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एसीएम यूनिट गठित, सरकारी विभागों की जमीनों को जुटाएगी डाटा

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अमर उजाला ब्यूरो
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चरखी दादरी। विभिन्न विभागों की जमीन का ब्योरा जुटाने के लिए उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने एसीएम (असेस्ट सेल मैनेजमेंट) यूनिट का गठन कर दिया है। सात सदस्यीय यह टीम डीआरओ राजकुमार अरोड़ा की अगुवाई में काम करेगी। यह यूनिट सभी विभागों की जमीन का डाटा जुटाकर इसकी रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त को सौंपेगी। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो इस टीम ने धरातल पर काम शुरू कर दिया है। जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त की मार्फत विभागों के हेड ऑफिस और सरकार के पास भेजी जाएगी। इसके बाद ही इन जमीनों को उपयोग में लाने का खाका तैयार किया जा सकेगा।
इस समय जिला मुख्यालय पर 45 प्रतिशत सरकारी विभागों के दफ्तर ही शुरू हो पाए हैं। जानकारों की मानें तो जिला मुख्यालय पर करीब 68 विभागों के दफ्तर होते हैं। जिले में इस समय 29 विभागों के कार्यालय ही शुरू हो पाए हैं। इनमें भी ज्यादातर पोस्ट खाली पड़ी हैं। इसके चलते रुटीन के साथ-साथ विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। इस समय अफसरों की तैनाती के साथ ही संबंधित विभागों के कार्यालयों में पूरे स्टाफ की नियुक्ति की प्रक्रिया की दरकार है, ताकि जिले के विकास को पंख लग सके। जिले के मुताबिक सुविधाएं शुरू न हो पाने के बिंदुओं पर गौर कर प्रदेश के मुखिया मनोहर लाल ने चार नवंबर को जिला सचिवालय निर्माण के लिए जगह भी फाइनल कर दी है। सचिवालय की बिल्डिंग हुडा सेक्टर में बनाई जानी प्रस्तावित है। हालांकि इस पर कागजी कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो इस घोषणा का नंबर अभी सीएम ऑफिस से जिला प्रशासन के पास नहीं पहुंचा है।
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बावजूद इसके लघु सचिवालय की जगह का चयन होने के बाद जिला प्रशासन ने अपनी प्लानिंग शुरू कर दी है। विकासपरक इस प्रोजेक्ट के अलावा भी जिले के बाढड़ा उपमंडल सहित, बौंदकलां व झोझूकलां ब्लॉक में भी सुविधाओं का दायरा बढ़ाने की दरकार है। इस स्थिति को देखकर जिला प्रशासन ने सभी सरकारी विभागों की जमीनों का ब्योरा जुटाने का खाका तैयार कर लिया है। इस काम के लिए उपायुक्त ने सात सदस्यीय यूनिट का गठन किया है। इसमें एक रिटायर्ड तहसीलदार, एक कानूनगो सहित पटवारियों और कंप्यूटर ऑपरेटर को शामिल किया है। यह टीम सभी विभागों की जमीनों का न केवल रिकॉर्ड जुटाएगी बल्कि इनका जायजा लेगी और मौजूदा हालातों पर रिपोर्ट तैयार करेगी। यह प्रक्रिया पूरी कर कंपाइल रिपोर्ट डीसी अजय सिंह तोमर को सौंपी जाएगी और इसके बाद ही इन जमीनों के आगामी उपयोग को लेकर प्लान तैयार की जाएगी। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो दिसंबर या जनवरी माह में यह प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।

शहर में नप की पड़ी जमीन, नहीं हो पाई पैमाइश
नगर परिषद के सूत्रों के अनुसार शहर में नगर परिषद की अलग-अलग जगहों पर करीब 25 एकड़ से अधिक जमीन पड़ी है। इसमें से कुछ की पैमाइश हो चुकी है जबकि कुछ का खसरा नंबर सहित अन्य जानकारियां तो हैं लेकिन पैमाइश नहीं हो पाई है। इस कारण इन जमीनों का कब्जा नहीं लिया जा सकता। सिविल अस्पताल के समीप अंदाजन आधा एकड़, नील फैक्टरी के समीप एक कनाल से अधिक, खराब नंबर 255 में एक एकड़ जमीन की फिलहाल पैमाइश नहीं हो पाई है। वहीं, जिन जमीनों की पैमाइश हो चुकी है, उन पर नगर परिषद ने सुविधाएं बढ़ाने की प्लानिंग तैयार कर ली है। इसके तहत जमीनें दमकल और जन स्वास्थ्य विभाग को दिया जाना भी प्रस्तावित है।

जमीनों के कोर्ट केसों की पैरवी भी करेगी यूनिट
प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो उपायुक्त ने एसीएम यूनिट को न केवल जमीनों का ब्योरा जुटाने और मौका देखकर रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है बल्कि सरकारी विभागों की जमीनों से संबंधित कोर्ट केसों की पैरवी भी यूनिट ही करेगी। अकेले नगर परिषद की करीब 12 जमीनों का कोर्ट केस चल रहा है। सूत्रों की मानें तो सभी विभागों की अगर बात करें तो 100 से अधिक कोर्ट केस होने के अनुमान हैं। टीम न केवल सरकारी विभागों की जमीनों का पता लगाएगी बल्कि इन जमीनों पर जिन लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है, उनकी सूची भी तैयार की जाएगी। इसके बाद जमीन से संबंधित रिकॉर्ड और कब्जाधारियों की सूची आगामी कार्रवाई के लिए उपायुक्त को सौंपी जाएगी। इसके बाद ही नोटिस या अन्य प्रक्रिया अमल में लाने का खाका तैयार किया जाएगा।
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कोट
जिले के सरकारी विभागों का ब्योरा जुटाने के लिए अस्सेट सेल मैनेजमेंट यूनिट गठित कर दी गई है। इसमें रिटायर्ड तहसीलदार, पटवारी व कानूनगो को शामिल किया गया है। यूनिट डीआरओ के अधीन काम करेगी। - अजय सिंह तोमर, डीसी
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