फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सफल किसान देसी गाय के गोबर व गोमूत्र से खेती कर कमा रहा कम पैदावार पर भी ज्यादा मुनाफा

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

चरखी दादरी।
जिले के गांव अटेला का किसान पिछले छह साल से जैविक खेती कर रहा है। इस बार किसान ने जैविक खाद से तैयार कर गेहूं 3100 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बेचा है, जबकि गेहूं का सरकारी समर्थन मूल्य 1735 रुपये प्रति क्विंटल है। किसान अपने घर पर ही गाय के गोबर से जैविक खाद तैयार कर प्रति एकड़ 55 हजार रुपये कमा रहा है। किसान दीवान सिंह ने बताया कि जैविक खेती में भले ही पैदावार कम हो लेकिन मुनाफा सामान्य खेती से अधिक होता है।
जैविक उत्पाद की मांग दिन प्रतिदिन इतनी बढ़ रही है कि किसान लोगों की मांग को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। बरसों पुरानी परंपरा को अपना कर जिले के कुछ किसान समृद्धि की ओर अग्रसर हैं। किसान अब रासायनिक खेती को छोड़कर प्राकृतिक पद्धति को अपनाने लगे हैं। जिला के गांव अटेला निवासी सफल किसान दीवान सिंह ने 2012 में जैविक खेती शुरू की थी। उस समय उन्होंने एक एकड़ में जैविक रूप से गेहूं की फसल उगाई थी। दीवान सिंह आज करीब नौ एकड़ भूमि में जैविक खेती कर रहे हैं। सफल किसान दीवान का कहना है कि जैविक खेती के लिए शुरूआत में ज्यादा मेहनत की जरूरत होती है। एक बार प्रक्रिया समझ आने के बाद दिक्कत नहीं आती। उन्होंने बताया कि वे अपने घर पर देसी गाय रखते हैं और उसके गोबर व मूत्र से जीवामृत बनाते हैं। केवल इस जीवामृत के प्रयोग से ही जैविक खेती कर रहे हैं। किसान दीवान का कहना है कि एक देसी गाय के गोबर व मूत्र से एक एकड़ में बड़ी आसानी से जैविक खेती की जा सकती है। उनका कहना है कि जैविक खेती में हालांकि पैदावार आम खेती के मुकाबले कुछ कम हैं, लेकिन जैविक उत्पादों की कीमत अधिक होती है, जिससे कम उत्पादन होने पर भी आम खेती के मुकाबले जैविक खेती से ज्यादा मुनाफा होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

किसान दीवान सिंह के अनुसार इस बीते रबी सीजन में उसने जैविक खाद से गेहूं की बढ़िया फसल ली है। यह गेहूं उसने 3100 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बेचा है।

10वीं पास है दीवान सिंह
10वीं कक्षा तक पढ़े किसान का कहना है कि जैविक खेती से वे करीब 55 हजार रुपये प्रति एकड़ कमा रहे हैं। गेहूं के अलावा वे मूंग, सरसों और बाजरा आदि बोते हैं। छह साल पहले जब जैविक खेती के बारे में उन्होंने सुना तो वे काफी प्रभावित हुए। विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से उन्हें अधिक जानकारी मिली। उसके बाद उसने शुरूआत में एक एकड़ में जैविक खेती शुरू की। किसान दिवान के अनुसार वे सभी किसानों को जैविक खेती अपनाने की सलाह देते हैं । हमारी भावी पीढ़ी को काफी लाभ होगा और जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ेगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें