फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मानसून सीजन में वन विभाग लगाएगा 2.50 लाख पौधे

विज्ञापन
विज्ञापन
चरखी दादरी।
विज्ञापन

इस बार मानसून सीजन में वन विभाग फलदार और औषधीय पौधे ज्यादा मात्रा में रोपित करेगा। विभाग विभिन्न प्रजातियों के 2.50 लाख पौधे रोपित करेगा। विभाग ने इसके लिए दो नर्सरी लगा रखी हैं। 15 जून के बाद विभाग पौधरोपण के लिए साइटों का चयन कर लेेगा।
पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में पेड़-पौधों की विशेष भूमिका है। पेड़ ही वर्षा लानेे में सदैव सहायक बनते रहे हैं। पर्यावरण संतुलन का बिगड़ना आज चिंता का विषय बना हुआ है। भौतिकवादी चकाचौंध में मशीनरी को ज्यादा बढ़ावा मिल रहा है। हर साल वाहनों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। सर्दियों में तो पर्यावरण के हालात और भी ज्यादा खराब हो जाते हैं। पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने में सबसे अहम भूमिका पेड़ों की होती है।
विज्ञापन


जिले का भौगोलिक क्षेत्र भी कम नहीं है। कृषि योग्य क्षेत्र 1.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है। इसके अलावा बंजर और बरानी एरिया भी हजारों हेक्टेयर क्षेत्र है जो खाली पड़ा है। इसके अलावा सरकारी जमीनी क्षेत्र भी लंबा चौड़ा है जहां पौधरोपण किया जा सकता है। जून अंतिम सप्ताह एवं जुलाई प्रथम सप्ताह में आमतौर पर मानसून के आगमन का समय माना जाता है। इसके लिए विभाग भी अपनी प्लानिंग साथ-साथ कर रहा है। विभाग ने गत मार्च अंतिम सप्ताह में भी पौध नर्सरी शुरू कर दी थी। अब यह नर्सरी जून अंतिम सप्ताह तक तैयार होने की उम्मीद है।
फलदार और औषधीय पौधों पर रहेगा फोकस
विभाग इस बार जिले में फलदार और औषधीय पौध रोपण पर ज्यादा फोकस करने की प्लानिंग पर काम कर रहा है। इनके अलावा विभिन्न प्रजातियों के पौधों की नर्सरी भी तैयार की जा रही है। औषधीय पौधों में अर्जुन, जामुन, अरंठस, टोटलस और गुलर प्रमुख रूप से शामिल हैं। इनके अलावा फलदार पौधे अनार, अमरूद, नींबू और बहेड़ा प्रमुख रूप से शामिल हैं। इनकी पौध अंतिम चरण में है। इन पौधों के अलावा कीकर, पीपल,नीम, सरस, बेरी, बरगद और सीसम के पौधे भी नर्सरियों में तैयार किए जा रहे हैं ताकि एरिया वाइज मिट्टी के अनुरूप इन पौधों का रोपण किया जा सके।
दो नर्सरियों में तैयार हो रही पौध
जिले में दो नर्सरियों में यह 2.50 लाख की पौध तैयार हो रही है। विभाग ने एक नर्सरी गांव रामनगर में लगा रखी है यहां बधवाना नहर के जरिए नर्सरी के पौधों की सिंचाई की जाती है। इसी प्रकार दूसरी नर्सरी गांव बरसाना में लगा रखी है यहां लोहारू नहर के पानी से नर्सरी की सिंचाई की जाती है। इसके अलावा नहरी पानी की कमी होने पर टैंकरों की भी मदद ली जा रही है ताकि नर्सरी में पानी की कमी नहीं होने पाए।
15 जून के बाद होंगी साइट तय
विभाग 15 जून के बाद साइटों का चयन कर लेगा जहां यह पौध लगाए जाने हैं। फलदार व औषधीय पौधों के लिए मिट्टी व पानी के अनुरूप साइटों का चयन किया जाएगा। यह फलदार व औषधीय पौधे आम लोगों को भी वितरित किए जाने की प्लानिंग है। विभाग अक्सर नहरों के साथ- साथ, सड़कों के किनारे, गांवों में पड़ी बंजर भूमि व सामलात जमीन पर ज्यादा मात्रा में पौधे लगाता रहा है। इसके अलावा सरकारी भवनों के खाली परिसर, स्कूल परिसर व सरकारी जमीन पर पौधरोपण करता है।
विज्ञापन

==
विभाग ने मानसून सीजन के लिए दो पौध नर्सरी तैयार की हैं। जून अंतिम सप्ताह में यह तैयार हो जाएंगी। जल्द ही साइटों का अंतिम चयन होगा। मानसून की पहली बारिश के बाद पौधरोपण शुरू कर दिया जाएगा।
जयपाल राठी, वन विभाग रेंजर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें