बहादुरगढ़। शहर के रेलवे रोड पर करुणा निधान सेवा समिति की ओर से कराई जा रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन वीरवार को कथा व्यास डॉ. नरेश चंद्र शास्त्री ने गोवर्धन पूजा की कथा सुनाई। जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। कथा व्यास ने कृष्ण की अनेकों बाल लीलाओं का वर्णन करने के बाद गोवर्धन पूजा एवं इंद्र के मान मर्दन की कथा सुनाई। इस अवसर पर भगवान गिरिराज महाराज के समक्ष सुंदर छप्पन भोग के दर्शन कराए गए। कथा वाचक डॉ. नरेश चंद्र शास्त्री ने बताया कि जहां सत्य एवं भक्ति का समन्वय होता है, वहां भगवान का आगमन अवश्य होता है। गाय की सेवा एवं महत्व को समझाते हुए उन्होंने बताया कि प्रत्येक हिंदू परिवार में गाय की सेवा अवश्य होनी चाहिए क्योंकि गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। गाय का दूध अमृत के समान बताया। उन्होंने कहा कि आज भी वृंदावन में बांके बिहारी को दिन में आठ बार भोग लगाया जाता है। पूरे सात दिन भगवान श्रीकृष्ण ने भूखे प्यासे गोवर्धन पर्वत को उठाए रखा था। गोवर्धन भगवान की पूजा सभी भक्तों को डॉ. नरेश चंद्र शास्त्री द्वारा विधि विधान से कराई गई। कथा व्यास ने अपने सुरीले कंठ से संगीत की मधुर स्वर लहरियों पर मैं तो गोवर्धन कूं जाऊं मेरे वीर नांप मानै मेरो मनुवा, श्री गोवर्धन महाराज-महाराज तिहारे माथे मुुकुट विराज रयौ आदि अनेकों मनमोहक भजन सुनाकर भक्तों को झूमने एवं नृत्य करने को विवश कर दिया। अंत में आरती के पश्चात सभी को छप्पन भोग का दिव्य प्रसाद वितरित किया गया। इस मौके पर करुणा निधान सेवा समिति के सदस्य मुकेश बंसल, भारत भूषण, महाबीर प्रसाद रतेरिया, सत्यनारायण अग्रवाल, शिव नारायण गुप्ता, साधूराम, संदीप रतेरिया, प्रशांत गोयल, अनुज कंसल, मनीषा, जग्गी बंसल, राजबीर बंसल, विक्रांत जैन, अनिल गर्ग, आनंद गुप्ता मौजूद रहे।