अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। पुलवामा में हुआ हमला सीआरपीएफ पर नहीं बल्कि देश की आन-बान-शान पर हुआ है। हमारे वीर जवान देश की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देते आए हैं। लेकिन इस प्रकार का हमला कायराना हरकत है। इसके लिए देश की सरकार को कोई ठोस कदम उठाते हुए दुश्मन को करारा जवाब देना चाहिए। लेकिन सरकार व सेना के अधिकारियों को जल्दबाजी न कर सावधानी पूर्व कार्रवाई करनी चाहिए। सेना पर पत्थर फेंकने वालों और आतंकियों का साथ देने वाले लोगों के खिलाफ भी देशद्रोह का मामला दर्ज करना चाहिए। यह कहना है 1971 की लड़ाई के योद्धा वीर चक्र विजेता झज्जर निवासी कैप्टन जयसिंह राठी का। उनका कहना है कि यह समय बातें घडने का नहीं है। जब देश पर कोई आंच आती है तो सभी राजनैतिक दलों को एक होकर कार्रवाई करनी चाहिए सरकार चाहे किसी भी पार्टी की हो। पार्टी व दलों के हितों से ऊपर देशहित है। इस लिए दुश्मन को हल्के में न लेकर कठोर कार्रवाई करनी जरूरी है। कैप्टन जयसिंह राठी का कहना है कि 3 दिसंबर से 17 दिसंबर 1971 तक 14 दिन पाकिस्तान के साथ चली लड़ाई में उन्होंने दुश्मन की कई तोप व 40 से अधिक टैंक उड़ा दिए गए थे। इस युुद्ध में तीन व चार दिसंबर को ही नौ टैंक व कई तोप उड़ाई तभी सरकार ने उन्हें वीरचक्र देने की घोषणा रेडियो पर कर दी थी। उसके बाद भी उन्होंने पाक सेना के हौंसले परास्त कर दिये थे। वे आर्म्ड 9 टैंक रजिमेंट में गनर थे। युद्ध के दौरान उनकी रजिमेंट सजोरिया सेक्टर जम्मू-कश्मीर में तैनात थी। उनका कहना है कि हमने युद्ध किया है और दुश्मन को नाकों चने जबाए हैं। उनका कहना हे कि आतंकियों काम आतंक फैलाना है। लेकिन कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। यहां की जनता को आतंकियों का साथ नहीं देना चाहिए।