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बाजरा बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया 16397 किसानों ने, मंडी पहुंचे 6511 किसान

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झज्जर। प्रदेश सरकार की तरफ से बाजरा बेचने के लिए इस बार कोई गड़बड़ी न हो इस उद्देश्य से मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने की योजना बनाई थी। किसानों की सुविधा के लिए गांव-गांव जाकर अधिकारियों ने किसानों का रजिस्ट्रेशन करवाया था। 16397 किसानों ने मंडियों में बाजरा बेचने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवाया और उसके आधार पर ही बाजरे की खरीद भी शुरू हो गई। खरीद कार्य शुरू हुए एक माह से अधिक समय बीत चुका है और खरीद का कार्य बंद होने में मात्र 11 दिन का समय शेष बचा हुआ है। लेकिल अब तक जिला के मात्र 6511 किसान मंडियों में बाजरा बेचने के लिए पहुंचे हैं। अधिकांश किसानों ने अपनी बाजरे की फसल निकाल ली है और मंडियों में भी भेज दी है। अब नाममात्र के किसान ही ऐसे बचे हुए हैं जो बाजरा बेचने के लिए मंडियों में आएंगे। लेकिन सवाल यह उठता है कि करीब साढ़े 9 हजार रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसान आखिर बाजरा बेचेने के लिए कहां चले गए।
झज्जर जिला में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार 16683 किसानों ने बाजरे की फसल बोई हुई थी। इनमें से 16 हजार 397 किसानों ने मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर अपनी फसल बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया था। सरकार के निर्देशानुसार जिन किसानों ने पोर्टल पर अपना ब्योरा दिया है और अपना रजिस्ट्रेशन कराया है उन किसानों का ही बाजरा खरीदा जा रहा। केंद्र सरकार ने इस बार किसानों का बाजरा खरीदने के लिए 1950 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य निर्धारित किया हुआ है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस बार झज्जर जिला में करीब 65 हजार एमटी बाजरे की खरीद का लक्ष्य रखा गया है। झज्जर जिला में करीब 33 हजार हेक्टेयर भूमि में बाजरे की फसल बोई गई थी।
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25 हजार एमटी बाजरा की हुई खरीद
जिला में किसानों के रजिस्ट्रेशन के हिसाब करीब 65 हजार एमटी बाजरे की खरीद होनी चाहिए। लेकिन यहां तो बाजरे की खरीद 30 हजार एमटी भी पहुंचती दिखाई नहीं दे रही है। क्योंकि बाजरे की कढ़ाई का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। अब किसान आगामी फसलों की बिजाई में जुटे हुए हैं। अब तक जिला की तीनों अनाज मंडियों में 25 हजार 451 एमटी बाजरे की खरीद हो चुकी हैं और आगामी दस दिनों में दो से तीन हजार एमटी बाजारा भी आता दिखाई नहीं दे रहा है।
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विभाग की तरफ गांव-गांव जाकर बाजरे के लिए किसानों का रजिस्ट्रेशन किया था। उसके बाद राजस्व विभाग ने भी इसकी गिरदावरी की थी। लेकिन बाजरा बेचने के लिए किसान मंडियों में नहीं आए यह अलग बात है। किसानों की मर्जी की बात है वे अपनी फसल बेचते हैं या नहीं। पिछले दिनों काफी किसानों की फसल बारिश का पानी भरने से खराब भी हो गई थी।
- डॉ. रोहताश, डीडीए, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, झज्जर।
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