बहादुरगढ़। गर्मी के मौसम में क्षेत्र में हर साल सैकड़ों घर और औद्योगिक इकाईयां आग की भेंट चढ़ जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में खेतों में रखी व कटने को तैयार फसल भी कई बार आग की चपेट में आ जाती हैं। संसाधनों की कमी झेल रहे अग्निशमन विभाग को अब आग बुझाने के लिए पानी के भी लाले पड़ रहे है क्योंकि यहां पर लगा सबमर्सिबल और फायर हाइडेंट सिस्टम दो वर्षों से खराब पड़ा है। मई और जून में हर वर्ष आग लगने से लाखों की संपत्ति और जान माल का नुकसान होता है। आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड के पास सिर्फ 9 गाड़ियां और दो बाइक हैं। चार गाड़ी और दो बाइक एमआईई फायर स्टेशन के पास है। दो छोटी और दो बड़ी गाड़ी इंदिरा मार्केट में स्थित फायर ब्रिगेड के पास है तो एक गाड़ी एचएसआईआईडीसी में रहती है। अग्निशमन विभाग कर्मचारियों की भी कमी झेल रहा है। दूर दराज के देहात क्षेत्रों में तो फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आग बुझने के बाद ही पहुंच पाती है।
बहादुरगढ़ के एमआईई पार्ट-ए स्थित फायर ब्रिगेड के कार्यालय में पिछले दो साल से पानी की सप्लाई करने वाला उपकरण (सबमर्सिबल फायर हाईडेंट सिस्टम) खराब हैं। कई अधिकारी आए और गए, किसी ने भी इसकी सुध लेने की जहमत नहीं उठाई। समस्या केवल यही नहीं बल्कि कर्मचारी बूट, हेलमेट, वर्दी जैसी सुविधाओं की कमी भी झेल रहे हैं। न तो सरकार और न ही प्रशासनिक अधिकारी इस तरफ कोई ध्यान देते हैं।
बहादुरगढ़ में हैं साढ़े तीन हजार औद्योगिक इकाईयां
शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में कुल साढ़े तीन हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयां हैं। जबकि हाईराइज बिल्डिंग, व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी काफी संख्या में बन रहे हैं। गर्मी के मौसम में इन फैैक्ट्रियों में आगजनी की घटनाएं होती रहती हैं। अनेकों फैक्ट्रियों में फायर फाइटिंग सिस्टम की सुविधा भी नहीं मिलती। ऐसे में दमकल केंद्र के दस्ते को ही मौके पर पहुंचकर आग बुझानी पड़ती है। मगर जब पानी की सुविधा ही नहीं होगी तो आग पर काबू कैसे पाया जाएगा। एमआईई दमकल केंद्र विभाग में दो लाख लीटर वाला पानी का टैंक तो करीब आठ साल पहले बना दिया गया था। उसके बाद फायर हाईडेंट सिस्टम भी लगाया गया। फिलहाल यह खराब हालत में है। उससे पानी नहीं निकल रहा।
दमकल केंद्र में सबमर्सिबल खराब होने की सूचना नगर परिषद के अधिकारियों को कई बार दी गई है। दो लाख लीटर पानी का टैंक भी एमआईई पार्ट-ए दमकल केंद्र में बना हुआ है, लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं है तो उसे कैसे भरा जाए। आपातकालीन की स्थिति से निपटने में उन्हें कई तरह की परेशानी आती है। यदि जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से पानी की लाइन का कनेक्शन यहां कर दिया जाए तो टैंक भरा जा सकता है और आग लगने के दौरान हर स्थिति से आसानी से निपटा जा सकता है।
टीआर पालीवाल, फायर अधिकारी, बहादुरगढ़।