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40 किलोग्राम कपास खरीद पर आढ़ती किसानों को लगाते हैं 400 ग्राम का चूना: खेमका

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40 किलोग्राम कपास खरीद पर आढ़ती किसानों को लगाते हैं 400 ग्राम का चूना: खेमका
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चरखी दादरी नई अनाज मंडी का दौरा करने पहुंचे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी
किसानों ने रखी समस्याएं, जमीनी फरद पर तहसीलदार की बजाय पटवारी के हस्ताक्षर से ही किसान बेच पाएंगे फसल अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी डॉ. अशोक खेमका ने सोमवार को चरखी दादरी नई अनाज मंडी का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ डीसी विजय कुमार सिद्प्पा भी मौजूद थे। अनाज मंडी के निरीक्षण के दौरान दोनों आईएएस अधिकारियों के सामने करीब आधा दर्जन किसानों ने अपनी समस्याएं रखीं। इनमें सबसे प्रमुख तो कपास गांठ की खरीद पर आढ़तियों द्वारा 1800 ग्राम वजन काटना सबसे अहम रहा। सीनियर आईएएस अशोक खेमका ने अनाज मंडी प्रधान रामकुमार रिटोलिया से इसका कारण पूछता तो उन्होंने मार्केटिंग बोर्ड अधिकारियों के संज्ञान में यह बात होने का तर्क दिया। इस संबंध में जब खेमका ने मार्केटिंग बोर्ड सचिव सुमनलता से बात की तो उन्होंने ऐसी कोई गाइडलाइन अधिकारिक तौर पर जारी होने से किनारा कर लिया। प्रेसवार्ता के दौरान अशोक खेमका ने खुलासा किया कि 40 किलोग्राम कपास की गांठ पर आढ़ती मनमाने ढंग से करीब 400 ग्राम तक की हेराफेरी किसानों के साथ कर रहे हैं। उन्होंने अनाज मंडी प्रधान को भविष्य में कपास डालने के लिए प्रयोग कपड़े का अलग से वजन करने के निर्देश भी दिए। जानकारी के अनुसार सीनियर आईएएस अशोक खेमका सोमवार सुबह करीब साढ़े दस बजे नई अनाज मंडी स्थित किसान रेस्ट हाउस पहुंचे। यहां पहुंचकर सबसे पहले उन्होंने मार्केटिंग बोर्ड अधिकारियों की बैठक ली। इस दौरान उन्होंने ई-टेंडरिंग से लेकर फसल खरीद के बाद होने वाले भुगतान संबंधी पूछताछ अधिकारियों से की। जब उन्होंने मंडी सुपरवाइजर रामकिशन से कमीशन एजेंट और ट्रेडर में अंतर पूछा तो वो उन्होंने इसका गलत जवाब दे दिया। इस पर खेमका ने मंडी सुपरवाइजर को फटकार लगाते हुए कहा कि आपको नहीं पता तो साफ-साफ बोल दो, गलत जवाब देकर गुमराह भी क्यों कर रहे हो। इसके बाद उन्होंने मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों से प्रदेशभर में नियुक्त किए गए कमीशन एजेंट व ट्रेडर का डाटा पूछा तो वो तमाम अधिकारी बंगले झांकने लगे।
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इस पर खेमका ने उन्हें खुद इस प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि प्रदेश में 25000 कमीशन एजेंट हैं जबकि 500 खरीददार हैं। इसके बाद डीसी विजय कुमार सिद्प्पा, एसडीएम ओमप्रकाश देवराला, डीआरओ राजकुमार अरोड़ा, मार्केटिंग बोर्ड सचिव व समस्त स्टाफ सहित उन्होंने अनाज मंडी का निरीक्षण कर फसल खरीद का भी जायजा लिया। इस दौरान एक किसान ने उन्हें फसल बेचने में आ रही परेशानियों की जानकारी दी। उक्त किसान ने बताया कि उसने जमीन ठेके पर ली है और जमीन मालिक फसल बेचने के लिए फरद देने से इंकार कर रहा है जबकि बिना फरद के मंडी में फसल की खरीद नहीं की जा रही। उक्त किसान ने फरियाद लगाते हुए कहा कि फरद मिलने के बावजूद उन पर पटवारी और तहसीलदार से हस्ताक्षर करवाकर लाने की शर्त किसानों पर थोप रखी है, इससे किसानों को बेहद परेशानियां हो रही हैं। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए खेमका ने मौके पर ही मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगर जमीनी फरद पर पटवारी के हस्ताक्षर है तो भी किसान की फसल को खरीदा जाए। इसके बाद अशोक खेमका ने तमाम प्रशासनिक अमले सहित मार्केटिंग बोर्ड कार्यालय पहुंचकर रिकॉर्ड की भी जांच की।
किसानों का 100 ग्राम लेकर कौन-सा धनवान बन जाओगे आप लोग
जब अशोक खेमका के सामने किसानों ने आढ़तियों द्वारा कपास की गांठ खरीद पर 1800 ग्राम वजन काटने की बात कही तो उन्होंने मौके पर मौजूद अनाज मंडी प्रधान रामकुमार रिटोलिया से इस संबंध में बात की। मंडी प्रधान ने कहा कि हरियाणा आढ़ती एसोसिएशन ने यह नियम पूरे प्रदेश में लागू कर रखा है और एक गांठ की खरीद पर 100 ग्राम तक का अधिकतम फर्क आता है। इस तर्क को सुनने के बाद अशोक खेमका ने कहा कि आप लोग किसानों की 100 ग्राम कपास लेकर कौन-सा धनवान बन जाओगे।
2850 क्विंटल कपास खरीदी गई एमएसपी से कम
डॉ. अशोक खेमका ने अनाज मंडी का निरीक्षण करने के बाद पत्रकार वार्ता को भी संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि चरखी दादरी जिले के किसानों ने एक अक्तूबर से पहले ही एमएसपी से कम दामों में अपने बाजरे की फसल बेच दी। उन्होंने बताया कि जिले के 92 किसानों ने करीब 2850 क्विंटल बाजरे की फसल बेची है और यह मामला उनके संज्ञान में आया था। उन्होंने बताया कि एमएसपी और जिस मूल्य में किसानों ने फसल बेची है उस अंतर की रिकवरी कराने के लिए वो सरकार को पत्र भी लिखेंगे और इसी मकसद से वो चरखी दादरी आए हैं।
प्रदेश में फसल खरीद का मांगा एक साल का पूरा ब्यौरा
डॉ. अशोक खेमका ने मार्केटिंग बोर्ड की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए ऑन लाइन खरीद-फरोख्त व्यवस्था की पूरी जानकारी हासिल की। इस दौरान कुछेक बिंदओं से वो असंतुष्ट नजर आए। इन खामियों पर संज्ञान लेते हुए खेमका ने हरियाणा प्रदेश की मंडियों में पिछले एक वर्ष में हुई फसलों की खरीद संबंधी सारा डाटा भी मार्केटिंग बोर्ड से तलब कर लिया। उन्होंने किसानों की जनरेट की गई आईडी, बाइंडिंग (बिलिंग), ढेरी की बोलियों की संख सहित अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी हैं।
बाक्स: पोर्टल का सहारा लेकर भारत सरकार को लगा रहे करोड़ों की चपत
डॉ अशोक खेमका ने ऑन लाइन व्यवस्था का जायजा लेने के बाद पत्रकारों से भी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि ई-नेम पोर्टल ही किसानों और खरीददारों के बीच कमिशन एजेंट का काम करता है। मार्केटिंग बोर्ड से प्राप्त फसल की गुणवत्ता का सर्टिफिकेट ऑल इंडिया में मान्य हैं। उन्होंने बताया कि बावजूद इसके पोर्टल का सराहा लेकर कंस्लटेंट ने कमिशन एजेंट के नाम पर करोड़ों रुपये की कमाई की गई है जबकि यह काम तो एनएएम (नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट) कर रही है। उन्होंने बताया कि हरियाणा में कमिशन एजेंसी करीब 4000 प्रतिवर्ष कमिशन ले रही है जबकि पंजाब में यह आंकड़ा छह हजार के पार है।
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वर्जन::
मेरे संज्ञान में मामले आया था कि चरखी दादरी जिले के 92 किसानों ने 2850 क्विंटल बाजरे की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम में बेची है। इसकी जानकारी मैंने ले ली है। इस संबंध में सरकार को पत्र लिखूंगा ताकि किसानों के नुकसान की भरपाई की जा सके।
डॉ. अशोक खेमका, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग
फोटो 01
मार्केटिंग बोर्ड अधिकारियों से ब्यौरा लेते अशोक खेमका व डीसी विजय कुमार सिद्प्पा।
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चरखी दादरी की नई अनाज मंडी में फसल खरीद का जायजा लेते अशोक खेमका।
फोटो 03
बाजरे की गुणवत्ता जांचते आईएएस अशोक खेमका।
फोटो 04
साह्ब मेरी परेशानी भी दूर करवाओं.....मंडी के निरीक्षण के दौरान अशोक खेमका को हाथ जोड़कर अपनी समस्या से अवगत करवाता शख्स।
फोटो 05
मार्केट कमेटी बोर्ड की लैब में रखे सैंपलों की जांच करते हुए अशोक खेमका।
फोटो 06
अनाज मंडी में पहुंचे बाजरे को खाकर देखते अशोक खेमका।
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