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जच्चा-बच्चा अस्पताल में जल्द लगाई जाए बॉयल एप्रेटस मशीन

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अमर उजाला ब्यूरो
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चरखी दादरी। शहर के पुराना सिविल अस्पताल में मातृ -शिशु रोग विशेषज्ञ सहित अन्य सुविधाएं बढ़ाने की मांग को लेकर कई सामाजिक संगठन भी आगे आए हैं। इस मुहिम से सोमवार को जुड़े कई सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि जच्चा-बच्चा अस्पताल में सुविधाएं बढ़ानी चाहिए। जिससे बच्चों और प्रसूताओं को लाभ मिल सके। तैनात किए जाने की मांग सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने की है।
सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि स्वीकृति के बाद भी महिला विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हो सकी और न ही लैब की सुविधा शुरू हो सकी है। सरकार ने यहां बच्चों के रोगों की जांच के लिए बॉयल एप्रेटस मशीन को भी मंजूर दे रखी है लेकिन यह मशीन भी नहीं पहुंची। ऐसे में बच्चों के रोग संबंधी टेस्ट करवाने के लिए बड़े शहरों में जाना पड़ता है जिससे आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। सरकार को पुराना सिविल अस्पताल भवन में जल्द ही बढिय़ा स्तर की चिकित्सा सुविधाएं शुरू करनी चाहिए।
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--सरकार को पुराना सिविल अस्पताल मेें जल्द ही सभी प्रकार की चिकित्सा सुविधाएं शुरू करने की जरूरत है। अस्पताल में बच्चों के टेस्ट के लिए बॉयल एप्रेटस मशीन लगनी चाहिए। इसके अलावा अल्ट्रसाउंड मशीन सहित अन्य मशीनें लगनी चाहिए। सरकार ने यहां जच्चा- बच्चा केंद्र को मंजूरी देकर सराहनीय कार्य किया है।
देवेंद्र फौगाट, युवा एवं समाज परिवर्तन फाउंडेशन

अस्पताल भवन का भी सुधार होना चाहिए तभी यहां जांच मशीनें लग पाएंगी। पुराना सिविल अस्पताल शहर के बीेचोबीच स्थित है ऐसे में यहां महिला व शिशु अस्पताल का मंजूर होना सही कदम है लेकिन सरकार को अब चिकित्सक व अन्य सुविधाएं जल्द ही मुहैया करवानी चाहिए।
-ओम प्रकाश, उपाध्यक्ष युवा एवं समाज परिवर्तन फाउंडेशन

-- पुराना सिविल अस्पताल भवन के जच्चा- बच्चा केंद्र में सभी प्रकार की चिकित्सा सुविधाएं होने से चरखी दादरी ही नहीं साथ लगते जिला महेंद्रगढ़ व झज्जर जिलों के लोगों को भी फायदा हो सकेगा। इस समय करीब डेढ़ दर्जन गांव चरखी दादरी की सीमा से सटे हैं। सरकार को जल्द ही महिला एवं बाल रोग विशेषज्ञ तैनात करने चाहिए।
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रमेश फौगाट, सामाजिक कार्यकर्ता

-- जिलेे में महिला एवं बाल अस्पताल की लंबे समय से जरूरत बनी हुई थी जो सरकार ने पूरी कर दी अब सरकार को इस जच्चा- बच्चा केंद्र में चिकित्सा सुविधा व पूरे स्टाफ की तैनाती करनी चाहिए ताकि बच्चों व महिलाओं के उपचार में परेशानी न आए।
देवेंद्र लांबा, उपाध्यक्ष युवा एवं समाज परिवर्तन फाउंडेशन
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