बादली। कृषि विज्ञान केन्द्र की ओर से चल रहे मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण शिविर में वरिष्ठ संयोजक डॉ. शशि वशिष्ठ ने युवकों को जागरूक किया। उन्होंने विभिन्न गांवों के युवाओं को बताया कि शहद के पौषक तत्व व इसके अन्य गुणों के कारण इसकी मांग दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। प्रशिक्षण शिविर में कहा कि मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए उचित समय अक्तूबर और नवंबर का महीना सबसे उचित है क्योंकि मधुमक्खियों को फूलों की आवश्यकता होती है जिससे वे मकरंद व पराग एकत्रित करके शहद बनाती हैं। मधुमक्खी पालन कम से कम 10 डिब्बों/कालोनियों से शुरू करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि कालोनी किसी सरकारी या विश्वास के मधुमक्खी पालक से ही लेनी चाहिए और रानी मक्खी बिल्कुल नई होनी चाहिए। मधुमक्खियों की विभिन्न जातियों के बारे में विस्तार से बताया ओर कहा कि इटालियन मधुमक्खी पालने के लिए सबसे अच्छी है क्योंकि यह जाति शांत प्रवृत्ति की है तथा छत्ता छोड़कर नहीं भागती। विभिन्न मौसमों में मधुमक्खियों के प्रबंधन के बारे मेें भी विस्तार से बताया और कहा कि गर्मी के मौसम में छत्तों को छाया में तथा सर्दी में धूप में रखना चाहिए तथा बरसात के मौसम में हवा का आवागमन जरूर होना चाहिए। मधुक्खियों के पालने का लेखा-जोखा भी दिया जा रहा है जिसमें बताया गया है कि शहद में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन एवं खनिज लवण हैं व इसका सेवन हर रोज करना चाहिए।