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2650 फैक्ट्रियों में नहीं है आग से बचाव के उपाय

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अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़।
पिछले दिनों पानीपत की कंबल फैक्टरी में लगी आग में 7 श्रमिकों की मौत वाकई चिंतित और सोचने पर मजबूर करती है। आमतौर पर फैक्ट्रियों में आग के हादसे शॉर्ट-सर्किट से होते हैं। बहादुरगढ़ क्षेत्र की बात की जाए तो यहां पर भी औद्योगिक इकाईयों की संख्या कम नहीं है। करीब 3 हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। खास बात यह है कि केवल 10 प्रतिशत फैक्ट्री मालिकों ने फायर ब्रिगेड से एनओसी ले रखी है। 90 प्रतिशत फैक्ट्रियां कानून की धज्जियां उड़ाते हुए चलाई जा रही हैं। इनके खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हो रही। फैक्टरियों में आग से निपटने के कोई प्रबंध नहीं हैं।
कहां-कहां चलती हैं औद्योगिक इकाइयां
बहादुरगढ़ में सबसे पुराना औद्योगिक क्षेत्र रोहतक रोड पर सेक्टर-6 के सामने है। इसके अलावा एमआइई-1, एमआइई-2, एचएसआईआईडीसी सेक्टर-16 व 17 फुटवियर पार्क, रोहद इंडस्ट्रियल एरिया, झज्जर रोड पर बाईपास के नजदीक कई फैक्ट्रियां चलती हैं। इनमें आग लगने के बाद काबू करने के कोई इंतजाम नहीं हैं। फैक्टरी मालिक श्रमिकों की जान से लगातार खिलवाड़ कर रहे हैं। कमोवेश हर जगह आग से बचाव के उपाय बेहद लचर हालत में है।
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आग लगने के बाद भाग जाते हैं कर्मचारी
फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों के मुताबिक किसी फैक्टरी में आग लगती है तो वहां के कर्मचारी सबसे पहले भाग जाते हैं। इससे उन्हें परेशानी होती है। फैक्टरी में प्रवेश करने से लेकर बाहर निकलने का रास्ता भी उन्हें नहीं मिल पाता। यहां तक की फैक्ट्रियों की सीढ़ियों में भी अनाधिकृत सामान रख दिया जाता है। जहां तक फैक्टरी मालिक को अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की बात है तो वे इस तरह कोई ध्यान ही नहीं देते।
प्रशासन और अन्य विभाग हो गए हैं दिखावटी
सवाल उठता है कि क्या प्रशासन, पुलिस और अन्य विभाग दिखावटी हो गए हैं? आखिर क्यों पूर्व के हादसों से कोई सबक नहीं लिया जा रहा? क्यों आग या किसी अन्य वजहों के चलते होने वाले हादसों से बचाव के उपाय समय-समय पर फैक्टरी में काम करने वाले मजदूरों और कर्मचारियों को नहीं बताएं जाते? सरकार व प्रशासन को जाग जाना चाहिए और फैक्ट्रियों में आग लगने के हादसे न हों, इसके लिए कोई नीति बनानी चाहिए। संबंधित हरियाणा सरकार का लाइसेंसिंग विभाग क्यों मौन है। अगर बहादुरगढ़ में श्रमिकों के जीवन की रक्षा नहीं की जा सकती तो फिर इन विभागों का फायदा ही क्या?
ये हुई घटनाएं
मई 2015 को एमआइई स्थित कंपनी में लकड़ी के बुरादे में आग लगने से दो श्रमिक जिन्दा जल गए थे। जुलाई 2015 को एमआइई में स्थित रिक्शा बनाने वाली कंपनी में आग लगने से 4 लोग झुलस गए थे, जिसमें से एक की मौत हो गई थी। मई 2016 को एमआईई स्थित जूता फैक्ट्री में भीषण आग लग गई थी। हादसे में दो लोग जिंदा जलकर मर गए थे।
फायर विभाग को भी नहीं पता शहर में कितनी फैक्ट्रियां
खास बात यह है कि बहादुरगढ़ में कितनी फैक्ट्रियां चल रही हैं। इस बारे में फायर विभाग के अधिकारियों को भी पता नहीं है। यह स्थिति तो तब है जब फायर विभाग कंपनियों और फैक्ट्रियों को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी करता है। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक क्षेत्र में ऐसी बहुत फैक्ट्रियां हैं जिन्होंने फायर विभाग से एनओसी नहीं ली है। यहां यह सवाल उठता है कि अगर कोई ऐसी फैक्टरी है तो विभाग उसे नोटिस क्यों नहीं देता।
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क्या कहते हैं अधिकारी
फायर ब्रिगेड के आफिसर टीआर पालीवाल ने कहा कि हेड ऑफिस से यह निर्देश हैं कि अधिकारी किसी फैक्टरी में जाकर निरीक्षण नहीं कर सकते। इसके लिए पहले पंचकूला कार्यालय से अनुमति लेनी होती है। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाती है।
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