झज्जर। जिला में व्यस्क बीसीजी टीकाकरण अभियान जारी है। इसमें अब तक 18756 व्यस्कों ने बीसीजी का टीका लगवाकर अपनी क्षय रोग की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई है, जबकि प्रदेश में तीन लाख 85 हजार 471 व्यस्कों को टीका लगाया है। प्रदेश में व्यस्कों को टीबी से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रदेश के 11 जिलों में अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
पहले चरण में सोनीपत, अंबाला, भिवानी, हिसार, झज्जर, जींद, कैथल, नूंह, पंचकूला, रोहतक व सिरसा में बीसीजी टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान के वैज्ञानिक अध्ययन को ध्यान में रखकर टीबी मुक्त भारत के लिए आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। अब तक टीबी रोकने के लिए केवल जन्म से एक वर्ष तक के बच्चों को टीका लगता था। व्यस्क बीसीजी टीका 60 साल से अधिक आयु वाले सहमत तथा 18 से 60 वर्ष तक के व्यस्क जिनमा बीएमआई 18 किलोग्राम प्रति स्क्वेयर मीटर या उससे कम हैं। डायबिटीज के मरीज, धूम्रपान करने वाले, पिछले 5 वर्षों के टीबी मरीजों व उनके संपर्क में आने वाले लोगों, परिवार के व्यस्क सदस्यों, पिछले 3 वर्षों के सक्रिय टीबी मरीजों व उनके संपर्क में आने वाले लोगों आदि को लगाया रहा है। सिविल सर्जन डॉ. ब्रह्मदीप सिंह ने बताया कि बीसीजी का टीका 14 साल तक असरदार होता है। इसलिए अब उन सभी लोगों को यह टीका लगाया जाएगा, जिन्हें टीबी होने का खतरा है। 16 देश भारत से पहले ही व्यस्कों में एकाधिक बीसीजी टीकाकरण अभियान चालू कर चुके हैं। ऐसा पाया गया है कि इससे 36 प्रतिशत टीबी होने की घटना कम होती है। इसके लिए सभी कार्य टीबी-विन पर कोविन एप की तर्ज पर किए जा रहे हैं।
ये हैं टीबी बीमारी के लक्षण
दो सप्ताह से ज्यादा खांसी रहना।
रात को सोते समय पसीना आना, ठंड में भी पसीना आना।
बुखार आना, संक्रमण बढ़ने के साथ बढ़ना।.
थकावट होना।
वजन कम होना।
सांस लेने में दिक्कत होना।