शौचालय बनवाए नहीं, एक किश्त डकार गए 10 फीसदी पात्र परिवार
चरखी दादरी।
आईएचएच (इनडिपेंडेंट हाउस होल्डर) स्कीम के तहत करीब 41 परिवारों ने अपने घरों में शौचालय नहीं बनवाए हैं और सरकार से मिली पहली किश्त डकार गए हैं। इन्होंने राशि लेने के एक साल बाद तक अपने घरों में शौचालय निर्माण नहीं करवाया है। अब इन परिवारों को नगर परिषद अधिकारियों ने नोटिस भेेज दिए हैं। नोटिस के बावजूद अगर आवेदक ने मामले में ढिलाई बरतता है और सरकार से प्राप्त सहायता राशि का प्रयोग शौचालय निर्माण में नहीं करता तो उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। हालांकि इस कार्रवाई के संबंध में सरकार ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर को खुले में शौचमुक्त करने और हर घर में शौचालय का निर्माण कराने के उद्देश्य से नगर परिषद ने शहर के सभी वार्डों में सर्वे कराया था। इससे पहले शौचालय निर्माण में सहायता राशि लेने के लिए शहर भर से करीब 700 आवेदन नगर परिषद के पास पहुंचे थे। सर्वे के दौरान नगर परिषद ने पात्रों का चयन कर बजट के लिए प्रपोजल तैयार कर सरकार के पास भेजा था। आईएचएच स्कीम के तहत 426 आवेदन पात्र माने गए थे। इसके बाद सरकार की ओर से करीब 30 लाख रुपये की ग्रांट पात्र आवेदकों के घरों में शौचालय निर्माण के लिए भेजी गई थी। नप सूत्रों की मानें तो गत दिनों सरकार ने आईएचएच स्कीम से संबंधित डाटा मांगा था। इसके चलते नगर परिषद अधिकारियों ने सहायता राशि लेने वाले पात्रों के घरों में शौचालय निर्माण की स्थिति का जायजा लेने कर्मचारियों को भेजा था। इस दौरान करीब एक माह में सभी 426 पात्र आवेदकों के घर जाकर रिपोर्ट तैयार कर कर्मचारियों ने उच्चाधिकारियों को सौंपी। इस रिपोर्ट में 41 पात्र परिवार ऐसे मिले जिन्होंने राशि तो ले ली है लेकिन अब तक शौचालय निर्माण नहीं हुआ है। वहीं, नप अधिकारियों की मानें तो एक किश्त को खर्च किए बिना पात्र परिवारों को दूसरी किश्त नहीं जारी की जा सकती।
हाल ही में सरकार के निर्देशों पर नगर परिषद अधिकारियों ने किश्त लेकर भी शौचालय निर्माण शुरू न करने पर एक्शन लेते हुए नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस उनके घर पहुंच चुके हैं और इसके बाद कुछ लोग नप अधिकारियों से भी मिले। नप सूत्रों की मानें तो इन्होंने जल्द ही यह राशि वापिस लौटने का तर्क नप अधिकारियों के सामने रखा है।
बाक्स: सात हजार रुपये की पहली किश्त हुई थी जारी
नप अधिकारियों ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार ने सर्वे करने के बाद नगर परिषद के खाते में पात्र आवेदकों की संख्या के हिसाब से ग्रांट जारी की थी। इसके बाद प्रति आवेदक सात-सात हजार रुपये उनके खाते में डाले गए थे। नप अधिकारियों ने यह राशि आधार नंबर व बैंक अकाउंट लेकर इन्हें दी गई थी ताकि अगर कोई सरकारी सहायता राशि का दुरुपयोग करें तो उसके खिलाफ सरकार के निर्देशानुसार आगामी कार्रवाई अमल में लाई जा सके।
वर्जन::
करीब दस फीसदी ऐसे परिवार हैं जिन्होंने आईएचएच स्कीम के तहत सहायता राशि की पहली किश्त लेने के बाद भी घर में शौचालय निर्माण शुरू नहीं कराया। इनकी छंटनी कर हमने नोटिस भेजे हैं। इसके बाद कुछ ने कार्यालय पहुंचकर सात हजार की राशि वापसी देने की बात कही है। सरकार के जो निर्देश होंगे उसी अनुरुप आगामी कार्रवाई अमल में लाएंगे।
संजय यादव, सचिव नगर परिषद