झज्जर। अनाज मंडियों में खरीदा गया गेहूं और बिना खरीदी सरसों खुले आसमान के नीचे पड़े हैं। शुक्रवार की शाम को हुई बारिश के कारण हजारों एमटी अनाज भीग गया है और सुखाने के लिए जगह न होने के कारण ढेरों के नीचे का गेहूं भीगने के कारण अब सड़ने लगेगा। क्योंकि भीगे हुए गेहूं को सुखाने का कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है। क्योंकि मंडियों में गेहूं के ढेर लगे हुए हैं। आढ़ती और मजदूर गेहूं और सरसों के ढेरों के आसपास भरे पानी को निकालने में जुटे हुए थे। जिले की कच्ची मंडियों में और भी बुरा हाल है। ढाकला व माजरा डी की मंडियां कच्ची हैं। इसके अलावा मातनहेल की मंडी भी आधी कच्ची पड़ी है। इन मंडियों में तो अनाज के ढेरों के नीचे पानी घुसने के कारण अनाज और जल्दी खराब हो जाता है। हालांकि खरीद एजेंसियों के अधिकारियों का कहना है कि वे खराब हुए अनाज को भंडारण के लिए नहीं लेंगे। क्योंकि गोदाम पर खराब अनाज को गुणवत्ता को देखते हुए रिजेक्ट कर दिया जाएगा। सरसों की खरीद 10 मई और गेहूं की खरीद 15 मई को बंद कर दी गई थी। उसके बाद भी किसानों की करीब एक लाख क्विंटल सरसों अनाज मंडियों में बिना खरीदी हुई पड़ी है। किसान इस बात पर अड़े हुए है कि उनके गेट पास काटे जा चुके हैं और उनकी सरसों नहीं खरीदी गई है। जबकि सीएम व कृषि मंत्री सरसों का एक-एक दाना खरीदने की बात कह चुके हैं। इस मामले को लेकर शुक्रवार को आढ़ती व किसान डीसी से भी मिले थे। डीसी संजय जून ने दो तीन दिन में समस्या का समाधान निकालने का आश्वासन दिया था। अब 21 मई को एक बार फिर से किसान और आढ़ती डीसी से मिलेंगे।
करोड़ों रुपये का भीगा अनाज
जिले की अनाज मंडियों की बात की जाए तो करोड़ों रुपये का अनाज बारिश में भीग गया है। सरकार की तरफ से 4200 रुपये प्रति क्विंटल सरसों और 1840 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा गया है। अगर समय पर अनाज का उठान हो जाता तो काफी हद तक अनाज को भीगने से बचाया जा सकता था। इसके अलावा वेयर हाउस के गोदामों में खुले आसमान के नीचे भंडारण किया गया गेहूं न ढकने की वजह से भीग गया है।
अगर अनाज का समय पर उठान हो जाता तो नुकसान को कम किया जा सकता था। न तो समय पर अनाज को उठाया गया और न ही समय पर बारदाना दिया गया है। आढ़तियों ने अनाज को बेशक उपर से ढक दिया हो, लेकिन ढेरों के नीचे करीब एक से डेढ़ फुट तक अनाज भीग गया है। जो खराब होने के कारण रिजेक्ट हो जाएगा। ऐसी स्थिति में आढ़तियों और किसानों को ही नुकसान होगा। अगर सरसों की खरीद काटे गए टोकन के हिसाब से खरीदी जाती तो किसानों और आढ़तियों को नुकसान नहीं होता।
चांद सिंह पहलवान, प्रधान, अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन, झज्जर।
खराब हुए अनाज को गोदाम पर नहीं लिया जाएगा। अनाज को भीगने से बचाने की जिम्मेदारी आढ़तियों की है। ऊपर से भीगने से कम नुकसान होता है और ढेरों के नीचे पानी घुसने से अनाज अधिक खराब होता है।
अशोक शर्मा, डीएफएससी, झज्जर।