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कर्मों के अनुसार मानव को भोगने पड़ते हैं सुख और दुख: रामशरणदास

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चरखी दादरी। शहर के हनुमान बगीची स्थित कीकरवासनी हनुमान मंदिर से मंगलवार को श्री रामायण की शोभा यात्रा निकाली गई। मंदिर में दोपहर बाद श्री राम कथा का आयोजन किया गया। वृंदावन से पधारे स्वामी रामशरणदास प्रज्ञा चक्षु ने कथा वाचन किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जीवन में नियम का होना अति आवश्यक है। जिनके जीवन का कोई नियम नहीं होता उनको जीवन भर भटकना पड़ता है। जीवन के अच्छे कर्मों को यज्ञ कहा गया है।
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कथा प्रसंग में यज्ञ के महत्व को बताते हुए रामशरणदास महाराज ने बताया कि जब जीवन में यज्ञ समाप्त को जाता है तो जीव का तेज और बल दोनों ही समाप्त हो जाते हैं। कथा में भगवान राम के स्वरूप की आरती उतारी गई। उन्होंने कहा कि निष्काम भाव से ईश्वर को याद करना चाहिए। इससे संसार रूपी भवसागर से पार होने का मार्ग मिल जाता है। मंगलवार की कथा में उन्होंने श्रीराम के अन्य प्रसंगों की सरल व्याख्या की। कर्मों के आधार पर व्यक्ति के वर्तमान व भविष्य का निर्धारण होता है। संचित कर्मों के अनुसार जीव को सुख और दुख भोगने पड़ते है। संसार में कुछ भी अकारण नहीं है। स्वयं भगवान ने भी कर्म विधान व सृष्टि के नियमों की पालना करने के लिए त्रेतायुग में श्रीराम के रूप में अवतार लिया। उन्होंने कहा कि भगवान राम को भी वन में भटकना पड़ा। कर्मों के अनुसार जीव सुख व दुख भोगता है लेकिन भक्ति, विवेक, ज्ञान मार्ग पर चलने से जीवन आनंदमय हो जाता है। उन्होंने कहा कि निष्काम कर्म भावना के चलते मनुष्य के लिए सुख, दुख, राग, द्वेष, मोह, माया, ममता, अशक्ति का कोई अर्थ नहीं रह जाता। यही जीव की मुक्ति का मार्ग है। शाम के समय कथा का सामपन हुआ और इसमें पुराना शहर क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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