अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़। हरियाणा में मई माह में होने वाले लोकसभा चुनावों में अबकी बार नोटा का प्रतिशत बढ़ेगा। बहादुरगढ़ बार एसोसिएशन के कई वकीलों से अमर उजाला ने इस विषय पर बातचीत की।
बार एसोसिएशन के अधिवक्ता विराट सिंह बल्हारा ने कहा कि हर बार चुनावों में वही लोग मैदान में उतरते हैं जो कई-कई बार चुनाव लड़ चुके होते हैं। ऐसे में आमजन भी बार-बार उन्हीं लोगों को मतदान करके ठगा सा महसूस करता है। इसलिए अबकी बार नोटा का वोट प्रतिशत बढना तय है।
बामनोली गांव निवासी अधिवक्ता मनोज छिल्लर ने कहा कि भारत में ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए कि जो व्यक्ति एक बार चुनाव लड़े और जीत जाए तो उसे दोबारा मौका नहीं मिलना चाहिए। ऐसे में एक बार चुनाव जीतने के बाद वही या उनके परिवार से ही लोग बार-बार चुनाव मैदान में उतरते हैं तो दूसरों को मौका नहीं मिल पाता। इससे लोगों में वोटिंग के प्रति रुझान घट रहा है और लोग लगातार नोटा को यूज कर रहे हैं।
जटवाड़ा मोहल्ला निवासी अधिवक्ता मनोज राठी का कहना है कि वोट सभी का अधिकार है और यह करना भी चाहिए। राजनीति सेवा का माध्यम न बनकर पैसे कमाने का जरिया बन गई है। इससे जनता भी नेताओं के कारनामों को भली भांति जानती है। अब पढ़े लिखे लोग इन राजनेताओं को वोट न देकर नोटा का बटन प्रयोग करते हैं। इससे जहां नोटा का वोट प्रतिशत बढ़ रहा है। वहीं वोटिंग में कमी आ रही है।
अधिवक्ता संदीप सोलंकी ने बताया कि जब से चुनाव आयोग की तरफ से ईवीएम में नोटा का बटन लगाया है। तभी से नोटा का वोट प्रतिशत बढ़ने लगा है। काफी संख्या में लोग राजनेताओं को पसंद नहीं करते और वे नोटा के बटन का प्रयोग करते हैं। नोटा का बटन प्रयोग करने के पीछे एक लॉजिक यह भी है कि चुनाव मैदान में केवल बार-बार वही लोग आते हैं जो कई-कई बार चुनाव जीत चुके होते हैं।
अधिवक्ता धर्मपाल सैनी ने भी माना कि बार-बार एक ही तरह के प्रत्याशी मैदान में उतरने से नोटा का प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है। अबकी बार पिछले लोकसभा चुनावों के मद्देनजर नोटा का प्रतिशत बढना तय है। सरकार को भी इस दिशा में कोई खास कदम उठाने चाहिए। समाज के अन्य लोगों को भी राजनीति में आगे आने का मौका मिलना चाहिए।