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भावांतर योजना नहीं कर पाई टमाटर उत्पादकों के नुकसान की भरपाई, मार्केटिंग बोर्ड कार्यालय पहुंचकर जताया रोष

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अमर उजाला ब्यूरो
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चरखी दादरी।
किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए बनाई गई फसल भावांतर योजना से जिले के टमाटर उत्पादक किसान संतुष्ट नहीं हैं। जे-फार्म के तहत मिले टमाटर के भाव और निर्धारित समर्थन मूल्य के बीच के अंतर को खत्म करने के लिए किसानों के खातों में जो राशि डाली गई उसे नाकाफी बताते हुए नाराज किसानों ने मंगलवार को मार्केटिंग बोर्ड कार्यालय पहुंचकर रोष जताया। हालांकि इन किसानों को वहां कोई अधिकारी नहीं मिला और कुछ देर प्रदर्शन करने के बाद किसान वापिस लौट गए। कुछ किसानों ने इस मामले में कोर्ट में याचिका दायर करने की तो कुछ ने मार्केटिंग बोर्ड कार्यालय को ताला जड़ने तक की चेतावनी दी है।
फसल भावांतर योजना के तहत टमाटर का समर्थन मूल्य सरकार द्वारा चार रुपये निर्धारित किया गया था। आबवानी विभाग के आंकड़े अनुसार जिले में करीब 900 टमाटर उत्पादक है और भावांतर योजना के तहत करीब 500 किसानों ने ही अपना रजिस्ट्रेशन कराया था। सरकार ने खरीद शुरू करने से पहले मंडियों में पुख्ता इंतजाम होने के दावे किए थे। चरखी दादरी सब्जी मंडी में किसानों को अपना टमाटर बेचने में काफी दिक्कतें आई। कुछ किसानों ने तो खरीद प्रक्रिया न होने और बेहद कम दाम मिलने के विरोध में सड़क पर टमाटर फेंककर अपना रोष जाहिर किया था। इसके बावजूद सभी किसानों का टमाटर नहीं खरीदा गया था। वहीं, सब्जी मंडी में महज 10 पैसे प्रति किलोग्राम के हिसाब से भी टमाटर खरीदा गया। बागवानी विभाग के सूत्रों की मानें तो शुरुआत में 100 रुपये तक टमाटर की कैरेट खरीदी गई थी लेकिन इसके बाद खरीद प्रक्रिया भी धीमी हो गई और टमाटर के रेट भी काफी डाउन आ गए। आखिरी समय में किसानों ने 25 रुपये कैरेट के हिसाब से भी अपना टमाटर बेचा और इसके बाद उन्हें भावांतर योजना से नुकसान की भरपाई होने की उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
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मंगलवार दोपहर करीब 11 बजे भावांतर भरपाई योजना के तहत खाते में आई नकदी से किसान संतुष्ट नजर नहीं आए। ये किसान मार्केटिंग बोर्ड कार्यालय पहुंचे और नारेबाजी कर अपने रोष का इजहार किया। इस दौरान मार्केटिंग बोर्ड अधिकारी उन्हें नहीं मिले और किसान करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार कर वापिस लौट गए।

महज 300 किसानों के खाते में ही डाले पैसे
किसान फूल सिंह तिवाला ने बताया कि उसने 698 क्विंटल टमाटर बेचा था लेकिन उसके खाते में अब तक नकदी नहीं आई है। वहीं, किसान मनोज, रमेश, सुरेश मैहड़ा, सुमेर, राम किशन आदि किसानों ने बताया कि उन्हें पता चला है कि भावांतर योजना के तहत रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसानों में से महज 300 के खाते में नकदी डाली गई है। इन किसानों ने बताया कि कुछ किसानों के खाते में तो महज 62 रुपये ही डाले गए हैं।

मैंने 550 क्विंटल टमाटर मंडी में आकर बेचा था। टमाटर का भाव समर्थन मूल्य का 50 फीसदी भी नहीं मिला था और अब खाते में 8885 रुपये डाले गए हैं। इसके बावजूद समर्थन मूल्य मुझे प्राप्त नहीं हुआ।
-रमेश, नौरंगाबास

मैंने एक रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से 400 क्विंटल टमाटर मंडी में बेचा था। भावांतर योजना के तहत मेरे खाते में पौने नौ पैसे प्रति किलोग्राम के हिसाब से डाले गए हैं। समर्थन मूल्य के 33 प्रतिशत ही मुझे भाव मिले।
-मनोज, खेड़ी बत्तर

कई दिनों के इंतजार के बाद मैं अपना करीब 250 क्विंटल टमाटर बेच पाया था। भावांतर योजना के तहत मैंने रजिस्ट्रेशन कराया था लेकिन अब तक मेरे खाते में भरपाई की राशि नहीं डाली गई है। टमाटर के भाव भी कम ही मिले थे।
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-समेर, मानकावास

टमाटर बेचने में इस बार काफी दिक्कतों को सामना करना पड़ा। मैंने करीब 250 क्विंटल टमाटर चरखी दादरी मंडी में बेचा था लेकिन अब तक मेरे खाते में भरपाई राशि नहीं आई है। अन्य किसान बता रहे हैं कि बेहद कम राशि ही खाते में डाली गई।
विकास, शीशवाला
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