चरखी दादरी। मरीजों को राहत देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिला मुख्यालय अस्पताल में एलसीसी (लैब कलेक्शन सेंटर) की सेवा शुरू कर दी है। प्रदेश के अन्य अस्पतालों में यह सुविधा पहले से है, लेकिन जिला बनने के बाद चरखी दादरी में यह सुविधा करीब दो साल बाद मिल पाई है। एलसीसी यूनिट के लिए अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग की जगह निर्धारित की गई है। वीरवार को खून और यूरिन से संबंधी सभी प्रकार के टेस्ट लैब कलेक्शन केंद्र में ही किए गए। इन सैंपलों की रिपोर्ट मरीजों को यहीं से प्राप्त करनी होगी। यह सेवा शुरू होने से मरीजों को नई से पुरानी बिल्डिंग की भागदौड़ से निजात मिली है। इससे पहले नई से पुरानी और पुरानी से नई बिल्डिंग में आते-जाते समय मरीजों और उनके परिजनों को करीब 400 कदम की दूरी तय करनी पड़ती थी।
स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का दंश झेल रहे सिविल अस्पताल में अब व्यवस्थाएं पटरी पर लौटने की उम्मीद जगी है। सबसे अधिक तो मरीज नई से पुरानी और पुरानी से नई बिल्डिंग की भागदौड़ से है। ओपीडी पर्ची पुरानी बिल्डिंग में बनती है और पहले टेस्ट नई बिल्डिंग में होते थे। इससे कभी मरीज व तीमारदारों को नई तो कभी पुरानी बिल्डिंग में पहुंचकर टेस्ट सहित अन्य औपचारिकताओं को पूरा करना पड़ता था। अब सिविल अस्पताल में यह झंझट खत्म हो गया है। अब मरीज को यह भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। मरीज के टेस्ट लेकर रिपोर्ट लेने और फिर चिकित्सक को दिखाने और दवाएं लेने तक के कार्य अब सिविल अस्पताल में ही होंगे। इसके लिए सीएमओ विरेंद्र यादव ने पुरानी बिल्डिंग में एलसीसी यूनिट शुरू कर दी है। यहां होने वाले टेस्टों के लिए एलटी (लैब टेक्नीशियन) और सहायक की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा मरीजों को टेस्ट के अगले दिन रिपोर्ट देने का काम एक सक्षम योजना के तहत लिया गया कर्मचारी करेगा और उसकी तैनाती भी सीएमओ ने यहां कर दी है।
सिविल अस्पताल में प्रतिदिन औसतन ओपीडी 450 से 500 के बीच है। यहां प्रतिदिन करीब 350 से 400 खून और यूरिन के विभिन्न प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं। इसके अलावा नई बिल्डिंग में बलगम जांच की जाती है। एलसीसी हाल ही में शुरू हुई है और इससे पहले इनमें से कुछ टेस्ट नई बिल्डिंग में जबकि कुछ पुरानी में होते थे। इससे पहले ओपीडी पर्ची बनवाने मरीज को पुरानी बिल्डिंग में आना पड़ता था और फिर चिकित्सक को दिखाने के बाद टेस्ट कराने नई बिल्डिंग में जाना पड़ता था।
बलगम की जांच होगी नई बिल्डिंग में
खून और यूरिन के टेस्ट का स्थान पुरानी बिल्डिंग निर्धारित किया गया है। वहीं, बलगम की जांच अब नई बिल्डिंग में ही होगी। सीएमओ विरेंद्र यादव ने बताया कि टेस्ट के लिए खून और यूरिन के सैंपल नई बिल्डिंग तक पहुंचाने का कार्य के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाएगी। अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में एलसीसी यूनिट वर्किंग में आ चुकी है। यहां सर्दियों में मरीजों के टेस्ट सुबह नौ से दोपहर एक बजे तक किए जाएंगे। दोपहर एक से तीन बजे तक स्टाफ रिपोर्ट तैयार करेगा। मरीज अपनी रिपोर्ट अगले दिन टेस्ट वाली जगह से ही ले सकता है। इसके लिए बाकायदा एक खिड़की बनाई गई है। एसएमओ अनीता गुलिया ने बताया कि एलसीसी की स्थापना के बाद प्रतिदिन 400 टेस्ट कराने वाले मरीजों को राहत मिलेगी।
ओपीडी पर्ची पर नहीं अलग से फॉर्मेट में तैयार होगी रिपोर्ट
सिविल अस्पताल में अब तक ब्लड या यूरिन टेस्ट की रिपोर्ट लैब टेक्नीशियन द्वारा ओपीडी पर्ची पर लिखी जाती थी लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। एलटी को बाकायदा फॉर्मेट में बिंदु वाइज रिपोर्ट भरनी होगी। अब मरीज को टेस्ट के बाद ओपीडी पर्ची यहां जमा कराने की जरूरत नहीं है बल्कि वह सैंपल देने के बाद ओपीडी पर्ची अपने पास रखकर दवा काउंटर से दवा भी ले सकता है।
अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में एलसीसी यूनिट हमने शुरू कर दी है। अब मरीजों को नई बिल्डिंग की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। अस्पताल प्रतिदिन औसतन 400 से 450 टेस्ट होते हैं। इनकी रिपोर्ट अब ओपीडी पर्ची पर नहीं बल्कि अलग फॉर्मेट पर लिखकर दी जाएगी। - डॉ. विरेंद्र यादव, सीएमओ