फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

न नियमों का पालन, न पुलिस कार्रवाई और हवा को भी प्रदूषित कर रहे हैं डीजल आटो

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

बहादुरगढ़।
शहर में विभिन्न रूटों पर चलने वाले आटो न तो नियमों का पालन कर रहे हैं और न ही आटो चालकों के खिलाफ पुलिस किसी तरह की कार्रवाई करने में मूढ़ में है। इस बात का अंदाजा ट्रैफिक पुलिस की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के आधार पर लगाया जा सकता है। पिछले 10 दिनों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो केवल 10 ही चालान किए गए हैं। इस तरह ऑटो चालक नियमों की खूब धज्जियां उड़ा रहे हैं।
बहादुरगढ़ की सड़कों पर दौड़ने वाले ऑटो की कुल संख्या 700 है। इनमें से अधिकतर डीजल ऑटो हैं। जिनके पीछे कोई नंबर भी नहीं लिखा होता और न ही इनके पास कोई कागजात होते हैं। ड्राइविंग लाइसेंस तक इन चालकों के पास नहीं मिलता। ऐसे में ये अपनी जान तो जोखिम में डालते ही हैं। यात्रियों की जान भी खतरे में रहती है। खास बात यह है कि यह आटो मालिक कुछ पैसे के लालच में इंजन आयल तेल का प्रयोग करने के बजाय काले तेल (इंजन में जला हुआ आयल) का ज्यादा प्रयोग कर रहे हैं। यही कारण है कि डीजल ऑटो ज्यादा धुआं देता है और पर्यावरण को प्रदूषित हो रहा है।
विज्ञापन

10 दिनों में हुए 10 चालान
ट्रैफिक पुलिस की ओर से पिछले 10 दिनों में केवल 10 चालान ही किए गए हैं। इनमें से चार प्रदूषण के हैं तो चार विदआउट ड्राइविंग लाइसेंस के। इनके अलावा 2 ऑटो बिना कागजात के थे। जिन्हें ट्रैफिक पुलिस ने इंपाउंड किया है।
डीजल ऑटो पर नहीं कसा शिकंजा तो तेजी से होगा पर्यावरण खराब
शहर में वायु प्रदूषण का कारण बने डीजल ऑटो पर अगर जल्द शिकंजा नहीं कसा गया तो शहर का पर्यावरण और तेजी से खराब हो जाएगा। शहर में चल रहे सैकड़ों डीजल ऑटो के मालिक कुछ पैसे के लालच में ऐसा काम कर रहे हैं जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। शहर की सड़कों पर अक्सर देखा गया है कि कुछ आटो लगातार काला धुआं छोड़ते रहते हैं। हालात यह होते हैं कि उनके पीछे चलने वाले वाहन को आगे कुछ दिखता भी नहीं है।
क्या कहते हैं शहरवासी
नई बस्ती निवासी धर्मेंद्र कुमार का कहना है कि ऐसे बहुत ऑटो वाले हैं जो आयल तेल इंजन में डलवाने के बजाय, काला तेल का ज्यादा प्रयोग करते हैं। कई ऑटो वाले एक बार आयल तेल डालकर हजारों किलोमीटर तक प्रयोग करते हैं। ऐसे में इंजन धुआं ज्यादा देने लगते हैं। सेक्टर-6 निवासी भारत भूषण का कहना है कि कोई भी वाहन तभी ज्यादा धुआं देगा, जिसमें इंजन आयल खराब होगा और डीजल ऑटो में ज्यादा काले तेल का प्रयोग किया जा रहा होगा। इससे प्रदूषण भी फैलता है।
क्या कहते हैं आटो मिस्त्री
आटो मिस्त्री डालचंद का कहना है कि वे तो आटो चालकों को वाहन में नया आयल डालने की बात कहते हैं, लेकिन कई आटो चालक पैसे के लालच में काला तेल डलवाते हैं। इससे आटो के इंजन पर भी प्रभाव पड़ता है और वायु प्रदूषण भी होता है क्योंकि वह आटो ज्यादा धुआं छोड़ता है।
सांस की बीमारी का रहता है खतरा : डॉ. वीरेंद्र
नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वीरेंद्र का कहना है कि धुआं छोड़ने वाले वाहनों से सांस की बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है। लोगों को धुएं से बचना चाहिए। डीजल वाले वाहन धुआं ज्यादा छोड़ते हैं। आए दिन श्वास के रोगियों की संख्या भी बढ़ रही है।
विज्ञापन

ऑटो पर ढोते हैं बड़ा सामान
कई आटो चालक नियमों का पालन न करते हुए उस पर बड़ा सामान ढोते हैं जोकि दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। उनके खिलाफ भी पुलिस को सख्त रवैया अपनाना चाहिए।
क्या कहते हैं ट्रैफिक एसएचओ
ट्रैफिक पुलिस प्रभारी अशोक कुमार का कहना है कि उनका सबसे ज्यादा ध्यान प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर ही रहता है। उसमें चाहे ऑटो हो, ट्रक हो, टेंपो हो या कोई छोटी गाड़ी। उनके चालान किए जाते हैं। ऑटो चालकों के विरुद्ध भी सख्त रवैया अपनाया जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें