अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
बाजरा खरीद के लिए पिछले 20 दिन से बाट जोह रहे किसानों की आफत कम होने का नाम नहीं ले रही। पहले किसानों को 25 सितंबर से खरीद होने का आश्वासन दिया गया, फिर एक अक्तूबर और अब तीन अक्तूबर से सरकारी खरीद होने की बात कही जा रही है। लेकिन उससे भी बड़ी आफत किसानों के सामने यह है कि झज्जर मंडी में हैफेड द्वारा केवल चार हजार क्विंटल बाजरे की खरीद की जाएगी। जबकि हकीकत यह है कि खरीद शुरू होने से पहले ही मंडी में करीब 12 हजार क्विंटल बाजरे की आवक हो चुकी है। वहीं, आढ़तियों द्वारा अगले दो दिन में 75 हजार क्विंटल आवक की उम्मीद जताई जा रही है। यदि आढ़तियों की उम्मीद के अनुसार अनाज मंडी में बाजरे की आवक होती है तो मंडी में करीब 90 हजार क्विंटल तक आवक हो सकती है। सरकारी खरीद की आस लेकर मंडी पहुंचे किसान ठगा सा महसूस कर रहे हैं। वहीं, सरकारी खरीद कम होने के चलते किसानों को भी अपना बाजरा औने-पौने दामों में व्यापारियों को बेचना पड़ेगा। जिसके चलते किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।
ये बोले किसान
1. तलाव गांव निवासी किसान ईश्वर का कहना है कि 20 सितंबर को उसने मंडी में लाकर बाजरा डाल दिया था। हर रोज रात को सुअर करीब दो क्विंटल बाजरे को चपत लगा रहे हैं। नई शर्तों ने भी उसे परेशान कर दिया है।
2. छारा गांव निवासी भगत ने बताया कि हैफेड बाजरा खरीद के लिए फर्द और गिरदावरी रिपोर्ट मांग कर रही है। पटवारी किसानों को मिल नहीं रहे, ऐसे हालात में उनके बाजरे की खरीद कैसे हो पाएगी।
3. छारा गांव निवासी किसान सोनू ने बताया कि पटवारी उन्हें कहते हैं कि वे मौके पर आएंगे, इसके बाद रिपोर्ट बनाकर देंगे। हर पटवारी के पास दो से तीन गांवों का चार्ज है, ऐसे में उन्हें रिपोर्ट बनाने में ही एक महीना लग जाएगा। जिसके चलते उनका बाजरा मंडी में ही पड़ा रहेगा।
ये बोले आढ़ती
1. आढ़ती चांद पहलवान का कहना है कि चार हजार क्विंटल बाजरा खरीदने की जो बात कही जा रही है, वो सरासर नाजायज है। मंडी में आवक काफी हो चुकी है और अगर ऐसा किया गया तो विवाद हो सकता है।
2. आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान नरेंद्र धनखड़ ने बताया कि व्यापारियों के साथ सीएम का इस बात पर समझौता हुआ था कि पैसा आढ़तियों के खाते में आएगा। लेकिन अब किसानों के खाते में पैसा डाले जाने की बात कही जा रही है। इस बारे में खरीद शुरू होने से पहले अधिकारियों से बात की जाएगी।
- मंगलवार को यूं चलेगी खरीद प्रक्रिया
किसानों को अपने खेत की फर्द और गिरदावरी रिपोर्ट अधिकारियों के पास जमा करवानी होगी। जिसके बाद अधिकारी किसान को टोकन देंगे। 12 बजे तक अधिकारी किसानों के कागजात जमा करेंगे व उन्हें टोकन वितरित करेंगे। उसके बाद किसान अपनी पसंद के आढ़ती की दुकान पर बाजरा ले जा सकेंगे। जहां पर हैफेड के परचेज अधिकारी पहुंचकर बाजरे की क्वालिटी जांचेंगे और खरीद करेंगे। हैफेड की शर्त के अनुसार प्रति एकड़ के हिसाब से केवल आठ क्विंटल बाजरा खरीदा जाएगा।
वर्जन
प्रदेशभर की 28 मंडियों में दस हजार मीट्रिक टन बाजरे की खरीद होनी है, जिससे 400 मीट्रिक टन झज्जर में होगी। उनके पास इससे अधिक बाजरे की खरीद करने के आदेश नहीं हैं। किसानों को अपनी फर्द और गिरदावरी रिपोर्ट जमा करवानी होगी। इसके बाद ही खरीद प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- सुरेंद्र चौधरी, डीएम, हैफेड।
- खरीद की शर्तों ने भी बढ़ाई किसानों की टेंशन