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शहर में 51 और बौंदकलां में 45 फुट ऊंचे रावण के पुतले का हुआ दहन

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चरखी दादरी। जिले में शुक्रवार को दो जगहों पर रावण दहन किया गया। शहर में नगर परिषद के बैक साइड में रावण का 51 फुट ऊंचा पुतला जलाया गया। वहीं, बौंदकलां में 45 फुट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। श्री रामलीला कमेटी की तरफ से शहर के बस स्टैंड के पीछे खुले मैदान में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद का पुतला जलाया गया। इससे पहले शहर में श्रीराम की सेना ने विजयी यात्रा निकाली। रावण दहन के मौके पर सैकड़ों महिला और पुरूष मौजूद रहे। वहीं, सुरक्षा को देखकर पुलिस बल और दमकल विभाग की टीम भी जिला प्रशासन ने तैनात रखी। शहर में 1968 से श्री रामलीला कमेटी की तरफ से रामलीला का मंचन हर साल किया जाता रहा है। सन्-2003 से शहर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मैदान में रावण दहन किया जा रहा था लेकिन इस बार इस मैदान में बारिश से जलभराव होने पर बस स्टैंड के पीछे खाली मैदान में रावण दहन किया गया।
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रामलीला कमेटी के उपप्रधान रिंपी फौगाट ने बताया कि 1968 में पहली बार शहर के कीकरवासनी क्षेत्र में रावण दहन किया गया था। उसके बाद से लगातार यह सिलसिला जारी है। शुक्रवार शाम छह बजे सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद का पुतला जलाया गया। इससे पूर्व श्री रामलीला कमेटी के कलाकारों और सदस्यों ने शहर में श्रीराम की विजय यात्रा निकाली। यह विजयी यात्रा रामलीला स्थल से वाहनों के काफिलों के साथ रावण दहन स्थल पर पहुंची। इस विजयी यात्रा के दौरान राम की सेना हाथों में तीर और तरकश व बाण लिए हुए थी। पुतले जलाने से पूर्व मैदान परिसर में रावण व राम की सेना के बीच युद्ध दर्शाया गया। राम-रावण के बीच युद्ध हुआ। एक- दूसरे पर तीर चलाए गए। तत्पश्चात आतिशबाजी की गई। मुख्य अतिथि कांग्रेस प्रदेश कमेटी सचिव अजीत फौगाट की मौजूदगी में श्री रामलीला कमेटी पदाधिकारियों ने रावण का 51 फीट ऊंचा, कुंभकर्ण का 41 फीट और मेघनाद के 41 फीट ऊंचे पुतले को जलाया गया। पुतला जलाने के दौरान भगवान श्रीराम की विजय के नारे लगाए गए। सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से मौके पर पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस की ओर से विशेष निगरानी बरती गई। दमकल विभाग की गाड़ी भी मौके पर मौजूद रही। इस अवसर पर रामलीला कमेटी के पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।

बौंदकलां। बौंदकलां में विजयदशमी के अवसर पर शुक्रवार को दादरी रोहतक मुख्य मार्ग स्थित जहारवीर गोगापीर के मैदान में शाम सात बजे रावण के पुतले का दहन किया गया। इस दौरान संदेश दिया कि समाज व्याप्त में बुराइयों का अंत भी रावण के अंत की तरह ही होता है। बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता विजयदशमी पर्व धूमधाम से मनाया गया। रामलीला मंचन के अंतिम दिन शुक्रवार को श्रीराम की सेना का लंकापति रावण के बीच घमासान युद्ध हुआ। विभीषण के कहने पर श्रीराम रावण की नाभि में तीर मारकर रावण का अंत कर देते है। उसके बाद बुराई रूपी रावण को अग्रि दी गई। इससे पहले वीरवार रात रामलीला मंचन में मेघनाथ और लक्ष्मण के बीच में युद्ध हुआ जिसमें लक्ष्मण मेघनाथ को मौत की नींद सुला देता है। इसके बाद लक्ष्मण मेघनाथ का सिर काटकर श्रीराम के पास लेकर जाता है। मेघनाथ की पत्नी सुलोचना अपने पति मेघनाथ का सिर लेने के लिए श्रीराम से याचना करती है। रावण का पुत्र अही रावण श्रीराम और लक्ष्मण का हरण करके ले जाता है। पाताल लोक में रामदूत हनुमान और मकरध्वज में युद्ध होता है। हनुमान मकरध्वज को बंधी बना लेते हैं और इसके बाद हनुमान और अहिरावण में युद्ध होता है जिसमें अहिरावण मारा जाता है। इस अवसर पर सरपंच प्रतिनिधि बौंदकलां गोबिंद सिंह समेत समेत अनेक ग्रामीण उपस्थित थे।
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