17jjrp08- बेरी। जटेला धाम में बच्ची को दवा देते महंत। स्त्रोत- आयोजक
बेरी। गांव माजरा डी में स्थित स्वामी नितानंद महाराज की तपोभूमि जटेला धाम में हर वर्ष की भांति शरद पूर्णिमा की रात को दमा, नजला, श्वांस के रोगियों ने औषधीय खीर का सेवन किया। नौ साल की भावना डाबी टेक नरवाना ने जटेला धाम माजरा दुबलधन में खीर रूपी दवा का प्रसाद चखा।
देश के कोने-कोने से भक्त खीर का प्रसाद लेने के लिए आश्रम पहुंचे। सभी भक्तों ने आस्था और विश्वास के साथ बाबा की समाधि पर माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। जटेला धाम में बीती रात शरद पूर्णिमा की रात दमा, नजला और श्वांस की दवा लेने को मरीजों व श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। करीब 30 हजार लोग आश्रम में पहुंचे। इनमें 25 हजार लोगों ने दवा के साथ तैयार की गई खीर ली। जो पिछले साल की तुलना में काफी ज्यादा रहे।
जटेला धाम में दोपहर बाद ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर रात तक जारी रहा। तपोभूमि जटेला धाम के पीठाधीश्वर महंत राजेंद्र दास ने बताया कि साल भर में 12 पूर्णिमासी होती है, लेकिन शरद पूर्णिमा का बड़ा महत्व होता है। इस दिन चंद्रमा अपनी ओजस्वी किरणों से धरती पर अमृत वर्षा करता है। इस दिन देश के कोने-कोने में खीर का प्रसाद वितरित किया जाता है, लेकिन दुर्लभ जड़ी बूटियों से निर्मित खीर रूपी दवाई का वितरण केवल तपोभूमि जटेला धाम माजरा दुबलधन में किया जाता है।
उन्होंने बताया कि इस खीर रूपी दवा के सेवन लिए हर साल मरीजों कि संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। इस अवसर पर डॉ. रवि गोदरा आयुष मेडिसन अधिकारी झज्जर, डॉ. रमेश शर्मा, डॉ. सतीश, डॉ. जितेंद्र राणा मौजूद रहे।