नप के बेड़े में 100 रेहड़ियां और दो टीपर शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
वार्डों की तंग गलियों से कूड़े का उठान कर डंपिंग प्वाइंट तक पहुंचाने में अब नगर परिषद के कर्मचारियों को परेशानियां नहीं होगी। नप अधिकारियों ने वार्डों से कूड़ा उठान के लिए नई 100 रेहड़ियां खरीद ली हैं। ये रेहड़ियां अगले सप्ताह नगर परिषद में पहुंच जाएंगी और इनके वर्क ऑर्डर पिछले सप्ताह ही जारी हो चुके हैं। इसके अलावा नगर परिषद बेड़े में दो नए टीपर (टाटा एस) शामिल होने से अब इनकी संख्या पांच हो गई हैं। इन दोनों नए टीपरों को वार्ड में कूड़ा उठान कार्य में लगा दिया गया है। अब पांच टीपर पूरे शहर कवर कर रहे हैं। वार्डों की तंग गलियों से कूड़े का उठान नहीं होने से आमजन को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ रही थीं लेकिन रेहड़ियां खरीदने से अब इस समस्या का भी समाधान हो जाएगा। नई रेहड़ियां खरीदने की प्लानिंग करीब डेढ़ साल पहले तैयार हुई थी। करीब एक साल पहले एक दफा यह कांट्रेक्ट सिरे नहीं चढ़ने से रद्द किया जा चुका है। इस बार यह प्लानिंग सिरे चढ़ चुकी है।
नगर परिषद के बेड़े में अब संसाधनों और कर्मचारियों का धीरे-धीरे विस्तार होता नजर आ रहा है। गत दिनों ही डीसी की अनुमति लेकर नगर परिषद ने 40 कर्मचारी भर्ती किए थे। करीब दो माह पहले आयोजित हाउस की बैठक में कूड़ा उठान के लिए नई रेहड़ियां खरीदने का प्रस्ताव सर्वसहमति से पास किया गया था। इसके बाद नप अधिकारियों ने इसके एस्टीमेट तैयार कर आगामी प्रक्रिया पूरी कर टेंडर लगाने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति ली थी। पहली दफा में ही इस बार टेंडर प्रक्रिया सिरे चढ़ गई और एक ठेकेदार के साथ रेहड़ियां मंगाने का कांट्रेक्ट नप अधिकारियों ने कर लिया है। वहीं, नप अधिकारियों का कहना है कि पार्षदों की रेहड़ियों खरीदने की मांग काफी पुरानी थी और बेड़े में रेहड़ियां न होने से कूड़ा उठाने में भी परेशानियां आ रही थी। नप सूत्रों की मानें तो जल्द ही अधिकारी रिक्शा रेहड़ी भी खरीदने की प्लानिंग तैयार कर सकते हैं। रिक्शा रेहड़ियों से वार्डों का कूड़ा डंपिंग प्वाइंट तक डालने में आसानी रहेगी।
सेनेटरी इंस्पेक्टर विजय शर्मा का कहना है कि शहर में इस समय पांच टीपरों के जरिए डोर-टू-डोर जाकर कूड़ा उठान का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा पांच ट्रैक्टर-ट्राली भी शहर के डंपिंग प्वाइंट से कूड़े का उठान करने के लिए बेड़े में शामिल हैं। आला अधिकारियों के निर्देशानुसार ही नई रेहड़ियों के वितरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस गिनी-चुनी रेहड़ियां ही नगर परिषद के पास हैं और वो भी कंडम हाल में हैं।
करीब पांच हजार आएगी एक रेहड़ी पर लागत
नगर परिषद अधिकारियों ने जो टेंडर लगाए थे उनके अनुसार एक रेहड़ी की खरीद पर 4700 से 4900 रुपये लागत आने की संभावना है। वहीं, नप सूत्रों की मानें तो इन रेट में ही कांट्रेक्ट सिरे चढ़ा है। वहीं, नप अधिकारियों का कहना है गलियों से कूड़ा उठाकर रेहड़ियों में डालने तक के संसाधन कर्मचारियों को मुहैया करवाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि एक रेहड़ी पर अधिकतम पांच हजार रुपये तक की लागत आने की संभावना है।
सफाई व्यवस्था के लिए ये हैं नप के पास संसाधन
नगर परिषद के बेड़े में इस समय 61 पक्के और 92 कच्चे सफाई कर्मचारी हैं। इनके अलावा 40 कर्मचारी गत दिनों डीसी रेट पर भर्ती किए हैं। वहीं वार्डों से कूड़ा उठान पांच टीपर व एक थ्री-व्हीलर के जरिए किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पांच ट्रैक्टर-ट्राली शहर के अंदरूनी भागों में बने अस्थाई डंपिंग प्वाइंट से कूड़ा उठाने के लिए नप के पास मौजूद हैं जबकि एक लोडर कूड़े को समतल करने के लिए है। सेनेटरी इंस्पेक्टर ने बताया कि सफाई कर्मियों पर निगरानी रखने के लिए चार सफाई दरोगा भी नियुक्त किए गए हैं।
एक साल पहले पूरा नहीं कर पाया था ठेकेदार आर्डर
करीब एक साल पहले भी अधिकारियों ने रेहड़ियां खरीदने का प्रयास किया था। उस समय टेंडर प्रक्रिया से लेकर कांट्रेक्ट तक फाइनल हो गया था। उस दौरान हायर किया गया ठेकेदार आर्डर देने में नाकामयाब रहा और इसके चलते अधिकारियों ने ऑर्डर कैंसिल करना पड़ा था। सेनेटरी इंस्पेक्टर विजय शर्मा ने बताया कि नए सिरे से यह कांट्रेक्ट किया गया है और अगले सप्ताह तक रेहड़ियों की खेप नप कार्यालय में पहुंच जाएगी।
तंग गलियों से कूड़े का होगा उठान, परेशानियां होंगी कम
तंग गली होने के कारण नगर परिषद की गाड़ी गली में नहीं आती है। जिसके कारण अपने स्तर पर कूड़ा डालना पड़ रहा है। नगर परिषद अधिकारी भी इस
समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहे है। - रणजीत, ओबीसी बैक वाली गली
कूड़ा डालने के लिए काफी दूर तक जाना पड़ता है। नगर परिषद के कर्मचारी गाड़ी लेकर गली में नहीं आते है। अगर सफाई कर्मचारी कूड़ा लेने आ जाए तो लोगों को काफी फायदा होगा। - विजय, रोहतक चौक
कूड़े का उठान न होने के कारण काफी दिनों तक कूड़ा पड़ा रहता है। अपने स्तर पर कूड़ा डालना पड़ता है। तंग गली होने के कारण सफाई कर्मचारी गाड़ी
लाने के लिए मना कर देते है। - प्रेमनाथ, पुराना डाकखाना
तंग गली में रहने के कारण कूड़ा उठान नहीं हो पाता है। कूडे़ की समस्या से काफी परेशानी उठानी पड़ती है। नगर परिषद के अधिकारियों को लोगों के लिए
दूसरा विकल्प कर देना चाहिए। - अजय, वार्ड 15
फोटो 30 ओबीसी बैक वाली तंग गली जहां कूड़े वाली गाड़ी नहीं जाती।
फोटो 31 पुराने डाकखाने स्थित तंग गली।
फोटो 32 नगर परिषद के बैक में जलता कूड़े का ढेर।
फोटो 33 तंग गली का फोटो।
फोटो 34 रणजीत।
फोटो 35 विजय।
फोटो 36 प्रेमनाथ।
फोटो 37 अजय।