बहादुरगढ़। गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी विजय दशमी पर मुकुटधारी हनुमान रामजी की सेना की शोभा बढ़ाएंगे। मुकुट धारण करने वाले हनुमान भक्तों का ब्रह्चर्य व्रत अंतिम चरण में हैं। वीरवार को इन भक्तों ने मुकुटों की पूजा-अर्चना कर इन्हें धारण करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
सनातन धर्म महावीर मंदिर परोपकारी सभा की ओर से वर्ष 1947 के बाद से बहादुरगढ़ में दशहरा पर्व मनाया जाता है। इस महोत्सव का विशेष आकर्षण मुुकुटधारी हनुमान होते हैं। इस परंपरा की शुरूआत पाकिस्तान के मुलतान प्रांत से हुई थी। विभाजन के बाद पानीपत से यह परंपरा आगे बढ़ी। पानीपत के बाद बेरी फिर बहादुरगढ़ और अब तो राज्य के कई क्षेत्रों में निभाई जा रही है। बहादुरगढ़ में वर्ष 1983 से यह परपंरा निभाई जा रही है। इस बार 4 मुकुटधारी हनुमान होंगे। इन हनुमान मुकुटों को धारण करने के लिए बहादुरगढ़ निवासी हन्नी कपूर, शेखर शर्मा, दीपक प्रजापत व धीरज बतरा कठोर तपस्या कर रहे हैं। निशु और विक्की परूथी इनकी सहयोगी की भूमिका में हैं।
वीरवार को दशहरे से एक दिन पहले इन चारों भक्तों ने मुकुटों की पूजा की। सभा से जुड़े अशोक दुआ ने बताया कि मुकुट पानीपत से लाए जाते हैं। बहादुरगढ़ में जो मुकुट हैं, उनकी ऊंचाई पांच से साढ़े 5 फुट तक की है। इनका वजन भी 15 किलोग्राम के आसपास है। शुरूआत एक हनुमान से हुई थी अब चार हनुमान होते हैं। एक मुकुटधारी हनुमान को तैयार करने में सवा घंटा तक लग जाता है।
मुकुटधारी हनुमान बनने के लिए इच्छुक श्रद्धालु को एक साल पहले यानि बीतने वाले दशहरे की शाम को ही अपने नाम लिखवाने पड़ते हैं। कुल 25 से 30 तक नाम सामने आते हैं। इन नामों को पर्चियों पर लिखकर हनुमानजी की प्रतिमा के चरणों में डाल दिया जाता है। इसके बाद चार पर्चियों को उठाया जाता है। पर्चियों पर जिनके मिलते हैं, उन लोगों को तैयारी के लिए कहा जाता है। इन्हें स्वच्छ आचरण बनाना पड़ता है और दशहरे से 21 दिन पहले ब्रह्चार्य व्रत का पालन शुरू करना पड़ता है। इन्हें एक समय बिना नमक का भोजना खाना होता है। जमीन पर सोना और नियमों की पूरी पालना करनी होती है। सुंदर कांड में बराबर हाजिरी और दोनों मुकुटों की पूजा करनी पड़ती है। विजय दशमी के दिन मुकुट को धारण करना पड़ता है।.
55 फुट का होगा रावण
समिति की ओर से दशहरे की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मेला ग्राउंड परिसर में रावण के पुतले का दहन होगा। इस बार पुतले की ऊंचाई 55 फुट रहेगी। रावण दहन से पूर्व नगर में रामजी की शोभा यात्रा निकाली जाएगी। इसमें राम परिवार, हनुमान सहित देवों एवं रावण सहित कई राक्षसों की झांकियां आकर्षण का केंद्र होंगी।