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वैर-भाव को भूलाकर सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करें: राजेंद्र दास

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अमर उजाला ब्यूरो
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बेरी। मनुष्य का पूरा जीवन ईर्ष्या, छल में बीत जाता है। मुनष्य को आपसी बैर भाव छोड़कर हमेशा सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करना चाहिए, क्योंकि हमें सभी को एक दिन यह संसार छोड़कर जाना है। यह बात वीरवार को गांव माजरा में स्थित जटेला धाम आयोजित सत्संग कार्यक्रम में स्वामी नित्यानंद महाराज जटेला धाम आश्रम माजरा दूबलधन के गद्दीनशीन महंत राजेंद्र दास ने श्रद्धालुओं पर प्रभु नाम की बरसात करते हुए कही। महंत राजेंद्र दास ने सत्संग करते हुए कहा कि हमें अपने जीवन में किए गए पुण्यों व दान को याद न रखते हुए इस बात को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि कोई पाप या अधर्म हमारे अपने हाथों से न तो हो और न ही हम किसी भी प्रकार इसका हिस्सा बने। उन्होंने कहा कि हम सभी में परमात्मा का वास है लेकिन उससे मिलाने का सबसे सरल व सुगम माध्यम सत्संग व संतों का आश्रय होता है। उन्होंने कहा कि सच्चे संत हमेशा मानव को कल्याण का रास्ता दिखाते है। मुनष्य हमेशा प्रभु से प्रेम करें और पाखंडों से सदैव दूर रहे। संत राजेंद्र दास ने कहा कि जिस तरह भक्त को भगवान के लिए हमेशा समर्पित रहना चाहिए उसी प्रकार भगवान भी अपने सच्चें भक्तों के प्रति हमेशा समर्पित रहते है, इसलिए सभी को भगवान में आस्था रखनी चाहिए। गुरुवाणी का वर्णन करते हुए कहा कि जिस तरह हवा हमेें दिखाई नही देती है। लेकिन जब वह जोर से चलती है तो बडे़-बड़े पेड़ों को जड़ से उखाड़ फेंकती है। ठीक उसी प्रकार सतगुरु की रहमत भी हमें दिखाई नही देती। लेकिन यदि हमें उन पर पूर्ण विश्वास है तो हमारा बड़े-बड़े से कार्य भी क्षण भर में दूर हो जाता है।
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