अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। शिक्षा बोर्ड के आदेशानुसार जनवरी माह में ली गई प्री-बोर्ड परीक्षा का जिले में परिणाम बेहद खराब रहा। इसे देखते हुए शिक्षा विभाग ने एक और नया फरमान जारी किया है। इसके तहत अब विभाग ने मार्च की बोर्ड परीक्षाओं तक सुबह-शाम ढाई घंटे अतिरिक्त कक्षाएं लगाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इस संबंध में शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक शैक्षणिक पंचकूला की ओर से पत्र जारी किया गया है।
शिक्षा बोर्ड की ओर से जनवरी माह में बोर्ड कक्षाओं की प्री-बोर्ड परीक्षाएं आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में बोर्ड की ओर से प्रश्र पत्र जारी किया गया था। पाठ्यक्रम के अनुरूप यह परीक्षा ली गई थी। बाद में शिक्षा विभाग की ओर से इस परीक्षा परिणाम का विश्लेषण किया गया। विश्लेषण में परीक्षा परिणाम बेहद खराब पाया गया। जनवरी माह में परीक्षा के बाद सभी स्कूल मुखियाओं की ओर से विभाग के पोर्टल पर यह परीक्षा परिणाम अपलोड किया गया था। इसके बाद निदेशालय की ओर से परिणाम का बारीकी से विश्लेषण किया गया। खराब परिणाम को देखते हुए शिक्षा विभाग निदेशालय ने बच्चों को प्रतिदिन ढाई घंटे अतिरिक्त समय में पढ़ाए जाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सुबह साढ़े आठ से दस बजे व सांय के समय तीन से चार बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। इस समय राजकीय स्कूलों का रूटीन का समय सुबह नौ से साढ़े तीन बजे तक का ही है। डीईओ कार्यालय में पहुंचे इस पत्र को सूचनार्थ सभी संबंधित राजकीय स्कूलों में भेजा गया है ताकि इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जा सके क्योंकि परीक्षा नजदीक आ चुकी हैं। बोर्ड परीक्षाएं मार्च प्रथम सप्ताह में शुरू होने जा रही हैं।
परिणाम में पिछड़े बच्चों के बनाए जाएंगे समूह
पत्र में यह भी निर्देश दिए गए हैं जिन बच्चों का अधिगम स्तर कम है उन्हें गु्रप में बांटकर शिक्षण करवाया जाए ताकि उन पर विशेष फोकस हो सके और उनके परिणाम में सुधार सके। यह भी गाइडलाइन दी गई है कि शिक्षा बोर्ड ने गत तीन सालों के बोर्ड परीक्षाओं के प्रश्नपत्र साइट पर अपलोड कर रखे हैं ऐसे में इन प्रश्न पत्रों से बच्चों का अभ्यास करवाया जाए। विषय शिक्षण, समझ, ज्ञानवर्धक व अभ्यास पर ज्यादा बल दिए जाने की बात कही गई है।
सेवानिवृत्त शिक्षकों की ले सकते हैं मदद
यह भी निर्देश है कि अगर किसी स्कूल में अंग्रेजी, गणित व विज्ञान विषयों के शिक्षक नहीं है तो समीप के विद्यालयों से व्यवस्था की जाए अगर फिर भी व्यवस्था नहीं बन पाती है तो सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं ली जा सकती हैैं ताकि बोर्ड परीक्षाओं से पहले पाठ्यक्रम का ठीक प्रकार से रिविजन हो सके और परिणाम में सुधार आए।
शिक्षा निदेशालय की ओर से इस आशय का पत्र मिल चुका है। निदेशालय के आदेशों की पालना करते हुए इसकी सूचना बीईओ के माध्यम से सभी स्कूलों में भिजवा दी गई है ताकि इस पर तेजी से काम शुरू हो सके। शिक्षक को चाहिए वे सेवा एवं समर्पण भाव से बच्चों से मेहनत करवाएं ताकि जिले का परिणाम इस बार भी राज्य में टॉप करे।
कुलदीप फौगाट, डिप्टी डीईओ