जिले में डिजिटल पशुगणना का कार्य अधर में
चरखी दादरी।
जिले में डिजिटल पशुगणना का मसला अब खटाई में पड़ता नजर आने लगा है। साढ़े तीन माह पूर्व कर्मचारियों को प्री ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है। 27 टीमों का गठन भी कर दिया गया था लेकिन अब तक डिजिटल पशुगणना शुरू करवाने के लिए सरकार से निर्देश नहीं मिले हैं। इससे विभाग अधिकारी भी दुविधा में पड़ गए हैं। ये पशुगणना 16 जुलाई से शुरू होकर 15 अक्तूबर तक पूरी होनी थी। गणना के तहत घर-घर जाकर पशुओं के आंकड़े लैपटॉप के जरिए ऑनलाइन अपडेट किए जाने हैं।
सभी प्रकार के पशुओं की संख्या के आधार पर ही विभाग प्लानिंग तैयार करता है। सभी सरकारी स्कीमों की प्लान संख्या के अनुसार ही तैयार की जाती हैं। इस प्लान के तहत पहले पशुओं का पूरा डाटा तैयार करना होता है ताकि उसी के अनुरूप नए पशु अस्पताल खोले जा सके तथा दवाओं की उपलब्धता में भी विस्तार हो सके। पशु चिकित्सकों की भर्ती भी पशु संख्या के अनुपात में ही की जाती है ताकि सभी पशुओं की बीमारियों पर भी साथ- साथ अंकुश लगाया जा सके। गणना के आधार पर दुधारू पशुओं के लिए विशेष बजट निर्धारित किया जा सके।
चरखी दादरी में इस समय गाय, भैंस, भेड़, बकरी, घोड़ा, बछड़े व कटड़ों समेत दो लाख 66 हजार 418 पशु हैं। आजकल पशुओं में नित नए रोगों को बढ़ावा मिल रहा है लेकिन पशु उपचार का दायरा न बढने की वजह से पशुपालकों को समय- समय पर काफी दिक्क्तें झेलनी पड़ रही हैं। पशु की हानि से पशुपालक को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। इन पशुओं की गणना होने पर उसी अनुपात में चिकित्सा संबंधी प्लान तैयार की जा सकेंगी।
इस बार पशुपालन विभाग डिजिटल पशु गणना करवाने की प्लानिंग में है। पशु गणना 16 जुलाई से शुरू होनी थी। यह गणना 15 अक्तूबर तक पूरी करने की प्लानिंग थी। इसके लिए वीएलडीए व चिकित्सकों की डयूटी भी लगाई गई थी। इन टीमों द्वारा घर-घर जाकर पशुओं की जानकारी जुटानी है तथा उसी समय लैपटॉप के जरिए डाटा को अॅानलाइन अपडेट किया जाया जाना है।
इस गणना के लिए 87 वीएलडीए चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई । यह चिकित्सक पूरी तरह से डिजिटल तकनीक से युक्त से होकर घरों में पहुंचेेंगे। उसी समय डॉटा को अपडेट किया जाना है। 27 सुपरवाइजर लगातार निगरानी रखेंगे ताकि गणना में किसी प्रकार की कोई परेशानी न आए। इससे पहले 2012 में पशु गणना हुई थी। यह पशु गणना भारत सरकार के निर्देशों पर की जा रही है। गणना के दौरान गाय, भैंस,कटड़ा, बछड़ा, मुर्गा, घोड़ा,भेड़, बकरी शामिल किए गए हैं। इनमें घरेलू व लावारिश पशु भी शामिल होंगे।
पशुगणना के लिए सुपरवाइजर भी लगाए गए, निगरानी समितियां भी गठित की गई लेकिन अब साढ़े तीन माह बीतने पर भी पशुगणना शुरू करने को लेकर कोई निर्देश नहीं मिलने से विभाग अधिकारी भी दुविधा की स्थिति में है। यहां तक पशुगणना के लिए ड्यूटीधारकों को प्री-ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है। विभागीय सर्कुलर के अनुसार 15 अक्तूबर तक यह गणना पूरी की जानी थी।
डिजिटल गणना के लिए टैब की मदद ली जानी है लेकिन अब तक यह टैब विभाग के पास नहीं पहुंचे हैं इस वजह से पशुगणना पर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। गणना के लिए टैब, प्रोफार्मा, स्टेशनरी का सामान व अन्य आवश्यक सुविधाओं की जरूरत है लेकिन कुछ सामान नहीं पहुंच पाया है। चिकित्सकों को केवल प्री-ट्रेनिंग जरूर दी गई है जबकि मेन ट्रेनिंग टैब मिलने के बाद पूरी होनी है।
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पशुगणना शुरू करवाए जाने को लेकर हैड ऑफिस से कोई निर्देश नहीं आए हैं। जैसे ही निर्देश मिलेंगे पशुगणना शुरू करवा दी जाएगी।
डॉ. जयपाल, उपनिदेशक पशुपालन विभाग