पहाड़ों की बारिश: नहरोें के आखिरी छोर तक 39 साल बाद पहुंचा पानी
जगबीर शर्मा
चरखी दादरी।
इस बार किसानों को मानसून की बारिश ने तो दगा दे दिया लेकिन नहरी पानी ने खुशहाल कर दिया। पहाड़ों की बारिश से इस बार 41 नहरों व माइनरों की टेल फीड हुई है। जिले की कुड़ल डिस्ट्रिब्यूटरी में 20 साल बाद व नंगला माइनर की टेल पर 39 साल बाद पानी पहुंचा है। कालूवाला माइनर की टेल पर 37 साल बाद पानी पहुंचा है। सिंचाई विभाग अधिकारी भी हैरानगी में हैै। 11 जुलाई से नहरी पानी चल रहा है। मंगलवार को पूरे 60 दिन हो गए हैं जबकि पिछले मानसून सीजन में आमतौर पर करीब 45 दिनों तक चलता रहा है। इस बार मानसून की कुल बारिश 315 एमएम रिकार्ड की गई है।
जिले में इस बार मानसून की औसत से काफी कम बारिश हुई है। जुलाई माह में सबसे ज्यादा बारिश की जरूरत होती है लेकिन जुलाई माह में मात्र 21 एमएम बारिश ही हुई। बारिश कम होने पर किसानों को नहरी पानी से ही सिंचाई करने में मदद मिली है। नहरी पानी के जरिए किसानों ने जैसे- तैसे फसलों की सिंचाई की है ताकि फसलों का पकाव ठीक प्रकार से हो सके। जिले में इस बार मई माह से सितंबर तक 315 एमएम बारिश हुई है। मई माह में आठ एमएम बारिश हुई। जून में सर्वाधिक 188 एमएम बारिश दर्ज की गई। जुलाई माह मे 21 एमएम, अगस्त माह में 84 एमएम और सितंबर में 14 एमएम बारिश दर्ज की गई। जुलाई व अगस्त माह में बारिश कम होने पर किसानों के समक्ष सिंचाई का ज्यादा संकट गहराया। वर्ष 2016 में जुलाई माह में 210 एमएम व अगस्त माह में 241 एमएम बारिश हुई थी।
बारिश का गत वर्षो का आंकड़ा
2014 वर्ष -207 एमएम बारिश
2015 वर्ष-309 एमएम
2016 वर्ष-576 एमएम
2017 वर्ष-315 एमएम
2017 में खरीफ बिजाई की स्थिति
बाजरा-37600 हेक्टेयर क्षेत्र
धान --11300 हेक्टेयर
ग्वार --28700 हेक्टेयर
कपास- 27605 हेक्टेयर
फोडर- 4600 हेक्टेयर
गन्ना-- 1500 हेक्टेयर
जुलाई से चल रहा है इस बार नहरी पानी
11 जुलाई से नहरों में पानी लगातार चल रहा है। जिले की सभी माइनरों व डिस्टीब्यूट्री के अलावा मेन नहरों में पानी एक साथ चला है। जिले की मेन लोहारू कैनाल है। इस नहर की क्षमता 600 क्यूसेक पानी तक है। इसके तहत काफी डिस्टीब्यूट्री और माइनर हैं जिनके जरिए नहरी पानी टेल तक पहुंचता है। इस बार नहरों में पड़ोसी राज्यों से पानी ज्यादा मात्रा में पहुंचा है। नहरों में पहाड़ों से पानी का दबाव बना रहा जिससे नहरें पानी से लबालब रही। लगातार पानी चलने से माइनरों व नहरों की टेल फीड हो गई। इनके अंतिम छोर तक पानी पहुंचने पर किसानों के समक्ष सिंचाई का संकट भी इतना नहीं बना रहा। नहरों में 60 दिनों से लगातार पानी चल रहा है जबकि गत सालों के दौरान पानी 45 से 50 दिनों तक ही मुश्किल से चलता रहा है। इस बार 28 सितंबर तक नहरों में पानी चलने की उम्मीद जताई जा रही है।
नंगला माइनर की 39 साल बाद टेल फीड हुई
इस बार इन 60 दिनो के दौरान जिले की 41 बड़ी व छोटी नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचा है। पानी टेल तक पहुंचते-पहुंचते रास्ते में पड़ने वाले गांवों के तालाबों में भी पानी डलता रहा। जलघरों में भी पानी की कमी नहीं रही। जिले की नंगला माइनर केी टेल 39 साल बाद फीड हुई है। इसी प्रकार कालूवाला माइनर की टेल पर 37 साल बाद पानी पहुंचा है। कुड़ल डिस्टीब्यूट्री में 20 साल बाद नहरी पानी टेल पर पहुंचा है। भैरवी माइनर की टेल 27 साल बाद फीड हुई है।
इन नहरों और माइनरों की हुई टेल फीड
लोहरवाड़ा माइनर, समसपुर माइनर, कितलाना डिस्टीब्यूट्री, भैरवी माइनर, साहुवास माइनर, पांडवान माइनर, अटेला डिस्टीब्यूट्री, बिरही माइनर, बिरही सब माइनर, डूडीवाला डिस्टीब्यूट्री, रामपुरा डिस्टीब्यूट्री, कुड़ल डिस्टीब्यूट्री, कालूवाला माइनर, नंगला माइनर, उमरवास माइनर, केहरपुरा, भारीवास माइनर, भारीवास सब माइनर, पोकरवास माइनर, पोकरवास सब माइनर, पिचौपा डिस्टीब्यूट्री की टेल पांच साल बाद फीड हुई है। इसी प्रकार हड़ोदी डिस्टीब्यूट्री, गोकल डिस्टीब्यूट्री, पिचौपा माइनर, कुब्जानगर माइनर, गुडाना माइनर, शीशवाला सब माइनर, झोझू कलां माइनर, बलाली माइनर, बलाली सब माइनर, खेड़ी सनसनवाल माइनर, 1-आर माइनर बधवाना, रामनगर माइनर, मकड़ाना सब माइनर, दूधवा माइनर, दूधवा रेजिंग माइनर,पैतावास कलां माइनर, मानकावास माइनर, रूपगढ़ माइनर, गौरीपुर माइनर व प्रहलादगढ़ माइनर की टेल तक पानी पहुंचा है।
वर्सन-
इस बार नहरों में पानी ज्यादा चलने की वजह से यह टेल फीड हुई है। जिले के चारों की नहरों और माइनरों की टेलों तक पानी पहुंचा है। इससे जोहड़ व तालाब भी भरे गए हैं। - एसडीओ राहुल छिल्लर, सिंचाई विभाग