अमर उजाला ब्यूरो
बादली (झज्जर)।
जनवरी में विकास कार्यों पर महंगाई की मार पड़ने लगी है। इससे गांवों में चल रहे विकास कार्य बाधित होने लग गए हैं और पंचायतों व निजी ठेकेदारों ने भी काम करने से हाथ हिलाना शुरू कर दिया है। विकास कार्य रुकने का सबसे बड़ा कारण निर्माण सामग्री का महंगा होना है। जिस भाव में ठेकेदार और पंचायतों को मार्केट से माल उठाना पड़ रहा है, वह बिल पंचायती राज विभाग से उस भाव में पास नहीं हो रहा।
महंगाई की बात की जाए तो जनवरी में निर्माण सामग्री के भाव डेढ़ गुना तक बढ़ गए हैं। हालांकि नवंबर माह के पहले सप्ताह से ही निर्माण सामग्री के भाव धीरे-धीरे बढ़ने से पंचायत और ठेकेदारों का बजट बिगड़ना शुरू हो गया। जिस तरह से निर्माण सामग्री के भाव बढ़ रहे हैं उससे अगले कुछ दिनों में ठेकेदार और पंचायतें पूरी तरह से विकास कार्य और निर्माण कार्य कराने से पल्ला झाड़ लेंगे। भले ही पंचायतों और ठेकेदारों को कुछ नुकसान उठाना पड़े। मगर वह काम सुचारु रहता है तो उन्हें ज्यादा नुकसान होगा। इसी के चलते अगर पंचायती राज विभाग ने सरकारी मूल्य बढ़ाकर बिल पास नहीं किया तो महंगाई की मार विकास कार्यों पर साफ देखने को लिए मिलेगी। ऐसा ही रहा तो वह दिन दूर नहीं जब ठेकेदार और पंचायतें गांवों के विकास कार्य में अपने आप को असमर्थ साबित करेंगे।
ईंटों के भाव नवंबर माह के पहले सप्ताह में ही बढ़ने शुरू हो गए थे। ईंटों की बात की जाए तो अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में ईंटों का भाव 3300 से 3500 रुपये प्रति हजार था। जोकि नवंबर के पहले सप्ताह में ही बढ़कर 4000 के पार हो गई। भट्ठों पर ईंटों का भाव बढ़ने का कारण एनजीटी द्वारा पुरानी तकनीक से चल रहे भट्ठों पर शत-प्रतिशत पाबंदी लगाना रहा। अब केवल जिग-जैग तकनीक वाले आधुनिक भट्ठे ही चल रहे हैं। जहां अब बढ़ते-बढ़ते का भाव 5500 रुपये प्रति हजार के पार हो गया है। इसके अतिरिक्त महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और राजस्थान में ओवरलोडिड वाहनों में शिकंजा कसने के चलते रोड़ी और क्रेशर के भाव आसमान में है, जिनका प्रभाव इंटर लोक टाइल ईंटों पर भी पड़ गया है।
ग्राम पंचायत एकत्रित होकर पंचायत मंत्री सहित जिला उपायुक्त और पंचायत विभाग के अधिकारियों को मार्केट भाव के बराबर सरकारी भाव मिलने की मांग कर चुकी है। कई सरपंचों का कहना है कि उन्होंने महंगाई के चलते गांव में कुछ निर्माण कार्य रोक दिए हैं। वह इंतजार कर रहे हैं कि या तो पंचायत राज सरकारी दाम बढ़ा दे या फिर आने वाले दिनों में मार्केट भाव कम हो जाए क्योंकि वर्तमान समय में दोनों भाव निर्माण कार्य कराने में उचित नहीं है।
सामग्री पुराने भाव नए भाव सरकारी भाव
ईंट 3300 5500 4000 प्रति हजार
रोड़ी 33 38 40 33 प्रति फुट
क्रेसर 34 44 46 35 प्रति फुट
इंटरलोक टाइल 10 14-15 11:20 पैसे प्रति
क्या कहते है बीडीपीओ
खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी परविंद्र का कहना है कि पंचायतों की ओर से सरकारी रेट बढ़ाने की मांग आई है। पिछले दिनों पंचायत मंत्री से भी इस मामले में पंचायतों का मिलना हुआ था जिसके बाद से उनके पास विभागीय तौर पर रेट बढ़ाने के कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।