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रजिस्ट्रेशन के चक्कर में

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झज्जर। सरकार ने इस बार बाजरा की खरीद को लेकर कोई घालमेल न हो इसके लिए किसानों का रजिस्ट्रेशन कराने की योजना बनाई थी। लेकिन काफी किसान पोर्टल पर सही जानकारी न दे पाने की वजह से बाजरा बेचने से वंचित रह गए हैं। जबकि प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से उनके कागजात पूरे करने और शपथ पत्र देने के बाद भी 800 से अधिक समर्थन मूल्य पर बाजरा नहीं बेच पाए हैं। बाजरे की सरकारी खरीद 15 नवंबर को बंद हो चुकी है। जबकि ये किसान आज भी अपने कागजात पूरे करने के बाद बाजरा बेचने के लिए मंडियों व अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। करीब 50 दिन से भटक रहे किसानों का बाजरा सरकारी खरीद एजेंसियों की तरफ से नहीं खरीदा जा रहा है। जबकि प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार इन किसानों का ब्योरा चंडीगढ़ मुख्यालय को भेजा गया है। लेकिन मुख्यालय से इस बारे में अभी तक कोई निर्देश नहीं आया है। इन किसानों का बाजरा खरीदने के लिए सरकार ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है। जिसकी वजह से किसान बाजरा बेचने से वंचित रह गए हैं। समर्थन मूूूल्य पर बाजरा बेचने के लिए किसानों ने मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद भी जिला के 1513 किसानों का रजिस्ट्रेशन रद हो गया था। उसके बाद 800 से अधिक किसानों ने कागजात पूरे कर दिए थे। आज भी ये किसान अपना बाजरा बिकने का इंतजार कर रहे हैं।

16397 किसानों का हुआ रजिस्ट्रेशन
जिला में 16397 किसानों ने सरकार के नियम अनुसार मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर अपना डेटा अपलोड किया था, लेकिन इनमें से 1513 किसानों का डेटा गलत होने की वजह से उनका बाजरा नहीं बिका। किसान अपने कागजात की कमी को पूरा कर चुके हैं। जबकि कुछ किसान ऐसे हैं जिनकी गिरदावरी नहीं हो पाई थी। किसानों ने पटवारी की रिपोर्ट और शपथ पत्र भी विभाग को दिए हुए हैं।
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6946 किसानों का खरीदा बाजरा, बाकी कहां चले गए किसान
झज्जर जिला में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 16397 किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन बाजरा बचने के लिए पोर्टल पर कराया था। लेकिन 9 हजार से अधिक किसान कहां चले गए और बाजरा बेचने के लिए समर्थन मूल्य 1950 रुपये होने के बाद भी बाजरा बेचने के लिए मंडी क्यों नहीं आए यह रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा रहा है। जिला की तीनों अनाज मंडियों में 6946 किसानों का बाजरा खरीदा गया है। जिला में 2 लाख 73 हजार 110 क्विंटल बाजरे की खरीद हुई है। जिला में बाजरे की खरीद के लिए तीन अनाज मंडियां निर्धारित की गई थीं। जिसमें से सबसे अधिक बाजरा झज्जर की अनाज मंडी में खरीदा गया है। अकेले झज्जर की अनाज मंडी से अब तक 138020 क्विंटल बाजरा खरीदा गया है। मातनहेल की अनाज मंडी 85360 क्विंटल और ढाकला की अनाज मंडी में 49730 क्विंटल बाजरे की खरीद हुई है।

बोगस रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की आशंका
अखिल भारतीय किसान सभा के जिला अध्यक्ष जयप्रकाश बैनीवाल का कहना है कि सरकार की तरफ से लागू की गई बाजरे की खरीद की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया ही बोगस दिखाई दे रही है। क्योंकि जिन किसानों का रजिस्ट्रेशन रद हुआ था। उनके कागजात पूरे करने के बाद भी बाजरा नहीं खरीदा गया। उसके बाद कुछ किसानों की फसल खराब हो गई थी। उससे भी कुछ कमी आई है। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन के बाद भी किसान बाजरा बेचने के लिए क्यों नहीं आए यह सीधे तौर पर इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही है। चाहे रजिस्ट्रेशन करने वालों ने बोगस रजिस्ट्रेेशन किए हों या फिर घालमेल करने के चक्कर में यह कार्रवाई की गई हो। हालांकि किसानों को आंकड़ों के फेर में फंसा कर छोड़ दिया जाता है। यह मुद्दा 30 नवंबर को दिल्ली में होने वाली रैली में भी उठाया जाएगा और उसके बाद आंदोलन की रूप रेखा तैयार की जाएगी।
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अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन किसानों के साथ
झज्जर नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान चांद सिंह पहलवान ने कहा कि बाजरा खरीद के दौरान किसान अपने कागजात पूरे करने के बाद भी चक्कर काटते रहे। लेकिन उनका बाजरा नहीं खरीदा गया। शपथ पत्र व अन्य कागजात पूरे करने के बाद भी जिन किसानों का बाजरा नहीं खरीदा गया है, अगर किसानों के साथ अन्याय हुआ तो आढ़ती एसोसिएशन भी उनका साथ देगी।

करीब 800 किसानों के केस सरकार को भेजे गये थे। लेकिन अभी तक इस बारे में सरकार के आदेश का इंतजार है। जबकि 15 नवंबर को बाजरे की खरीद बंद हो चुकी है।
- शिखा, नोडल ऑफिसर, बाजरा खरीद।
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