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ीवरे व्यवस्था बदहाल, एसटीपी रेजिंग प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में

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सीवर व्यवस्था बदहाल, एसटीपी रेजिंग प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
शहर की सीवरेज व्यवस्था बदहाल पड़ है लेकिन जन स्वास्थ्य विभाग एसटीपी रेजिंग प्रोजेक्ट को सिरे नहीं चढ़ा पा रहा है। इस प्लांट के अतिरिक्त ट्रीट पानी को समायोजित करने की प्लानिंग अप्रैल माह में तैयार की गई थी लेकिन अब तक प्रोजेक्ट फाइलों में अटका पड़ा है। विभाग ने इस प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने के लिए 24.50 लाख का इस्टीमेट तैयार कर रखा है। यह एसटीपी करीब नौ एकड़ जमीन पर बना है। रेजिंग प्रोजेक्ट के ठंडे बस्ते में पड़ा होने से शहरवासियों को सीवरेज कुप्रबंधन की समस्या झेलनी पड़ रही है।
शहर के दोनो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों के दूषित पानी का प्रबंधन न होने की वजह से बार- बार सीवरेज की समस्या पैदा हो रही है। थोड़ी-सी बारिश होने पर सीवरेज की मेन पाइप लाइनों से दवाब नहीं बन पाता। विभाग ने इसके लिए 29 करोड़ का पाइप लाइन बिछाए जाने संबंधी प्रपोजल तैयार किया था उसे भी सरकार की तरफ से मंजूरी नहीं मिली थी। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी का समायोजन न होने से शहर की सीवरेज व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस समय एसटीपी के दूषित पानी का प्रबंधन नहीं हो रहा है हैं। हालांकि बीच -बीच में सीवरेज पानी को फिल्टर तो कर दिया जाता है लेकिन इस पानी का कही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। इससे समय-समय पर प्लांट में सीवरेज पानी का स्टोरेज बढ़ जाने पर शहर की सीवरेज व्यवस्था प्रभावित होने लगती है। शहर में सीवरेज की मेन लाइनों का दबाव कम हो जाता है इससे कई बार मेन लाइन बैक मार देती है।
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किसानों ने हाथ खींचे पीछे, लाचार हुआ जन स्वास्थ्य विभाग
शहर से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित दादरी-दिल्ली बाईपास के समीप और गांव रामनगर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बने हैं। इन प्लांटों में शहर का दूषित पानी जाता है। जिस समय यह ट्रीटमेंट बने थे उस समय इन क्षेत्रों में किसानों को इस पानी की सिंचाई के रूप में जरूरत थी लोग इस ट्रीट पानी से सिंचाई कर लेते थे लेकिन अब यह एरिया धीरे-धीरे आबाद होने लगा है। आसपास मकान और दुकानें भी बनने लगी हैं। खेतों में भी अब चौव्वे की समस्या पैदा हो गई है। ऐसे में किसान अब इस सीवरेज के ट्रीट पानी से सिंचाई भी नहीं कर रहे हैं। इसे पानी का इस्तेमाल न होने की वजह से इसके समायोजन व प्रबंधन की समस्या बीचबीच में सीवरेज संबंधी परेशानी पैदा कर रही है।

दो ड्रेन प्रोजेक्ट भी हो चुके हैं रद्द
विभाग ने इस समस्या से निजात दिलाने के लिए पिछले साल भी एक प्रपोजल तैयार किया था। इसके तहत इस सीवरेज पानी को ड्रेन नंबर आठ में डाले जाने का प्लान तैयार किया था। इसके लिए विभाग ने करीब 25 किलोमीटर की लंबाई में लोहे की लाइन बिछाए जाने की प्लानिंग की थी ताकि इस फालतू पानी को ड्रेन नंबर आठ में डाला जा सके। जनस्वास्थ्य विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए 28 करोड़ का इस्टीमेट भी तैयार किया था लेकिन इस प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिल सकी थी। किसानों द्वारा खेतों की जमीन देने से इनकार करने पर जिले में बड़ी ड्रेन के निर्माण का एक और भी प्रोजेक्ट रद्द हो चुका है। यह ड्रेन 90 करोड़ में 63 हजार वर्ग फीट लंबाई में बननी थी ताकि इन दोनो एसटीपी का दूषित पानी इन ड्रेन में डाला जा सके। इससे शहर की सीवरेज व्यवस्था भी बाधित न होने पाए।

एसटीपी टैंक की गहराई बढ़ाना है विभाग की प्लानिंग
अप्रैल माह में जनस्वास्थ्य विभाग ने एसटीपी दूषित पानी प्रबंधन के लिए नया प्रोजेक्ट तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट के तहत विभाग की तरफ से समसपुर स्थित एसटीपी की रेजिंग की जानी है। यहां बने पौंड की गहराई भी बढ़ाई जानी है ताकि अधिक मात्रा में पानी का स्टोरेज हो सके। यह गहराई मौजूदा सात वर्ग फीट से बढ़ाकर करीब 12 वर्ग फीट की जानी है। इसके अलावा पौंड का थोड़ा दायरा भी बढ़ाया जाना है। एसटीपी का बिजली सिस्टम भी पूरी तरह से दुरुस्त किया जाना है। कई बिजली यंत्र नए लगाए जाने हैं। पानी उठान के लिए नए पंप सैट भी लगाए जाने हैं ताकि पानी का दबाव बढ़ने पर अधिक से अधिक दूषित पानी उठाकर पौंड में डाला जा सके।
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कोट
विभाग की तरफ से इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शहर की सीवरेज व्यवस्था को ठप नहीं होने दिया जाएगा। मेन लाइनों की छंटाई भी की गई है। जैसे प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलेगी जल्द ही पूरे सिस्टम को दुरूस्त कर दिया जाएगा। - एसडीओ रामपाल, जनस्वास्थ्य विभाग
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