झज्जर। लघु सचिवालय में आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन शनिवार को भी जारी रखा। उन्हाेंने कहा कि उनकी 26 हजार रुपये मानदेय की मांग सरकार अनसुनी कर रही है। 65 साल में सेवानिवृत्त की मांग भी सरकार सुने। पदाधिकारियों ने साफ कहा कि मांग पूरी होने तक धरना जारी रहेगा।
शनिवार को धरने पर वीरमति, सुनीता, सुमन, शर्मिला, माया, रामदेवी, मीना आदि ने कहा कि पिछले 5 साल में आशा कार्यकर्ता का काम व महंगाई कई गुणा बढ़ी है। सरकार ने आशा मानदेय में एक रुपया की नहीं बढ़ाया, इसलिए 4 हजार रुपए में घर का गुजारा चलाना मुश्किल है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली भाजपा सरकार को कटघरे में खड़े करते हुए कहा कि आशा वर्कर्स भी किसी की बेटियां है, परंतु सरकार उनसे बात करे यही नही सरकार मामूली से दिए जाने वाले मानदेय में से भी कटौती करने के फरमान जारी कर रही है। इसकी हम निंदा करते हैं। लघु सचिवालय में चल रहें धरने की अध्यक्षता किरण बरहाना व संचालन रीता बादली ने किया । उन्होंने बताया कि सरकार आशा वर्करों न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये मानदेय लागू करने। रिटायरमेंट की उम्र 65 साल करने। पेंशन व ग्रेच्युटी का प्रबंध करने। ईएसआई व पीएफ लागू करने व बेगार प्रथा के रूप में ऑनलाइन काम पर रोक लगाने की मांगों के नारे गूंजते रहे। सीटू की जिला सचिव किरण ने धरने को संबोधित करते हुए बताया कि सरकार की दमन कार्यवाहियों से वे डरने वाली नही हैं। प्रशासन ने सरकार के इशारे पर शांतिपूर्वक धरने पर बैठी हैं। जिले की आशा वर्कर्स अंबाला के प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्री की कड़ी शब्दों में निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि सरकार समय रहते हुए आशा वर्कर्स की डेलिगेशन के साथ बातचीत करें। बातचीत से ही समाधान का रास्ता निकलता है नहीं तो आने वाले 2024 में इसका खामियां का हरियाणा की सरकार को भुगतना पड़ेगा।