अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
निर्धारित अवधि से एक साल से भी अधिक विलंब होने के बावजूद मुंडका-बहादुरगढ़ मेट्रो परियोजना के रास्ते में आ रही अड़चनें दूर नहीं हो रही। परियोजना केे लिए जरूरी थोड़ी सी जमीन समय पर न मिलने की वजह से हजारों करोड़ रुपये की ये महत्वाकांक्षी परियोजना अधर में लटकी पड़ी है। सेक्टर-9 बाइपास मोड़ के निकट कुछ दुकानों व दूसरे प्रतिष्ठानों के अगले हिस्से की इस जमीन को लेकर जमीन मालिकों और हुडा प्रशासक के बीच हुई मीटिंग में भी अंतिम निर्णय नहीं हो पाया। दुकानदार कम से कम कलेक्टर रेट पर मुआवजा लेने के लिए अड़े रहे।
कलेक्टर रेट पर सौदा होना संभव
हाई कोर्ट द्वारा दुकानदारों की करीब 4200 गज जमीन का अधिग्रहण रद्द करने के बाद हुडा ने इस जमीन को नए सिरे से लेने की कवायद शुरू की है। कोर्ट के आदेश पर वीरवार को हुडा प्रशासक बीएस हुड्डा ने स्थानीय हुडा आफिस में जमीन मालिकों के साथ बैठक की। जनहित का काम बताते हुए उन्होंने दुकानदारों को कम से कम मुआवजे में जमीन देने के लिए राजी करने का प्रयास किया। दुकानदारों ने पहले तो बाजार भाव पर डेढ़-दो लाख रुपये प्रति वर्ग गज मुआवजा देने की मांग की। लेकिन काफी देर तक बातचीत के बाद अंतत: अधिकतर दुकानदार कलेक्टर रेट पर जमीन देने के लिए तैयार नजर आए। हालांकि कुछेक दुकानदार मार्केट रेट पर मुआवजे के लिए अड़े रहे। हालांकि अब हुडा ने जरूरत के मुताबिक शनिवार को जमीन की पैमाइश दुबारा कराने का फैसला लिया है।
1.32 लाख प्रति गज बनता है रेट
वीरवार को हुई बैठक में अधिकतर दुकानदार कलेक्टर रेट पर सरकार को मेट्रो परियोजना के लिए जमीन देने के लिए तैयार दिख रहे थे। इस खसरे में कमर्शियल जमीन के कलेक्टर रेट 53 हजार रुपये प्रति गज हैं। अधिग्रहण होता है तो जमीन मालिकों को इसका 100 फीसद उजाड़ा मिलेगा। श्यामलाल बंसल ने बताया कि जमीन का कलेक्टर रेट ब्याज और नो लिटिगेशन चार्ज मिलाकर 1.32 लाख रुपये प्रति वर्ग गज बनता है।
ये है मामला
करीब तीन साल पहले डीएमआरसी ने हुडा के जरिए यह 4200 वर्ग गज जमीन ली थी। तब जमीन का मुआवजा बहुत कम दिया गया था। लेकिन अब डीएमआरसी ने इससे करीब आधी जमीन में ही काम चलाने की योजना बनाई है, जिससे सरकार का काफी पैसा बचेगा। मेट्रो परियोजना के लिए दिल्ली-रोहतक रोड पर बाइपास मोड़ से कुछ आगे तक सड़क किनारे लगती करीब 4200 वर्ग गज जमीन की जरूरत है। यह जमीन 14 दुकानों व दूसरे प्रतिष्ठानों के अगले हिस्से की है। गत 30 दिसंबर 2104 को सेक्शन-4 के नोटिस से प्रक्रिया शुरू कर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने इस जमीन को एक्वायर कर लिया था। तब हुडा ने जमीन मालिकों को खेत की जमीन की दरों पर जमीन काम अवार्ड घोषित किया। जो लगभग 16000 रुपये प्रति एकड़ बनता था। दुकानदारों ने इसको बहुत कम बताया और मार्केट रेट देने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में गुहार लगाई। अदालत ने दुकानदारों की मांग पर निर्माण कार्य पर स्थगनादेश जारी कर दिए। मुकदमा चला और अंतत: कोर्ट ने 27 सितंबर 2017 को अधिग्रहण रद्द कर दिया और मेट्रो परियोजना के बड़े महत्व को देखते हुए हुडा को छह महीने में दुकानदारों से मामला सुलझा लेने के आदेश दिए थे।
मीटिंग में ये थे शामिल
हुडा प्रशासक से बात करने वाले जमीन मालिकों में एडवोकेट आरबी यादव, श्यामलाल बंसल, बलजीत नांदल व सीए अनिल अग्रवाल समेत सभी आवेदक, हुडा के संपदा अधिकारी विकास ढांढा और डीएमआरसी के चीफ प्रोजेक्ट आफिसर एएस बिष्ट प्रमुख रूप से मौजूद थे। संपदा अधिकारी ढांढा ने बताया कि प्रशासक हुड्डा की अध्यक्षता में हुई मीटिंग का निष्कर्ष उच्च अधिकारियों को भेजा रहा है। उच्च अधिकारियों के निर्देश अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रयासों में है देरी
उधर, सामाजिक कार्यकर्ता राहुल मंडोरा ने सरकार पर मेट्रो परिजोजना के लिए जमीन उपलब्ध कराने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दुकानदारों को आरंभ में ही उचित मुआवजा दिया जाता तो परियोजना के काम में बाधा नहीं आती। इतना ही नहीं, 27 सितंबर को अधिग्रहण रद्द करके जब हाई कोर्ट ने राज्य को छह महीने में दुकानदारों के साथ मामला सेटल करने के आदेश दिए थे तो हुडा अधिकारियों ने दुकानदारों के साथ पहली ही मीटिंग करने में करीब दो महीने की देरी क्यों की।
मेट्रो परियोजना एक नजर में
रूट की कुल लंबाई 11.182 किमी
कुल मेट्रो स्टेशन 07 स्टेशन
सिविल वर्क निपटा 90 फीसद
शुरू करने का लक्ष्य जून 2018
- हाई कोर्ट के फैसले को लागू करने पर अड़े दुकानदार
- वीरवार की मीटिंग में भी दरों पर नहीं बनी बात
- कलेक्टर रेट से कम लेने को तैयार नहीं हैं दुकानदार
- थोड़ी सी जमीन न मिलने की वजह से अटका है मेट्रो का काम