अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
कागजी हरियाली से बचने के लिए वन विभाग ने इस बार नया फार्मूला निकाला है। जिसके तहत अब पांच फुट की ऊंचाई वाले पौधे लगाएं जाएंगे। जिनके पेड़ बनने की सुनिश्चितता सौ फीसदी रहेगी। विभाग के द्वारा पूर्व में छोटे पौधे लगाए जाते थे, जो पेड़ ही नहीं बन पाते थे। वहीं, विभाग के द्वारा इस साल पौधे लगाने का टारगेट भी पिछले दो सालों की अपेक्षा एक तिहाई कर दिया है। जिसके चलते अब थोक के भाव में पौधे लगाए और बांटे नहीं जाएंगे। विभाग के द्वारा सेल और फ्री बांटे जाने वाले पौधों में भी करीब दो लाख की कटौती की है। जिसके चलते अब पूरा ध्यान पौधे लगाकर उनकी ग्रोथ से पेड़ बनाने पर रहेगा। विभाग के अधिकारियों ने यह फैसला पिछले कुछ सालों में पौधों की डैमेज रिपोर्ट के आधार पर लिया है।
एक पौधे पर होता है 18 रुपये का खर्च
वन विभाग के द्वारा एक पौधे के नर्सरी में तैयार करने से लेकर पेड़ बनाने तक 18 रुपये का खर्च माना जाता है। जिसमें नर्सरी की तैयारी पर आठ रुपये तथा गड्ढा खुदाई व पानी के पर करीब 10 रुपये की अनुमानित लागत मानी जाती है। वन विभाग के द्वारा पिछले वर्ष एक लाख 88 हजार 400 पौधे लगाए गए थे। जिन पर अब तक 33 लाख 91 हजार 200 रुपये का खर्च आया है। विभाग के द्वारा सेल किए गए और फ्री दिए गए पौधों पर कोई अनुदान नहीं दिया जाता।
इन प्रजातियों के पौधे लगाएगा वन विभाग
विभाग की नर्सरी में इस समय तीन लाख बड़े पांच फुट वाले पौधे तथा पांच लाख छोटे पौधे तैयार हैं। जिनमें नीम, सीरस, अमलताश, अर्जुन, बकायन, गुल्लर, जामुन, लेसवा, पापड़ी, पिलखन व शीशम शामिल हैं। विभाग के द्वारा इस बार स्टेट स्किम में दो लाख पौधे पंचायत जमीन, स्कूल-कालेज, संस्थान, सड़क, नहर व ड्रेन के किनारे लगाए जाएंगे। वहीं एक लाख पौधे फ्री व एक रुपये के रेट पर सेल किए जाएंगे। वहीं कैम्पा स्किम के तहत करीब 50 हजार पौधे फारेस्ट एरिया में लगेंगे। इसके अलावा जस्सौर खेड़ी को हरियाली स्किम के तहत छह हजार पौधे लगाए जाएंगे।
पूर्व में लगे हैं इतने पौधे
साल पौधे लगाए
2015-16 7 लाख 3 हजार
2016-17 5 लाख 34 हजार
2017-18 3 लाख 56 हजार (टारगेट)
पानी की कमी से सूख जाते हैं पौधे
वन विभाग के द्वारा हर साल लाखों पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन इनमें से काफी पेड़ नहीं पाते। इसके पीछे खास वजह यह है कि वन विभाग के द्वारा तीन माह में केवल एक बार पानी का पैसा ही स्वीकृत किया गया है। गर्मी के मौसम में जब पौधों को पानी की ज्यादा आवश्यकता होती है लेकिन विभाग के द्वारा फंड नहीं दिए जाने के चलते इनमें पानी नहीं दिया जाता। वहीं हुडा विभाग के द्वारा पौधों में पानी देने के लिए हर 15 दिन बाद का बिल पास किया जाता है। जिसके चलते हुडा विभाग के द्वारा लगाए गए पौधे ज्यादा कामयाब होते हैं।
पराली के साथ किसानों ने भी खूब फूंके पौधे
धान की पराली जलाने वाले किसानों ने इस साल हाईवे व सड़कों के किनारे लगे पौधों को खूब नुकसान पहुंचाया गया। जिले में वन विभाग के द्वारा 32 जगहों पर आग से पौधे नष्ट किए जाने की रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी है। जिसमें किसानों से जुर्माना वसूलने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं, चार स्थानों पर ज्यादा नुकसान होने के चलते वन विभाग के द्वारा एफआईआर भी दर्ज करवाई है।
वर्जन
विभाग के द्वारा हरियाली स्किम का इस बार टारगेट कम किया गया है। विभाग का जोर अब पौधों को पेड़ बनाने पर है। विभाग के द्वारा इस बार हर पौधे की मॉनिटरिंग की जाएगी। उनका प्रयास है कि इस बार प्लांटेशन सफल रहे। विभाग के द्वारा पौधारोपण अभियान जल्द ही चालू किया जाएगा।
- संदीप, डीएफओ, झज्जर।
- अभियान की सफलता के लिए अब लगेंगे 5 फीट ऊंचाई वाले पौधे
- हाईवे किनारे किसानों ने जला दिए सैकड़ों पौधे, चार पर एफआईआर