तार की भी उम्मीदें थीं जो कि इस बार भी धूमिल हो गई। अभी जिले के रेल यात्रियों को दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन चलने का और इंतजार करना पड़ेगा। दैनिक रेल यात्री संघ सहित व्यापारियों व अन्य वर्ग को दादरी-फरूखनगर रेलवे लाइन की सुविधा बजट में मिलने की आस थी जोकि पूरी नहीं हुई। इससे दादरी का गुरुग्राम से सीधा जुड़ाव का इंतजार और लंबा हो गया है। व्यापारियों को उनके हित में कोई बड़ी घोषणा न होने का मलाल है। मोबाइल पर वेट बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने के कदम से ग्राहक व मोबाइल विक्रेता नाखुश हैं। वरिष्ठ नागरिकों ने स्वास्थ्य बीमा पर टैक्स की छूट बढ़ाकर 50 हजार करने को सराहनीय कदम बताया है। वहीं, व्यापारियों ने ई-वे बिल के विरोध के साथ-साथ बजट पर भारी नाराजगी जताई है।
किसान संगठन: किसानों की नहीं देश की आय बढ़ाने वाला है बजट
किसान संगठन इस बजट से कतई संतुष्ट नहीं हैं। सरकार बजट में किसानों की आय दोगुना करने की बात जरूर कर रही है लेकिन धरातल पर कुछ नहीं नजर आ रहा है। इस आम बजट में किसानों के कोई विशेष व नया कुछ नहीं दिया गया जिससे किसान वर्ग को राहत मिल सके। किसान को कर्ज मुक्त करने की दिशा में कोई काम नहीं किया गया है जिससे किसान की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। - सुनील कुमार, प्रदेश अध्यक्ष किसान जनहित समिति
बजट में किसान को कोई राहत नहीं दी गई है। किसी प्रकार की कोई सब्सिडी नहीं दी गई है। पेट्रोल व डीजल रेट से कोई राहत नहीं मिल पा रही है। इस बजट से तो महंगाई और बढ़ेगी। यह बजट देश की आय बढ़ाने वाला जरूर कहा जा सकता है लेकिेन आम आदमी के हितों के अनुकूल नहीं है। किसान, व्यापारी, दुकानदार, मजदूर व आम आदमी के हित में यह बजट नहीं है। बजट किसानों की उम्मीदों के विपरीत है। - सुनीता, महिला विंग प्रदेश अध्यक्ष किसान जनहित समिति
कर्मचारी संगठन: इनकम टैक्स सीमा में छुट नहीं, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी टैक्स के दायरे में अब शामिल
कर्मचारियों की पहली उम्मीद आयकर मेें छूट की सीमा बढ़ना था लेकिन आम बजट में इस स्लैब को 2.50 लाख तक ही सीमित रखा है जबकि इसे कम से कम पांच लाख तक किया जाना था अब तो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी आयकर से नहीं बच पाएगा। सरकार का यह बजट कर्मचारी विरोधी है। बजट से कर्मचारी वर्ग में खासी नाराजगी है। बजट में किसान, व्यापारी, मजदूर वर्ग के लिए भी कुछ नहीं नया नहीं है। बजट पूरी तरह से जनभावनाओं के विपरीत है। - संजीव मंदोला, राज्य महासचिव हरियाणा कर्मचारी महासंघ
आम बजट में सरकार ने आम आदमी को कोई राहत नहीं दी है। यह बजट कर्मचारी, किसान, व्यापारी व मजदूरी विरोधी है। आयकर में छूट की सीमा न बढ़ाकर सरकार ने जनविरोधी होने का परिचय दिया है इससे आम लोगों में नाराजगी है। बजट पूरी तरह से जनविरोधी व कर्मचारी विरोधी है। बजट में कोई नई राहत नहीं दी गई है। बजट से अब और महंगाई बढ़ना स्वाभाविक है। - सत्यवान शास्त्री, जिला प्रधान कर्मचारी महासंघ,
व्यापारी वर्ग: उम्मीदों के विपरीत है बजट
आम बजट में सरकार ने न तो आयकर की छूट में सीमा को बढ़ाया और नहीं कोई कर हटाया गया है ताकि व्यापारी वर्ग को छूट मिल सके। बजट संतुलित नहीं कहा जा सकता। सरकार जीएसटी सरलीकरण पर भी ध्यान नहीं दे रही है। ई-वे बिल भी सरकार ने लागू कर दिया है जिससे और भी परेशानी बढ़ जाएगी। जीएसटी का पूरा सिस्टम ठप पड़ा है। इस बजट से व्यापार वर्ग को कोई फायदा नहीं होने वाला है। बजट व्यापारी वर्ग की इच्छाओं के विपरीत है। - रामकुमार रिटोलिया, अनाज मंडी प्रधान
यह बजट मिला-जुला ही कहा जा सकता है। सोने-चांदी पर किसी प्रकार के कर आदि की कोई विशेष छूट नहीं दी गई जिससे सोना व्यापारियों को व आम आदमी को लाभ हो सके। आयकर की छूट सीमा भी नहीं बढ़ाई गई जिससे करों का बोझ और बढ़ेगा। गरीब आदमी को भी बजट में कोई खास राहत नहीं है। नए मेडिकल कालेज खोले जाने का बजट में जो प्रावधान किया गया है वह सही है। बजट में गरीबों के लिए डायलिसिस की सुविधा का फ्री होना भी सही कदम है। - सुरेश सोनी, स्वर्णकार एसोसिएशन प्रधान
उद्योगपति बोले: बजट ने नहीं दी कोई खास राहत
जिला के उद्योगपति भी बजट को लेकर पूरी तरह से संतुष्ट नहीं है। ई-वे बिल लागू कर दिए जाने पर इस वर्ग के व्यवसायियों में और भी नाराजगी है। यह बजट उ मीदों पर पूरी तरह से खरा नहीं उतरा। आयकर में छूट की सीमा भी नहीं बढ़ी। उद्योगपतियों व व्यापारियों के लिए कोई राहत वाली बात बजट में नहीं है। इस आम बजट को संतुलित नहीं कहा जा सकता। व्यापार जगत तो पहले से ही घाटे में चल रहा है इस बजट से काफी उम्मीदें थी लेकिन कोई खास नहीं मिला। - सुशील कुमार, व्यवसायिक प्रतिष्ठान संचालक
फुड ग्रेन पर कर में कोई राहत नहीं मिली है। पेट्रोल व डीजल तेल की बढ़ती कीमतों पर कोई अंकुश नहीं लगा है। ई-वे बिल लागू कर और भी बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है। इस समय उद्योगपतियों का कारोबार ठप पड़ा रहा है। इस बजट में सरकार से उम्मीदें थीं लेकिन कुछ नया नहीं मिला। छोटे उद्योगों के लिए बजट में नया कोई प्रावधान नहीं किया गया है। सरकार के इस बजट से व्यापारी व उद्योगपति संतुष्ट नहीं है। - विनोद कुमार, मिल मॉलिक
गृहणियां बोलीं: थाली सजाने वाला नहीं है सरकार का बजट
सरकार के बजट में रसोई घर के लिए कोई छूट नहीं दी गई है। दाल, चीनी व राशन का सारा सामान धीरे-धीरे महंगा होता जा रहा है। आम बजट में उम्मीद के अनुसार कुछ खास नहीं मिला। सरकार को अपने बजट के साथ घर के बजट पर भी ध्यान देना चाहिए था। बजट में शिक्षा सुधार पर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया है। सरकार ने अपने बजट में घर के जरूरत की चीजें जैसे कार, मोटर साइकिल, मोबाइल फोन, चांदी, सोना, सब्जियां, सनग्लास, सोया प्रोटीन पदार्थ महंगे कर दिए व केवल काजू के दाम सस्ते कर अमीरों को फायदा पहुुंचाया है। - सुमन देवी, गृहिणी
मोदी सरकार ने बजट में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोई प्लान तैयार नहीं किया है। सरकार ने सभी चीजों के दामों में वृद्धि कर दी है। बजट में बच्चों के हर प्रकार के खिलौने मंहगे कर दिए। जरूरत की चीज जैसे फ्रूट जूस पर आयात शुल्क 30 से बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया है जोकि अब अधिक मंहगा मिलेगा। बजट में महिलाओं के लिए ईपीएफ में 12 प्रतिशत से घटाकर आठ प्रतिशत अंशदान का प्रावधान जरूर किया है जिससे महिलाओं को काफी फायदा मिलने की उम्मीद है। - कमलेश देवी, गृहिणी
छात्र वर्ग: रोजगार परक नहीं है वित्तमंत्री का बजट
सरकार ने बजट में युवाओं के रोजगार के लिए कोई प्लान तैयार नहीं किया है। युवाओं के लिए प्रति वर्ष एक करोड़ नौकरियों की जरूर है। सरकार ने अपने पिछले बजट में भी युवाओं के लिए रोजगार बढ़ाने पर काफी जोर दिया था। नौकरी के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ रही है लेकिन सरकार ने अपने इस बजट में भी युवाओं के रोजगार के लिए कुछ खास नहीं किया। बेरोजगार युवाओं को सरकार की तरफ से अब तक कोई भत्ता नहीं मिल पाया है। - पीयूष, छात्र
देशभर में 24 नए मेडिकल खोले जाने का सरकार का फैसला बिल्कुल सही है। शिक्षा सुधार में भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। स्कूल व कॉलेजों में ब्लैक बोर्ड की जगह अब डिजिटल बोर्ड लगाए जाने का प्रावधान सही है। बीटेक के एक लाख छात्रों को स्कॉलरशिप देने का प्रावधान भी सरकार ने सही किया है। एक लाख ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड से जोड़ने के बाद गांवों के युवाओं को रोजगार मिलने में भी काफी मदद मिलेगी। सरकार के बजट से युवाओं को काफी फायदा मिलेगा। - सूरज, छात्र
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मोबाइल पर वेट में बढ़ोतरी, ग्राहक व दुकानदारों को होगा नुकसान
सरकार पिछले काफी समय से भारत को डिजिटल इंडिया बनाने पर जोर दे रही है लेकिन मोदी सरकार ने अपने बजट में मोबाइल पर कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी जिसके कारण मोबाइल अब महंगे हो जाएंगे। सरकार एक तरफ तो गांवों में इंटरनेट के विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपये खर्च करने की बात कह रही लेकिन बजट में मोबाइल के दामों में बढ़ोतरी कर दी। कंपनियों ने सस्ते मोबाइल बनाकर लोगों के लिए काफी फायदा किया था लेकिन सरकार ने बजट में मोबाइल पर कस्टम ड्यूटी लगाकर इन महंगा कर दिया। सरकार के इस बजट से दुकानदारों में काफी रोष है। - संदीप फौगाट, मोबाइल मार्केट प्रधान
मोबाइल पर कर लगाकर सरकार ने आम आदमी के अहित में किया है। मोबाइल आज आम आदमी की जरूरत है। मोबाइल पर कस्टम लगाकार सरकार ने मुश्किलें पैदा कर दी है इससे मोबाइल और महंगे हो जाएंगे। सरकार का यह बजट मोबाइल कारोबारियों के हित में नहीं है। बजट में इन कारोबारियों के लिए कुछ नहीं नहीं दिया गया है कोई खास राहत नहीं दी गई है। - राजेश कुमार, मोबाइल कारोबारी
चिकित्सक बोले: चिकित्सा क्षेत्र की उम्मीदों पर सटीक नहीं बैठा बजट
मोदी सरकार ने अपने बजट में इनकम टैक्स की स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। सरकार को अपने बजट में टैक्स स्लैब को पांच लाख तक कर देना चाहिए था। इससे लोगों को थोड़ी राहत मिलती। बजट उम्मीदों के अनुसार न मिलने के कारण मिडिल क्लास को कोई राहत नहीं मिली है। सरकार ने कस्टम ड्यूटी महंगी कर दी है, साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सेस (कर) बढ़ा दिया है। सरकार ने दवाई पर जीएसटी कम नहीं की। दवाई पर जीएसटी अधिक लगने के कारण आम नागरीक को दवाई मंहगी मिल रही है। - अजय, डॉक्टर
सरकार ने अपने बजट में डॉक्टर के लिए कोई विशेष प्लान तैयार नहीं किया है। सरकार ने केवल गरीब परिवारों को के लिए पांच लाख का हेल्थ बीमा देना का प्लान तैयार ठीक किया है इससे गरीब वर्ग के लोगों को उपचार में काफी फायदा मिलेगा। सरकार को मरीजों के दवाई में भी छूट देनी चाहिए थी जीएसटी लगने के कारण गरीब लोगों को दवाई काफी मंहगी पड़ रही है। टैक्स स्लैब में सरकार को अधिक छूट देनी चाहिए थी। गरीब परिवार वर्ग को ढाई लाख रुपये में घर चलाना काफी मुश्किल हो जाता है। - नवीन झांझड़िया, डॉक्टर