अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
ब्लू व्हेल गेम के कारण हो रही अप्रिय घटनाओं से सभी दुखी हैं। अभिभावक और अध्यापक ही नहीं, कवियों का मन भी बहुत व्यथित हो रहा है। अध्यापक प्रशिक्षण कालेजों में भी इस तरह के गंभीर विषयों पर खास तौर से चिंतन होने लगा है।
बच्चों को अच्छे मनोरंजन का मौका दें
दरअसल, बच्चों को अच्छे मनोरंजन का मौका मिलना चाहिए। यह जिम्मेवारी अध्यापकों व अभिभावकों की बनती है। कुछ अच्छी फिल्में भी दिखानी चाहिए। ये समझने की प्रयास करना चाहिए कि बच्चा किस खेल में या किस रचनात्मक कार्य में रुचि लेता है। इससे बच्चे का ध्यान इस तरह के खतरनाक गेम की तरफ जाएगा ही नहीं। हमने अपने कालेज में बीएड की छात्राओं को भी कहा है कि वे न केवल उन स्कूली बच्चों पर नजर रखें जो फोन में गेम खेलने के आदी हैं। अपने आस पड़ोस के बच्चों की ओर भी ध्यान देने के लिए कहा गया है।
- डॉ. अरुणा आंचल, प्राचार्य, रवींद्र भारती कॉलेज, झज्जर।
अपनी जिम्मेवारी समझें अभिभावक
इंटरनेट हमारे आधुनिक जीवन की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है लेकिन समय-समय पर बच्चों और किशोरों में इसके नकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिलते हैं। इसलिए बच्चों को इंटरनेट के दुरुपयोग से बचाने की कोशिश करनी चाहिए। इसमें अभिभावकों की अपने बच्चों के प्रति बरती जाने वाली लापरवाही एक बड़ा कारण है। साथ ही बढ़ती घटनाओं को देखते हुए ये एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है कि बच्चों को इस खेल के नकारात्मक परिणामों के बारे में पर्याप्त जानकारी दी जाए और बच्चों में आत्मविश्वास पैदा किया जाए। ताकि किसी भी परिस्थिति में वे मानसिक दबाव में आकर आत्महत्या जैसा कोई गलत कदम न उठाएं।
- डॉ. प्रदीप गौड़, सहायक प्रोफेसर, राजकीय महाविद्यालय, बहादुरगढ़
अपने बच्चों पर रखती हूं विशेष ध्यान
मेरे दो बेटे हैं और एक 13 साल का है तो दूसरा 10 साल का। मै दोनों पर विशेष ध्यान रखती हूं। पिछले कई दिनों से ब्लू व्हेल गेम के बारे में सुना है कि जो भी इस गेम को खेलता है। वह आखिर में सुसाइड कर लेता है। ये सब सुनने के बाद मैंने अपने बच्चों पर निगरानी कुछ ज्यादा कर दी है और उन्हें मोबाइल देना भी बंद कर दिया है।
- ईशा, गृहिणी, नई बस्ती बहादुरगढ़।
ब्लू व्हेल गेम से अभिभावक घबराए
स्कूल में अध्यापक बच्चों को लगातार ब्लू व्हेल गेम के बारे में जागरूक कर रहे हैं तो वे भी घर पर आने के बाद अपने बच्चे का हर तरह से ध्यान रखते हैं। बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखा जा रहा है। इन दिनों यह गेम बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। बताया जाता है कि जो बच्चा इस वीडियो गेम को एक बार खेल लेता है तो इसका पीछा नहीं छोड़ता। आखिर में वह आत्म विश्वास खो बैठता है और आत्महत्या तक का कदम उठा लेता है। इससे वे घबराए हुए हैं।
- जीत राठी, सांखोल निवासी
बच्चों के साथ बिताते हैं समय
जब से ब्लू व्हेल गेम के बारे में सुना है तभी से बच्चों के साथ अधिक समय बिताना शुरू कर दिया है। स्कूल में अध्यापक और घर में अभिभावक बच्चों को इस गेम से दूर रखते हैं। यह वीडियो गेम एक खतरनाक गेम हैं। बच्चों को इससे दूर रखना बेहद जरूरी है। वे लगातार ऐसा कर रहे हैं। बच्चों को पार्क में घुमाना, अन्य गतिविधियों में समय बिताना अब शुरू कर दिया गया है। ताकि बच्चे इस गेम की तरफ न भागें। प्रतिदिन वे अपने बच्चों से बैठकर कम से कम आधा घंटा लगातार बात करते हैं।
- शोभा रानी, अध्यापिका
भौतिकता की दौड़ में संस्कार भी सिखाएं
ब्लू व्हेल के कारण बच्चों की जान जाने से हम कवियों का मन भी बेहद व्यथित हो रहा है। संयुक्त परिवारों की परंपरा समाप्त होने और भौतिकता की दौड़ में व्यस्त अभिभावकों की अनदेखी आज के किशोरों में इंटरनेट के अधिक उपयोग और इस प्रकार के चुनौती पूर्ण मगर आत्मघाती कदम उठाने का सबसे बड़ा कारण है।
एक काव्यमय टिप्पणी :
ब्लू व्हेल कहने को खेल है,
पर इससे हैं हम नाराज।
आत्मघाती खेल है यह तो,
लील रहा जो जीवन आज।
दुविधा में हैं सब अभिभावक,
कैसे इस संकट को टालें ?
क्यों न उनको अधिक समय दे,
संस्कारों में उनको ढालें !
- कृष्ण गोपाल विद्यार्थी, कवि एवं गीतकार, बहादुरगढ़