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बाढ़सा में गाय का कारज 31 मार्च को, गुलिया 19-05-12

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अमर उजाला ब्यूरो
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बादली। बाढ़सा गांव में दृष्टिहीन गाय की मौत पर कारज का आयोजन करने का निर्णय लिया गया है। कारज की रूपरेखा के लिए गांव में 84 गांवों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इस दौरान सर्वसम्मति से कारज करने की अनुमति सरपंच परिवार से जोगेन्द्र डायरेक्टर को दी गई। शुक्रवार को गांव में हुई पंचायत की अध्यक्षता गुलिया खाप प्रधान सुनील जहांगीरपुर ने की। बैठक में सुनील प्रधान ने कहा कि परिवार की ओर से 31 मार्च को गाय के कारज का फैसला लेना सराहनीय कार्य है। उन्होंने पंचायत में लोगों से हर घर में गाय रखने की अपील भी की। गांव में हुई पंचायत में सभी तपो के प्रधानों में नौगांव से राव धर्मबीर खेड़ा झांझलौला, हरेंद्र चाहार सिलाना, पाटौदा ठाकुर बीरसिंह, जराऊ माजरा प्रधान राव कर्णसिंह, तिरपड़ी 17 से अजीत सिंह सहित पहलवान नवीन जहांगीरपुर, संजीत प्रधान, सतेन्द्र पाहसौर, जोगेन्द्र प्रधान, महाबीर पेलपा सहित सैकड़ों की संख्या में आसपास के ग्रामीण मौजूद रहे।

ग्रामीण मानते है आशीर्वाद
ग्रामीणों का मानना है कि दृष्टिहीन गाय के आशीर्वाद से ही गांव की दिशा व दशा बदली है। गांव में एम्स-2 स्थापित होना और कैंसर संस्थान जैसी बड़ी परियोजनाओं के शुरू होने का श्रेय भी गोमाता को देते हैं। नेत्रहीन गाय की सेवा में दशकों तक मेहनत करने वाली मिश्री देवी गांव में सरपंच रही है जबकि परिवार की बहू नरेश देवी फिलहाल गांव में सरपंच है।
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24 साल घर पर रखी दृष्टिहीन गाय
बाढ़सा के रामहेर ने अपने घर पर 24 साल तक दृष्टिहीन गाय की देखभाल की थी। सेवा भाव से गाय की देखभाल करते हुए रामहेर के निधन के बाद पत्नी मिश्री देवी ने गाय को सेवा की। मिश्री देवी गांव की सरपंच भी बनी और एम्स के लिए 300 एकड़ जमीन देने में विशेष भूमिका निभाई थी। जोगेंद्र डायरेक्टर का कहना है कि 2013 में गाय की मौत पर ही उन्होंने कारज का मन बनाया था।
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पूरे देश में दिया जाएगा न्योता
जोगेंद्र डायरेक्टर ने बताया कि कारज के लिए पूरे देश में न्योता दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त हरियाणा की सभी 153 गोशालाओं और गऊओं के लिए सभी प्रमाणित 50 अस्पतालों में दान दिया जाएगा। गांव में गाय की प्रतिमा भी स्थापित होगी ताकि गोपूजा के लिए ग्रामीणों को स्थान मिल सके।
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