अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
सीएमओ की नियुक्ति के बाद भी जिला मुख्यालय सिविल अस्पताल व तीनों सीएचसी केंद्र की स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर ही हैं। इस समय यहां व्यवस्थाएं बनाने के लिए न तो प्रदेश सरकार बजट जारी कर रही है और न ही मेडिकल स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए कोई ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। दूसरी ओर शहर के साथ-साथ जिले के 172 गांवों के लोगों को सरकार के दावों के मुताबिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। यह हाल तो तब है जब जिला प्रशासन की तरफ से जिला उपायुक्त अजय सिंह तोमर निजी तौर पर प्रिंसिपल सेक्रेटरी और मुख्यमंत्री को मौजूदा हालातों से अवगत करा चुके हैं। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो उपायुक्त तोमर द्वारा सरकार को अस्पताल की जमीनी हकीकत बताने के बाद ही सीएमओ डा. जितेंद्र कादियान को चरखी दादरी का पहला सीएमओ नियुक्त कर व्यवस्थाएं बनाने के लिए भेजा गया था।
शहीद उद्यम सिंह सिविल अस्पताल का 100 बेड का भवन तो गत कांग्रेस सरकार में ही बनकर लगभग पूरा हो गया था। मौजूदा सरकार ने चार साल के कार्यकाल के दौरान भवन के कुछ बचे निर्माण कार्य को पूरा कराकर इस नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया है। प्रदेश के अन्य जिलों खासकर स्वास्थ्य मंत्री क अनिल विज के गृह जिले अंबाला की तरह यहां न तो पर्याप्त चिकित्सक हैं और न ही बेहतर उपचार के लिए कोई आधुनिक मशीनें। यहां तक की जिला मुख्यालय अस्पताल से मरीज को फ्रेक्चर होने पर भी पीजीआई रोहतक या भिवानी रेफर कर दिया जाता है।
बड़ी दुर्घटनाओं के समय तो सिविल अस्पताल की अव्यवस्थाओं के चलते स्वास्थ्य विभाग ही नहीं बल्कि प्रदेश सरकार की भी खूब किरकरी हुई है। गत छह जून को कार्यभार संभालने वाले डा. जितेंद्र कादियान ने मौजूदा स्टाफ व सुविधाओं की व्यवस्था बनाने के लिए प्रदेश सरकार को बजट के लिए लिखा था। पत्र लिखे काफी दिन बीत चुके हैं लेकिन अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। करीब 10 लाख रुपये के बजट में से सीएमओ खुद भी ओपीडी देखने के लिए कमरे की व्यवस्था करेंगे। इस समय सिविल अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट की कमी सबसे अधिक खल रही है। मरीजों को खून चढ़वाने के लिए निजी अस्पताल में जाकर अपनी जब ढीली करनी पड़ रही है।
सीएमओ की तैनाती के बाद से ही प्रदेश सरकार ने यहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर चिकित्सकों व अन्य मेडिकल स्टाफ सहित चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया है। कमोबख्श ये ही हालात जिले के तीनों सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) के भी बने हुए हैं। सिविल अस्पताल में प्रतिदिन औसतन ओपीडी 300 है। वहीं, आए दिन सड़क हादसों में घायल आए दिन पांच से सात लोग पहुंचते हैं लेकिन थोड़ी सी गंभीर हालत में उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करना पड़ता है। यहीं हालात डिलीवरी केस के भी है। सिविल अस्पताल में गायनोलॉजिस्ट की तैनाती के बाद नॉर्मल डिलीवरी ही कराई जाती है जबकि थोड़ी सी गंभीर हालत होते ही महिला को रेफर कर दिया जाता है।
बौंदकलां सीएचसी में तीन साल से बंद एक्स-रे रूम, एंबुलेंस तक नहीं
बौंदकलां स्थित सीएचसी केंद्र में भी जिला मुख्यालय अस्पताल की तरह ही स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हैं। यहां पिछले तीन सालों से एक्स-रे रूम का ताला तक नहीं खुला है। इसके अलावा यहां न तो पर्याप्त स्टाफ है और न ही एंबुलेंस सुविधा। गत दिनों विधायक राजदीप फौगाट व जिला उपायुक्त अजय सिंह तोमर के औचक निरीक्षण के दौरान यहां की अव्यवस्थाओं की पोल खुल चुकी है।
गोपी सीएचसी चल रहा पंचायत घर व वृद्धाश्रम में
बाढड़ा उपमंडल के गांव गोपी स्थित सीएचसी केंद्र का पुराना भवन कंडम होने से इसे अस्थायी तौर पर पंचायत घर और वृद्धाश्रम में शिफ्ट किया गया है। करीब छह माह बीतने के बाद भी पुरानी बिल्डिंग को तोड़ नई बनाने का काम शुरू तक नहीं हुआ है। फिलहाल यहां एक ही चिकित्सक तैनात है और स्वास्थ्य सेवाएं ना के बराबर है।
वर्जन
व्यवस्थाएं बनाने के लिए बजट की दरकार है और इस संबंध में उच्चाधिकारियों को हमने पत्र लिख रखा है। बजट आते ही यहां चिकित्सा सुविधाओं में भी विस्तार किया जाएगा। स्टाफ व अन्य कमियों के लिए भी हमने डिमांड भेज रखी है और जल्द यह पूरी होने की संभावना है।
- डॉ. जितेंद्र कादियान, सीएमओ, चरखी दादरी।