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ब्लू व्हेल गेम : कई स्कूलों में मोबाइल प्रतिबंधित, बच्चों को दूर रखने के प्रयास

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अमर उजाला ब्यूरो
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झज्जर।
ब्लू व्हेल गेम की चपेट में सबसे अधिक विद्यार्थी वर्ग ही आ रहा है, ऐसे में जिले के स्कूल संचालकों ने विद्यार्थियों को इस खौफनाक और जानलेवा मोबाइल गेम से बचाने के लिए कमर कस ली है। कई स्कूलों में मोबाइल पहले से प्रतिबंधित हैं तो कई स्कूलों ने अब प्रतिबंधित कर दिए हैं। कई स्कूलों में खुद प्रिंसिपल इस अभियान की कमान संभाले हुए हैं। कहीं प्रात: कालीन प्रार्थना सभा में तो कहीं अध्यापकों के माध्यम से बच्चों को इस गेम के प्रति जागरूक करने की कोशिश की जा रही है।

स्कूल में बच्चों के लिए पहले से ही मोबाइल प्रतिबंधित है। इसके अलावा स्कूल टाइम में अध्यापकों को भी मोबाइल प्रयोग की इजाजत नहीं है। ब्लू व्हेल गेम के बारे में बच्चों से पता करने का प्रयास किया जा रहा है। अगर किसी बच्चे से इस प्रकार की कोई जानकारी मिली तो उसके अभिभावकों से बातचीत कर समस्या का समाधान किया जाएगा।
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- नविंद्र, निदेशक, द हाइट स्कूल, खुडन।

ब्लू वहेल गेम के प्रति बच्चों को जागरूक करने तथा बच्चे इसका बिल्कुल भी प्रयोग न करें, इसके लिए लगातार प्रार्थना के समय और कक्षा में अध्यापक बच्चों को जागरूक करते हैं। उन्होंने कहा कि वे रोजाना अध्यापकों से भी रिपोर्ट लेते हैं कि बच्चों को जरूर बताएं कि इस तरह की गेम को कभी भी प्रयोग न करे।
- मनोज भारद्वाज, निदेशक, न्यूटन स्कूल झज्जर।

कॉलेज छात्रों को समझाते हैं
हमें अपने बच्चों को इस खेल को न खेलने और इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना होगा। साथ ही अभिभावकों की भी ये जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों का ध्यान रखें कि वे इंटरनेट का सही तरीके से उपयोग करें। इस खेल के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। हम अपने कालेज के छात्राओं को भी किशोरों व बालकों को इस गेम से दूर रखने के लिए कह रहे हैं। युवा इस गेम को खेलने वालों पर अच्छी तरह नजर रख सकते हैं। युवाओं की बात को बच्चे और किशोर महत्व देते हैं।
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- डॉ. मनोज भारद्वाज, सहायक प्राध्यापक, राजकीय महाविद्यालय बहादुरगढ़।

भयभीत होने की जरूरत नहीं
ब्लू व्हेल गेम के कारण भयभीत होने की जरूरत नहीं है। इससे किसी तरह का खौफ नहीं होना चाहिए। बच्चों को समझाकर जागरूक करने की जरूरत है। इस जाल को सिर्फ मजबूत मानसिक शक्ति से तोड़ा जा सकता है। किशोरों को संयम रखना चाहिए और जागरूक रहना चाहिए। इससे वे इस तरह के बेकार गेम से खुद ही दूर रहेंगे। गलत दिशाओं में ले जाने वाले गेम को सिर्फ गेम की तरह ही लेना चाहिए। ऐसा करेंगे तो किशोर और नवयुवक अपने आपको सुरक्षित व मजबूत महसूस करेंगे। अभिभावकों को बच्चों से दूरी बनाकर नहीं रखनी चाहिए। बच्चा कुछ संदिग्ध नजर आए तो मनोविज्ञान विशेषज्ञ को दिखाएं।
- उषा कुमारी, सहायक प्रोफेसर, अंग्रेजी, राजकीय महाविद्यालय छारा।



- सुबह की प्रार्थना सभा में भी बच्चों को किया जा रहा जागरूक
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