झज्जर। सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली के तहत दिया जाने वाला करीब 30 हजार क्विंटल गेहूं बेरी की अनाज मंडी में खरीद एजेंसी की लापरवाही के कारण सड़ रहा है। अनाज मंडियों में खरीदे जाने वाले गेहूं को डिपो के माध्यम से गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को दो रुपये किलो के हिसाब से उपलब्ध कराने का नियम बेशक बनाया गया है लेकिन खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी इसका ठीकरा आढ़तियों के सिर फोड़ रहे हैं। दूसरी ओर आढ़ती खरीद एजेंसी के ऊपर समय पर खरीद व उठान न करने का आरोप लगा रहे हैं। आढ़तियों ने यहां तक आरोप लगाए हैं कि विभाग के निरीक्षक व उप निरीक्षक ने रुपये लेकर उठान करवाया है। उनका आरोप है कि खरीद एजेंसी खाद्य आपूर्ति विभाग के निरीक्षक व उप निरीक्षक की लापरवाही के कारण आढ़तियों को करीब दो करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। अभी भी गेहूं के कुछ ढेर खुले आसमान के नीचे पड़े हैं।
अनाज मंडी में करीब 60 हजार कट्टे गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है। शेड के बाहर पड़े गेहूं वाली जमीन के साथ लगे कट्टों के कारण गेहूं खराब हो गया है। इस गेहूं को ही सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली के तहत डिपो पर वितरण के लिए भेजा जाता है। गेहूं भीगने के कारण अनाज मंडी से सड़क तक बदबू आ रही है। इससे राहगीरों को भी परेशानी हो रही है। आढ़तियों ने मामले की जांच के लिए शिकायत प्रदेश के कृषि मंत्री, गृहमंत्री व विजिलेंस को भेजी है।
आढ़ती दलबीर सिंह, महेंद्र सिंह, दीपक, विजय सिंह, वेद प्रकाश और मंडी प्रधान तेजवीर सिंह कादयान का कहना है कि अनाजमंडी में समय पर गेहूं के उठान को लेकर कई बार आढ़ती प्रशासन के अधिकारियों से भी मिले हैं। इसके बाद भी खरीद एजेंसी की तरफ से गेहूं का समय पर उठान नहीं करवाया। नौ मई को मंडी में अंतिम खरीद हुई थी और आज तक गेहूं का उठान नहीं करवाया गया है। गेहूं बारिश से भीगने के कारण सड़ गया है। आढ़तियों का आरोप है कि खरीद एजेंसी खाद्य आपूर्ति विभाग के निरीक्षक व उप निरीक्षक की लापरवाही के कारण आढ़तियों को करीब दो करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। लाहली, कलानौर के गाेदामों व रेल हेड से वापस आए गेहूं का अब मातनहेल में भंडारण किया गया है। आढ़तियों की ओर से भीगे हुए गेहूं को सुखाया जा रहा है।
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आढ़तियों की ओर से भेजे गए कट्टों की गुणवत्ता सही न होने के कारण करीब 70 हजार कट्टे गोदामों व रेल हेड से वापस आ गए थे। उन्हें साफ करवाकर मातनहेल में भंडारण करवाया गया है। आढ़तियों को 83 तिरपाल भी दिए गए थे, लेकिन गेहूं को ढका नहीं गया। जिससे गेहूं खराब हो गया। पैसे लेने के आरोप निराधार हैं। - ईश्वर सिंह, निरीक्षक, खाद्य आपूर्ति विभाग, झज्जर।
- वर्जन
यह गेहूं रिजेक्ट होकर वापस आया हुआ है। इसे साफ करवाकर ज्यादा से ज्यादा तीन दिन में उठवा दिया जाएगा। मंडी नीची होने के कारण जलभराव से इस प्रकार की समस्या आती हैं। पैसे लेकर गेहूं उठवाने के आरोप की शिकायत मेरे पास नहीं आई है। आढ़ती शिकायत देंगे तो उसकी जांच करवाई जाएगी।
- रविंद्र मलिक, एसडीएम, बेरी।