फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निजी अस्पताल में रही हड़ताल, फिर भी सामान्य अस्पताल पहुंचे 100 मरीज अधिक

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

झज्जर।
एमसीआई को एनएमसी में बदलने पर आईएमए एसोसिएशन से जुड़े निजी अस्पताल के डॉक्टर मंगलवार को हड़ताल पर रहे। हड़ताल के दौरान निजी अस्पतालों में केवल इमरजेंसी वाले मरीजों की जांच की गई। खास बात यह रही कि हड़ताल से सामान्य अस्पताल की ओपीडी पर कुछ खास फर्क नहीं पडा़। सामान्य अस्पताल से मिले आंकड़ों के अनुसार दो जनवरी को हड़ताल के बावजूद 612 मरीजों ने चेकअप करवाया तो एक जनवरी को 504 मरीजों की ओपीडी हुई। इससे साफ दिख रहा है कि जिले में हड़ताल का खास असर सामने नहीं आया।
आईएमए को ये है ऐतराज
आईएमए की ओर से दावा किया जा रहा है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को अब सरकार के द्वारा नेशनल मेडिकल कमीशन बनाया जा रहा है। कमीशन के सदस्य सरकार द्वारा निर्धारित किए जाएंगे, जिसमें केवल 5 राज्यों से ही प्रतिनिधि कमीशन में चुने जाएंगे। इसके चलते बाकी 24 राज्यों बिना प्रतिनिधित्व के रह जाएंगे। वहीं, कमीशन द्वारा तय किया गया है कि दूसरे देशों से एमबीबीएस की पढ़ाई करके आने वालों से कोई टेस्ट नहीं लिया जाएगा, जबकि अपने ही देश में डिग्री करने वालों को पंजीयन व प्रेक्टिस के समय दो बार परीक्षा देनी होगी।
विज्ञापन


आईएमए प्रधान डॉ. राकेश गर्ग से सीधी बात
सवाल: निजी अस्पतालों की मनमानी क्या सही है?
जवाब: नहीं बिल्कुल गलत है, लेकिन बिल मनमानी रोकने के लिए नहीं बल्कि छोटे अस्पतालों को खत्म कर कॉरपोरेट सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए लाया जा रहा है।
सवाल: हड़ताल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
जवाब: हड़ताल का उद्देश्य एनएमसी को रद्द करवाना है क्योंकि इससे गैर वैज्ञानिक पद्घति को आयुष का नाम देकर अलग पंजीयन होगा और ये स्पेशलिस्ट के तौर पर हर प्रकार के मरीजों का इलाज करेंगे, जोकि गलत है।
विज्ञापन

सवाल: इससे मरीजों का क्या नुकसान होगा?
जवाब: कमीशन के द्वारा सेल्फ फाइनेंस मेडिकल कॉलेज में 40 प्रतिशत सीटों की फीस सरकार व 60 प्रतिशत की फीस संस्थान खुद तय करेगा। इसके चलते चिकित्सा शिक्षा महंगी होगी और यहां से निकले चिकित्सक किस प्रकार का इलाज करेंगे, इसे अच्छी तरह से देखा जा सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें