अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
कारगिल विजय दिवस पर आज पूरा देश कारगिल शहीदों को याद कर रहा है। कारगिल जीत में हरियाणा के जवानों का विशेष योगदान रहा। देश के लिए प्राणों का बलिदान देने वालों में झज्जर जिले के 11 जवान शामिल थे। इन रणबांकुरों की शहादत पर आज भी उनके परिजन एवं जिले के लोग गर्व करते हैं।
बहादुरगढ़ के गांव देसलपुर के जयप्रकाश, जाखोदा के मेजर आजाद सिंह, नीलोठी के सिपाही श्याम सिंह, सोलधा के नायक रामफल, बराही के कैप्टन अमित वर्मा और गांव खुंगाई के हलवदार हरिओम धारीवाल कारगिल संघर्ष में अपने देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए। झज्जर के गांव सुबाना के सुरेंद्र सिंह, जैतपुर के विनोद कुमार, जटवाड़ा के लीलाराम, झांसवा के राजेश और गांव ढाकला के धर्मवीर भी दुश्मन के दांत खट्टे कर बलिदान देने वालों में शामिल थे।
8 शत्रु किए थे ढेर
गांव खुंगाई के निवासी हवलदार हरिओम धारीवाल जाट रेजिमेंट की 17वीं बटालियन के हवलदार थे। हरिओम 7 जुलाई 1999 को मशकोह घाटी में दुश्मन से लोहा ले रहे थे। उन्होंने शत्रु के आठ सैनिकों को मार गिराया। वह लड़ते हुए दुश्मन के मोर्चे पर टूट पड़े। इस दौरान वह दुश्मन के गोले की चपेट में आकर शहीद हो गए। लेकिन तब तक अपने मोर्चे पर वह देश की जीत को आसान बना चुके थे। हरिओम की वीरांगना पत्नी निर्मला का करीब 3 साल पहले एक सड़क हादसे में निधन हो गया। फिलहाल उनके परिवार में उनकी बेटी ऋतु और बेटा अजय हैं। दोनों के मन में अपने पिता की तरह सेना के प्रति अटल सम्मान है। पत्नी निर्मला ने वीर पति हरिओम की इच्छा का खयाल रखते हुए बेटी ऋतु की शादी भी एक आर्मी कैप्टन के साथ की है।
द्रास में हुए शहीद
गांव देशलपुर के हवलदार जयप्रकाश जून 8 मई 1999 को कारगिल के द्रास सेक्टर में दुश्मन से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। जयप्रकाश के परिवार में पत्नी कमलेश, बेटा नवीन और मां प्यारी देवी हैं। परिवार के सभी लोग आज भी उनकी शहादत पर गर्व करते हैं।
टाइगर हिल के टाइगर
गांव सोलधा के नायक रामफल भी 6 जुलाई 1999 को कारगिल की टाइगर हिल पर दुश्मन के छक्के छुड़ाने वालों में शामिल थे। रामफल और उनके साथियों ने दुश्मन के 11 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद दुश्मन से लोहा लेते हुए वो ग्रेनेड से घायल हो गए और बाद में शहीद हो गए। नायक रामफल के परिवार में उनकी पत्नी अनीता, भाई रामकुमार, बेटे संदीप व रवि और बेटी सुमन हैं। रामफल के बच्चे आज भी अपने पिता के कार्यों से प्रेरणा लेते हैं। नायक रामफल श्रीलंका गई शांति सेना में भी शामिल थे। इसके लिए उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था।
अच्छा है जीवन स्तर
वर्ष 1999 में कारगिल संघर्ष में शहीद हुए अधिकतर सैनिकों के परिवार अपने देश पर गर्व करते हैं। तत्कालीन सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं से इन परिवारों को हर जरूरी मदद मिल रही है। लगभग सभी परिवारों की आर्थिक स्थिति अच्छी है। गांव खुंगाई के शहीद हवलदार हरिओम धारीवाल के परिवार को सरकार से पेट्रोल पंप मिला था। इसको हरिओम का बेटा अजय संभालते हैं। वह सेक्टर-6 में रहते हैं। गांव देसलपुर के शहीद हवलदार जयप्रकाश जून का बेटा नवीन गुरुग्राम में पेट्रोल पंप संचालित करते हैं। शहीद का परिवार गांव में ही रहता है। गांव सोलधा के शहीद नायक रामफल के बेटे संदीप व रवि भी पेट्रोल पंप चला रहे हैं। यह परिवार बहादुरगढ़ में रहता है। नीलोठी के शहीद लांस नायक श्याम सिंह का का परिवार भी गौरवमय ढंग से रह रहा है। बराही के शहीद अमित वर्मा का परिवार दिल्ली में और जाखोदा के शहीद कमांडेंट आजाद सिंह की पत्नी अलका अपने परिवार के साथ गुरुग्राम में रहती हैं। वह वकील हैं।
इन 11 जवानों ने दी थी अपने प्राणों की आहुति
नाम गांव
हवलदार हरिओम खुंगाई
सिपाही धर्मवीर ढाकला
ग्रेनेडियर सुरेंद्र सुबाना
लांस नायक झांसवा
सिग्नल मैन विनोद जैतपुर
लांस नायक नीलोठी
असि. कमांडेट आजाद जाखोदा
हवलदार जयप्रकाश देशलपुर
नायक लालाराम जटवाड़ा
कैप्टन अमित बराही
नायक रामफल सोलधा