अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
शहर के रोहतक रेलवे फाटक पर प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज निर्माण की फाइल एक साल बाद भी आगे नहीं बढ़ पाई है जबकि रेलवे बोर्ड व पीडब्ल्यूडी दोनों ही विभागों के अधिकारियों का मानना है इस फाटक की टीवीयू (ट्रेन व्हीकल यूनिट) आरओबी बनने की शर्तें पूरी करती हैं। इस समय इस फाटक की टीवीयू 3.41 लाख है जबकि आरओबी निर्माण के लिए कम से कम एक लाख टीवीयू होनी चाहिए। अब इस रेलवे लाइन के दोहरीकरण का काम भी चल रहा है अगर जल्द ही इस आरओबी का निर्माण नहीं हुआ तो जाम से हालात और बदतर हो जाएंगे। पीडब्ल्यूडी विभाग ने 37 करोड़ का प्रपोजल सरकार को भेज रखा है। यह रेलवे फाटक चरखी-नारनौल-चंडीगढ़-दिल्ली प्रमुख सड़क मार्ग पर स्थित है।
कांग्रेस सरकार के शासनकाल में भी इस आरओबी का प्रपोजल तैयार किया गया था लेकिन बाद में यह प्रोजेक्ट खटाई में पड़ गया था। अब विभाग ने दोबारा इस आरओबी प्रोजेक्ट का प्रपोजल तैयार कर सरकार को जुलाई 2017 में भेजा था। शहर की रोहतक रेलवे फाटक से से नारनौल, महेंद्रगढ़ , झज्जर, दिल्ली, बहादुरगढ़ व चंडीगढ़ को जाने वाले छोटे व भारी वाहन गुजरते हैं। इस वजह से यहां जाम की स्थिति बनी रहती है। इस रेलमार्ग पर अब ट्रेनों का आवागमन भी और बढ़ जाएगा। इस रेलमार्ग का रेवाड़ी से हिसार तक दोहरीकरण किया जा रहा है। डबल लाइन होने पर सवारी व मालगाड़ी दोनो ही प्रकार की रेल गाड़ियों की संख्या में बढ़ोतरी हो जाएगी जिससे यह फाटक अक्सर बंद ही रहेगी जिससे जाम की समस्या का गहराना स्वाभाविक है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने इस आरओबी निर्माण का प्रपोजल तैयार कर हैड अॅाफिस भेज रखा है। फाटक के दोनो ओर 200-200 मीटर लंबाई में आरओबी बनाए जाने का प्रस्ताव है। अब एक साल बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ पाई है। आए दिन वाहनों की संख्या में इजाफा हो रहा है। खासकर चार पहिया वाहनों की संख्या में ज्यादा बढ़ोतरी हो रही है। अब रेलवे विभाग भी इस लाइन को दोहरा रूप देने जा रही है जिस पर तेजी से काम चल रहा है। डबल लाइन बनते ही यहां फाटक पर जाम से हालात और खराब हो जाएंगे।
इस लिए बनना जरूरी आरओबी
रेलवे बोर्ड व पीडब्ल्यूडी दोनो ही विभागों के अधिकारी मानते हैं कि इस फाटक की टीवीयू आरओबी बनने की शर्तें पूरी करता है। इस फाटक की इस समय टीवीयू 3.41 लाख है जबकि आरओबी बनने के लिए एक लाख टीवीयू का होना ही जरूरी है। टीवीयू के तहत फाटक से गुजरने वाले वाहनों की संख्या के साथ- साथ फाटक से गुजरने वाली ट्रेनों की संख्या को भी देखा जाता है।
राज्य सरकार के प्रपोजल से सिरे चढ़ेगी बात
रेलवे बोर्ड के उच्चाधिकारियों का कहना है इस प्रकार के प्रोजेक्ट के लिए पहले राज्य सरकार को ही प्रपोजल करना होता है। राज्य सरकार को ही रेलवे बोर्ड को प्रपोजल भेजना होता है उसके बाद रेेेलवे बोर्ड उस पर विचार करता है। रेलवे अधिकारियों का तर्क है कि आरओबी के दोनों तरफ का निर्माण तो राज्य सरकार को ही करना होता है जबकि रेलवे तो रेलवे ट्रैक की जगह का ही खर्च वहन करती है।
विभाग ने जुलाई 2017 में सरकार को आरओबी निर्माण का प्रपोजल तैयार कर भेज दिया था। अब सरकार को ही इस संबंध में अंतिम फैसला लेना है।
एसपी सिंगला, एसई पीडब्ल्यूडी
रेलवे बोर्ड तब प्रपोजल करता है जब राज्य सरकार रिक्वायरमेंट भेजती है। इस फाटक की 3.41 लाख टीवीयू है तो यहां आरओबी बनना डिजर्व करता है लेकिन इसके लिए पहले राज्य सरकार को प्रपोजल तैयार कर रेलवे बोर्ड को भेजना होगा तभी यह संभव हो पाएगा क्योंकि रेलवे बोर्ड तो केवल रेलवे ट्रैैक का ही खर्च वहन करती है।
अविनाश, सेक्शन इंजीनियर, रेलवे बोर्ड,