अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। राजस्थान पुलिस के साथ दादरी कोर्ट परिसर में आए एक कैदी को तीन बदमाशों ने पुलिस हिरासत से भगा दिया। चारों आरोपी कोर्ट परिसर से फरार हो गए और अलग-अलग दिशा में भाग गए। कोर्ट परिसर से फरार कैदी को गश्त कर रहे सिटी एसएचओ की टीम ने दबोच लिया। उसे पुराना सिविल अस्पताल के सामने से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद आरोपी से पुलिस ने पूछताछ की। इससे पहले कैदी के फरार होने से जिला पुलिस में हड़कंप मच गया और पूरे जिले में तुरंत नाकाबंदी की गई।
जानकारी के अनुसार राजस्थान पुलिस चिड़ावा निवासी सोनू पुत्र रामभगत को शनिवार दोपहर दादरी कोर्ट में पेश करने लाई थी। जब पुलिस टीम उसे कोर्ट से पेश कर पैदल गाड़ी तक ला रही थी तो पुलिस गार्द की हिरासत से उसे तीन बदमाशों ने छुड़वा लिया। पुलिस कर्मियों ने उन्हें पकड़ने का प्रयास किया लेकिन पलक झपकते ही सभी आरोपी पिछले गेट से फरार हो गए। कोर्ट परिसर की दीवार फांदने के बाद चारों आरोपी अलग-अलग दिशा में फरार हो गए। इसी दौरान राजस्थान पुलिस का कैदी कोर्ट के पीछे तंग गली में घुस गया और इसके बाद सरदार झाडू सिंह चौक होते हुए सिविल अस्पताल के समीप जा पहुंचा।
इससे पहले कैदी के फरार होते ही पुलिस कंट्रोल रूम से सभी थानों व चौकियों सहित राइडर और पीसीआर में तैनात पुलिस कर्मियों को वीटी के जरिये सूचना दी गई। इसके बाद पुलिस टीमों ने 16 अलग-अलग जगहों पर नाकाबंदी कर दी और सिटी थाना प्रभारी की टीमों सहित राइडरों पर तैनात कर्मचारी भी शहर में तैनात हो गए। डीएसपी हेड क्वार्टर प्रदीप नैन ने स्पेशल स्टाफ को बस स्टैंड और सीआईए टीम को बाहरी क्षेत्र में गश्त करने भेज दिया। सिटी थाना प्रभारी दलबीर सिंह अपनी टीम सहित गाड़ी में गश्त पर निकले। वो वाया परशुराम चौक होते हुए महेंद्रगढ़ चुंगी क्षेत्र में जा रहे थे। जब वो पुराना सिविल अस्पताल के समीप पहुंचे तो उन्हें एक युवक भागता हुआ नजर आया। उन्होंने संदेह के आधार पर उसे तुरंत पकड़ लिया। उससे मौके पर पूछताछ की गई तो वह चिड़ावा निवासी कैदी सोनू ही मिला। सिटी थाना प्रभारी उसे थाने ले आए और इसकी जानकारी डीएसपी हेड क्वार्टर और पुलिस अधीक्षक स्मिति चौधरी सहित कंट्रोल रूम में दी गई। करीब तीन बजे पूरे पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली।
60 पुलिसकर्मी कोर्ट और कैदियों की सुरक्षा में हैं तैनात
कैदियों को जेलों से लाने व वापस ले जाने के लिए दो गार्द नियुक्त हैं। एक गार्द में 12 कर्मचारी हैं। इसके अलावा 16 पुलिस कर्मी कोर्ट परिसर में लगाए गए बैरिकेड्स पर तैनात हैं। ये कोर्ट परिसर के दायरे में पहुंचने वालों की तलाशी लेने के साथ-साथ संदिग्धों पर नजर भी रखते हैं। वहीं, कोर्ट परिसर की सुरक्षा को देखते हुए दुर्गा शक्ति प्लाटून नंबर-एक की तैनाती भी की गई है। पुलिस सूत्रों की मानें तो कैदी को छुड़ाने की घटना के समय यहां 60 पुलिस कर्मी तैनात थे।
पुलिस टीमों ने उठाए सभी आवश्यक कदम : डीएसपी
डीएसपी प्रदीप नैन ने बताया कि कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए यह पुलिस प्रशासन की मॉक ड्रिल थी। इसकी जानकारी एसपी स्मिति चौधरी, मुझे और सिक्योरिटी इंचार्ज मंजीत अहलावत को ही थी। हम जिला पुलिस की मुस्तैदी देखना चाहते थे। इस औचक पूर्वाभ्यास में जिस कैदी को तीन बदमाशों ने छुड़ाया है उसे हमने चिड़ावा निवासी सोनू पुत्र रामदत्त का काल्पनिक नाम दिया। वह वास्तव में कैदी नहीं है बल्कि सुरक्षा शाखा में ट्रेनिंग के लिए आया आईटीआई पास प्रशिक्षु है। अगर किसी पुलिस कर्मी को बोगस कैदी बनाते तो कोर्ट सुरक्षा या थानों में तैनात कर्मचारी पहचान लेते। इसलिए आईटीआई पास प्रशिक्षु को एसपी स्मिति चौधरी के निर्देशानुसार कैदी बनाया गया। पुलिस टीमों का रिएक्शन टाइम सही मिला और सिटी थाना प्रभारी दलबीर सिंह ने सोनू को पुराना सिविल अस्पताल के समीप से गिरफ्तार किया। इस समयावधि में पुलिस ने वो सभी आवश्यक कदम उठाए जो कैदी भागने पर उठाए जाने चाहिएं।
नोट:-
(पुलिस प्रशासन का दावा है कि यह मॉक ड्रिल थी लेकिन यह वास्तविकता के हिसाब से की गई। इसके तहत कैदी भागने में कामयाब तो हुआ लेकिन करीब 350 मीटर की दूरी पर वह पकड़ा गया। अगर यह सच्ची घटना होती तो जिला पुलिस प्रशासन क्या कदम उठाता, इसकी जानकारी पाठकों को देने के लिए अमर उजाला ने भी इसे वास्तविक घटना की तरह ही प्रकाशित किया है।)