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ट्रांसपोर्टर हड़ताल पर गए तो नहीं हुआ सरसों का उठान, खरीद के लिए शाम तक इंतजार करते रहे किसान

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अमर उजाला ब्यूरो
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झज्जर।
सरसों के उठाने में हुई देरी ने शनिवार को सेक्टर-9 की अस्थायी मंडी में किसानों को परेशानी में डाल दिया। शुक्रवार को खरीद की गई 2700 क्विंटल सरसों की लिफ्टिंग शनिवार को सुबह तक नहीं हुई। ट्रांसपोर्टर के हड़ताल पर चले जाने के कारण ऐसा हुआ है। ट्रांसपोर्टर की हड़ताल पर जाने के पीछे वजह यह है कि मंडी के कांटे व गोदाम के कांटे पर वजन कराने के दौरान गाड़ी के वजन में करीब सवा क्विंटल का फर्क आ रहा है। इसकी मार ट्रांसपोर्टर पर पड़ रही है। इसके चलते ट्रांसपोर्टर ने शुक्रवार और शनिवार को सरसों का उठान नहीं किया।
वहीं, शनिवार को रिजर्व-डे होने के चलते किसी भी गांव का शेड्यूल तय नहीं था। जिसके चलते सरसों से लदी करीब 400 ट्रैक्टर-ट्रॉली अस्थायी मंडी में पहुंच गई तो मंडी में जगह कम पड़ गई। सेक्टर-9 की सड़कों पर जगह की कमी के चलते वहां पर ट्रॉलियों की लाइन लग गई। इसके चलते पूर्व में खरीद की गई सरसों की ढेरियों तक बैग पहुंचाने का रास्ता भी बंद हो गया। इस परेशानी के चलते हैफेड अधिकारियों ने किसानों को कागज देकर उनकी ट्रॉलियों के आस-पास ही खरीद करवाने का प्रयास किया। जिसके चलते शनिवार देर शाम तक खरीद हो पाई। वहीं, शेड्यूल वाले दिनों में सरसों की खरीद सुबह 10 बजे तक ही अधिकारी निपटा देते थे।
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बारदाने की भी रही कमी
सरसों खरीद के लिए हैफेड के द्वारा मंगवाया गया बारदाना सुबह 8 बजे ही खत्म हो गया। जिसके बाद बारदाना लाने के लिए हैफेड के कर्मचारियों ने अधिकारियों को बताया। करीब 12 बजे मंडी में बारदाना पहुंचा, इसके बाद ही खरीद की गई सरसों के बैग भराई का कार्य शुरू हो सका। इस दौरान किसान मंडी में कभी हैंडलिंग एजेंट तो कभी हैफेड के द्वारा लगाए टेंट में जानकारी लेने के लिए भटकते रहे।

बोले किसान
1. खेड़ी आसरा गांव निवासी पवन ने बताया कि वह सरसों की ट्रॉली लेकर सुबह पांच बजे मंडी में आया था। लेकिन दोपहर बाद तक खरीद में उसका नंबर नहीं आया। अभी तक तय ही नहीं हो पा रहा कि आज किसानों की सरसों कब तक खरीदी जाएगी।
2. भदानी निवासी संदीप ने बताया कि वह सरसों की ट्रॉली लेकर मंडी में सुबह 6 बजे आया था। खरीद के लिए यहां पर कोई सिस्टम ही नहीं बनाया गया। ट्रॉलियां अधिक संख्या में आने के कारण यहां जाम के हालात बन गए हैं।
3. कबलाना निवासी अमित ने कहा कि हैफेड को बारदाना तो पूरी संख्या में रखना चाहिए था। हैफेड को भी अनुमान नहीं था कि शनिवार को एक साथ इतने किसान मंडी में पहुंच जाएंगे।
4. भदानी निवासी अजय ने कहा कि अलसुबह ही सरसों लेकर मंडी पहुंच गया था। बारदाने की वजह से खरीद रुकी हुई है। ऐसी जगह मंडी बनाई है, जहां पर कोई सुविधा भी नहीं है। सरकार को किसानों की परेेशानी के बारे में सोचना चाहिए।
वर्जन
हैफेड के द्वारा गाड़ी लोड होने के पश्चात जिस कांटे पर तोल करवाया जाता है, उससे गोदाम के कांटे पर पहुंचते ही करीब सवा क्विंटल सरसों कम हो जाती है। इतना घाटा उनके साथी पूरा नहीं कर सकते। ऐसे में हमने दूसरे कांटे पर वजन करवाने की मांग कर हड़ताल की है। रविवार से ट्रांसपोर्ट यूनियन का कोई भी सदस्य सरसों की ढुलाई नहीं करेगा।
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महेंद्रपाल, प्रधान, ट्रांसपोर्ट यूनियन

वर्जन
शेडयूल के अनुसार खरीद सही चल रही थी। रिजर्व डे पर अधिक संख्या में किसान पहुंचने के कारण थोड़ी गड़बड़ी हुई है। रविवार को दूसरी गाड़ियों से लिफ्टिंग करवा दी जाएगी। आवक इतनी ज्यादा थी कि शनिवार को रिजर्व-डे में भी 4600 क्विंटल सरसों खरीदी गई। किसानों को समस्या नहीं आने दी जाएगी।
- सुरेंद्र चौधरी, डीएम, हैफेड।
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