अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा बेशक बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे किए जाते हों, मगर बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल में रेबिज के इंजेक्शन की सुविधा भी नहीं है। किसी व्यक्ति को कोई कुत्ता या बंदर काट ले तो उन्हें निजी अस्पतालों में महंगे रेट पर इंजेक्शन लगवाने पड़ रहे हैं। हरी नगर निवासी राजपाल यादव ने भी अब सरकारी अस्पताल के चक्कर काटने के बाद निजी अस्पताल में इंजेक्शन लगवाया है।
दरअसल, हरी नगर निवासी राजपाल एचएसआई कंपनी में स्टोर मैनेजर हैं। गत 4 मई को वह सुबह दूध लेने जा रहे थे। इसी दौरान में एक कुत्ते ने पीछे से उनके पांव को काट लिया। घरेलू उपचार करने के बाद वह अपने बेटे के साथ नागरिक अस्पताल में गया। वहां 100 रुपये की पर्ची कटवाने को कहा गया। जब वह पर्ची के लिए काउंटर पर गया तो स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि अस्पताल में रेबिज के इंजेक्शन ही नहीं है। इसके बाद उसने बाहर एक निजी अस्पताल में इंजेक्शन लगवाया। राजपाल ने कहा कि शहर में काफी संख्या में कुत्ते व बंदर हैं। अक्सर ये लोगों को काट लेते हैं।
आ जाते हैं इतने केस
नागरिक अस्पताल बहादुरगढ़ में पशुओं द्वारा काटने के रोजाना 10 से 15 केस आ जाते हैं। मगर रेबिज इंजेक्शन न होने के कारण इन्हें वापस लौटना पड़ता है। वैसे नागरिक अस्पताल में इस इंजेक्शन की कीमत 100 रुपये है। मगर लोगों को बाहर 400 से 500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
भेजी है डिमांड
इंजेक्शन खत्म हो गए हैं। डिमांड भेजी गई है मगर अभी सप्लाई नहीं आई है। कुछ दिन से दिक्कतें हो रही हैं। फिलहाल कोई पेशेंट आता है तो उसे टीटी का इंजेक्शन लगाकर पीजीआई रेफर किया जाता है। पीजीआई में यह इंजेक्शन मुफ्त लगता है। यदि शीघ्र ही सप्लाई आती है तो ठीक है वरना अपने स्तर पर खरीदकर इंजेक्शनों की व्यवस्था की जाएगी।
-वीरेंद्र अहलावत, प्रशासक, नागरिक अस्पताल, बहादुरगढ़