अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर/बहादुरगढ़।
क्षेत्र में सीजन का यह पहला कोहरा गहरे स्मॉग क ो अपने साथ लाया। स्मॉग के कारण इलाके में दिनभर जन जीवन अस्त व्यस्त रहा। दृश्यता महज 2-3 मीटर तक रह गई। साथ ही यातायात व्यवस्था प्रभावित होने से लोगों को भारी परेशानी हुई। स्मॉग में वाहन रेंगते रहे।
राजधानी दिल्ली के साथ सटा होने एवं उद्योग नगरी होने क ी वजह से बहादुरगढ़ में सर्दियों के मौसम में हर वर्ष स्मॉग का संकट छा जाता है। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार सर्दी थोड़ी देर से शुरू हुई है। मंगलवार को क्षेत्र में सीजन का पहला कोहरा पड़ा, मगर इसमें कोहरे की मात्रा कम, स्मॉग ज्यादा था। स्मॉग की वजह से इलाके में जन जीवन पूरी तरह से प्रभावित हो गया। सुबह के वक्त तो यातायात पूरी तरह से थम गया। 6 बजे से लेकर 8 बजे तक परेशानी अधिक हुई। विजिबिलिटी 2-3 मीटर तक रह गई। चालकों को वाहनाें की लाइटें जलानी पड़ी। माल ढोने वाले बड़े वाहन बाईपास पर सड़क किनारे खड़े रहे। दोपहर को कुछेक वाहन दिल्ली के लिए रवाना हुए तो नो इंट्री के डर की वजह से बहुत से चालकों को रात होने का इंतजार करना पड़ा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि हवा की रफ्तार कम होने की वजह से मंगलवार को विजिबिलिटी खराब थी। वहीं, अन्य दिनों की अपेक्षा मंगलवार को क्षेत्र में ठंड काफी बढ़ गई। अधिकतम तापमान 30 तो न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस तक रहा। सुबह के वक्त ठंड ज्यादा था। स्कूल जाने में बच्चों को परेशानी हुई।
लोगों को हुई परेशानी
सुबह ही नहीं दोपहर बाद तक भी आसमान में स्मॉग छाया हुआ था। जिससे लोगों को बेहद परेशानी हुई। वाहन चालक सुनील ने बताया कि वह सुबह सोनीपत गया था। ज्यादा स्मॉग के कारण आगे चल रहे वाहनों की बस लाइटें ही दिखाई दे रही थी। बेहद मुश्किल से सफर तय किया। चालक सुरेश ने बताया कि उन्हाेंने जिंदगी में पहली बार इतना स्मॉग देखा। उधर, चिकित्सकों की मानें तो कोहरे की वजह से प्रदूषण ऊपर नहीं उठ पाता। इस वजह से आंखाें में जलन व श्वास संबंधी बीमारियां पनपनी शुरू हो जाती है।
फसलाें को नुकसान
उधर, कृषि अधिकारी डा. देवराज ओहल्याण ने बताया कि कोहरे से रबी की फसल को फायदा होता है। मगर कोहरे के साथ यदि स्मॉग छाया तो सब्जियों व अन्य फसलों को नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि किसानाें को भी पराली और अन्य कृषि अवशेष न जलाने के लिए लगातार जागरूक किया जाता है।
वर्जन
मंगलवार को पीएम-टेन 210 के करीब था। यह औसतन 100 होना चाहिए। फैक्टरियों के धुएं, फसलाें के अवशेष जलाने के कारण प्रदूषण बढ़ने से यह समस्या ज्यादा होती हैै।
- बीएस चहल, कार्यकारी अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बहादुरगढ़।
- गहरे स्मॉग से इलाके में जन जीवन रहा अस्त व्यस्त
- दृश्यता सिमटकर रह गई 2-3 मीटर तक, रेंगते रहे वाहन