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मॉक ड्रिल: भूकंप से झज्जर में 10 मरे, राहत कार्य में जुटा रहा प्रशासन

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अमर उजाला ब्यूरो
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झज्जर।
भूकंप के कारण शहर में चार स्थानों पर बिल्डिंग ध्वस्त हो गई, जिसके चलते प्रशासन ने संवाद भवन में ऑपरेशन कंट्रोल रूम तैयार किया। जहां से अलार्म बजते ही प्रशासन की टीमें अलर्ट हो गई और राहत बचाव कार्य के लिए मौके पर पहुंची। इंडो अमेरिकन स्कूल, लघु सचिवालय व सुमन सिटी मॉल में 20-20 लोग घायल हुए तथा एडवांटा अस्पताल में छह लोग घायल होने की और चार जगह 10 लोगों के मरने की सूचना है। राहत बचाव कार्य के दौरान एंबुलेंस की कमी नजर आई, जिसके चलते प्रशासन ने समय रहते इलाज के लिए टाटा-407 और पिकअप गाड़ियों में घायलों को अस्पताल में भिजवाया। इससे समय रहते घायलों का इलाज संभव हो पाया। सामान्य अस्पताल के पास केवल आठ एंबुलेंस उपलब्ध थी, इसलिए हर घटनास्थल पर दो को भेजा गया था। लेकिन घायलों की संख्या अधिक होने के चलते प्रशासन ने टाटा-407 व पिकअप गाड़ी में ही घायलों को ले जाना उचित समझा।
अधिकारी नहीं नजर आए सीरियस
आपदा के दौरान राहत कार्य में जितनी तल्लीनता से एनसीसी कैडेटस व रेडक्रॉस के वालंटियर जुटे नजर आए, उतने सीरियस अधिकारी नजर नहीं आए। अधिकारी इस कार्य को केवल औपचारिकता के तौर पर करते दिखाई दिए। लेकिन कैडेटस के जोश के चलते दिख रहा था कि हकीकत में आपदा आई है, वे लोगों को बचाने में जुटे हुए हैं। वहीं, स्ट्रेचर कम पड़ने के कारण रेडक्रॉस के कपड़े के स्ट्रेचर प्रयोग किए गए। आपात स्थिति से निपटने के लिए अगर रेडक्रॉस के स्ट्रेचर नहीं होते तो स्थिति गंभीर हो सकते थी।
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शहर में रहा अफरा-तफरी का माहौल
सुबह 10 बजे के बाद हूटर बजते ही शहर में वाहनों के सायरन की आवाज गूंजने लगी। शहर की अधिकांश सड़कों पर दमकल, एंबुलेंस व पुलिस विभाग की गाड़ियां सायरन बजाते हुए दौड़ रही थी तो हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ था। जिन लोगों को मॉक ड्रिल के बारे में जानकारी नहीं थी, वे एक-दूसरे से पूछते नजर आए कि आखिर क्या माजरा है, प्रशासन की गाड़ियां सड़कों पर क्यों दौड़ रही हैं।

प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी के लिए भेजे ड्रोन कैमरे
प्रशासन में पहले से चयनित छह स्थानों पर सुबह दस बजे आपदा का सायरन बजते ही यह ड्रिल शुरू हुई। उपायुक्त सोनल गोयल ने बताया कि बाग जहांआरा स्टेडियम में राहत और चिकित्सा शिविर बनाया गया। जबकि संवाद भवन में आपदा नियंत्रण कक्ष बनाया गया। भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर से तुरंत राहत टीमें भेजी गईं, पूरे प्रभावित क्षेत्र की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरे भेजे गए। ताकि सभी प्रभावित लोगों को तत्काल मदद दी जा सके। झज्जर में लघु सचिवालय, दिल्ली गेट पर इंडो अमेरिकन स्कूल, गुरुग्राम रोड पर सुमन सीटी तथा शहर में एडवांटा अस्पताल में मॉक ड्रिल की गई। वहीं, बहादुरगढ़ के रिहायशी क्षेत्र ओमैक्स सहित एचपीसीएल गैस प्लांट में दो स्थानों पर आपदा प्रबंधन की तैयारियों का ड्रिल की गई।
उपायुक्त ने लिया जायजा
उपायुक्त सोनल गोयल ने स्वयं मॉक ड्रिल के निर्धारित किए गए स्थानों का मौके पर जायजा लिया। आपदा का सायरन बजते ही उपायुक्त आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष पंहुची और पूरी स्थिति का आंकलन किया, फिर बाग जहांआरा स्टेडियम में राहत व चिकित्सा शिविर का जायजा लिया। इस उपरांत उपायुक्त बहादुरगढ़ में एचपीसीएल गैस प्लांट आसौदा में पहुंचकर मेगा मॉक ड्रिल का जायजा लिया। उपायुक्त ने मॉक ड्रिल के उद्देश्य से अवगत कराते हुए कहा कि हमारी आपदा की स्थिति में क्या तैयारियां हैं, कैसे हम जान-माल की सुरक्षा कर सकते हैं और ऐसी स्थिति में राहत कार्य कैसे किए जाएं, पूरी प्रक्रिया को मॉक ड्रिल के माध्यम से करते हुए हर स्तर पर परिपूर्ण रहते हुए कार्य करने की बात कही। उन्होंने कहा कि आज हुई मॉक ड्रिल की समीक्षा करते हुए प्रशासनिक स्तर पर किए जाने वाले प्रबंधों पर भी समीक्षा की जाएगी ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की आपदा के दौरान पूरी तैयारी के साथ संबंधित विभाग कार्य करें।
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इनकी रही भागेदारी
मेगा ड्रिल में प्रशासन के साथ -साथ पूर्व सैनिकों, एनएनसी कैडेट्स, होम गार्डस, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं, रोटरी क्लब सहित अनेक सामाजिक संगठनों ने अपना सहयोग दिया। उपायुक्त ने सभी संगठनों को इस ड्रिल में भागीदार बनने पर धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि मेगा ड्रिल में शामिल अधिकारियों, कर्मचारियों व अन्य लोगों को पहले ट्रेनिंग दी गई थी जिसका मॉक ड्रिल में अच्छा परिणाम देखने को मिला। मॉक ड्रिल के दौरान एएसपी लोकेंद्र सिंह व एसडीएम बेरी संजय राय, एसडीएम झज्जर रोहित यादव, डीआरओ मनबीर सांगवान सहित जिला के सभी आलाधिकारी इस ड्रिल में शामिल हुए।
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